Science News: बृहस्पति के आकार के ग्रह को खा गया तारा, भारतीय वैज्ञानिक की टीम ने देखा दुर्लभ नजारा

वैज्ञानिकों का कहना है, कि एक दिन हमारी पृथ्वी का भी भाग्य ऐसा हो होगा, जब हमारा सूर्य, हमारी धरती को पूरी तरह से निगल लेगा।

Star engulfing Jupiter-sized planet

Star engulfing Jupiter-sized planet: ब्रह्मांड में हर पल ऐसी करोड़ों-अरबों घटनाएं होती रहती हैं, जिसे इंसानों के लिए पूरी तरह समझ पाना, शायद संभव नहीं है। ग्रह, नक्षत्र और तारों की दुनिया में होने वाली अजीब खलोगीय घटनाएं, इंसानों का सिर चकरा कर रख देती हैं।

पहली बार, वैज्ञानिकों ने हमारी अपनी आकाशगंगा में एक ग्रह को निगलते हुए एक फूला हुआ तारा देखा है। ये नजारा अपने आप में दुर्लभ था, जब वैज्ञानिकों की टीम ने देखा, कि एक विशालकाय तारा, बृहस्पति के आकार के एक ग्रह को निगल रहा है।

वैज्ञानिकों की टीम ने पता लगाया है, कि तारे की ये दावत, हमारी पृथ्वी से लगभग 12,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक ईगल-जैसे नक्षत्र अक्विला के पास हुई है।

बृहस्पति जैसे ग्रह को खा गया तारा

वैज्ञानिकों की टीम ने कहा है, कि सूर्य की तरह दिखने वाला तारा, जिसे ZTF SLRN-2020 के रूप में पहचाना गया है, ने गर्म गैस से भरे विशालकाय ग्रह को निगल लिया, जिसका आकार लगभग बृहस्पति के आकार का था।

कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों के साथ कई अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर इस अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना को देखा है।

शोधकर्ताओं की टीम ने मई 2020 में पहली बार खोजी गई इस घटना के बाद, अब एक ग्रह की मृत्यु की पुष्टि की है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों टीम अब इस ग्रह की मौत के बाद पृथ्वी की मौत की भी संभावनाओं पर नये सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है।

वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, कि जैसे ही तारों के पास ईंधन का खत्म होना शुरू होता है, वो फूलने लगते हैं, उनके आकार का विस्तार होने लगता है और एक तारा, अपने वास्तविक आकार से लाखों गुना ज्यादा फूल जाता है और इस दौरान वो अन्य ग्रहों के रास्ते में आ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है, कि अतीत में ऐसे संकेत मिले थे, कि तारे, किसी ग्रह को निगल लेते हैं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है, कि इस वास्तविक घटना को देखा गया है।

अक्विला नक्षत्र के पास घटी ये घटना

नेचर में प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट में, वैज्ञानिकों ने वर्णन किया है, कि कैसे उन्होंने लगभग 12,000 प्रकाश-वर्ष दूर एक तारे के विस्फोट को अक्विला नक्षत्र के पास देखा। लुप्त होने से पहले दस दिनों में ही ये तारा 100 गुना से ज्यादा चमकीला हो गया।

वैज्ञानिकों का कहना है, कि ऐसा लगा कि तारे से बहुत बड़ा प्रकाश बाहर निकला है और ये तारा सौ गुना से ज्यादा चमकीला हो गया। वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है, कि तारे से निकला ये फ्लैश कुछ और नहीं, बल्कि जिस वक्त ये तारा ग्रह को निगल रहा था, उस वक्त दोनों में हुई टक्कर से ये फ्लैश निकला था।

एमआईटी के कावली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च के पोस्टडॉक लीड लेखक किशलय डे ने बताया, कि वैज्ञानिकों की टीम "निगलने की प्रक्रिया और उसके अंतिम चरण को देख रही थी।" किशलय डे ने कहा, कि बृहस्पती के आकार का गर्म ग्रह तारे के वातावरण में आ गया था और फिर उसका अंत हो गया।

क्या पृथ्वी भी होगी ऐसे ही खत्म?

भारतीय वैज्ञानिक किशलय, जो वैज्ञानिकों की टीम को लीड कर रहे थे, उन्होंने हमारी पृथ्वी की भी मौत को लेकर एक संभावना पर प्रकाश डाला है।

उन्होंने कहा, कि "करीब पांच अरब साल के बाद पृथ्वी के भी नसीब में ऐसा हो होगा, जब सूर्य फूलना शुरू कर देगा"। उन्होंने कहा, कि "सिर्फ पृथ्वी ही नहीं, हमारे सौरमंडल के ज्यादातर ग्रह भस्म हो जाएंगे।" किशलय डे ने कहा, कि अगर उस वक्त किसी और ग्रह से हमें, यानि पृथ्वी को देख रहा होगा, तो वो करीब 10 हजार प्रकाश वर्ष दूर से पृथ्वी को सूर्य को निगलते हुए देखेगा। उस वक्त सूर्य की चमक कई गुना और बढ़ जाएगी और सूर्य से कुछ पदार्थ बाहर निकलेगा और उसके बाद चारों तरफ सिर्फ धूल ही धूल फैल जाएगा।"

शोधकर्ताओं की टीम ने मई 2020 में Zwicky Transient Facility (ZTF) डेटा के माध्यम से खोज करके तारे में हुए विस्फोट की खोज की थी, जो तेजी से बदलते, सितारों के लिए आकाश में होने वाले गतिविधियों का विश्लेषण करता है। रिसर्च के दौरान, किशले डे को एक ऐसा तारा मिला, जो सिर्फ एक सप्ताह में 100 गुना ज्यादा चमकीला हो गया, इससे पहले उन्होंने किसी भी विस्फोट को नहीं देखा था।

Star engulfing Jupiter-sized planet

कौन हैं भारतीय वैज्ञानिक किशलय डे

आपको बता दें, इस दुर्लभ घटना की रिसर्च को लीड भारतीय वैज्ञानिक किशलय डे कर रहे थे, जिन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से साल 2016 में ग्रेजुएशन किया है और फिर उन्होंने 2021 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी की।

कोलकाता के रहने वाले किशलय, नासा आइंस्टीन पोस्टडॉक्टोरल फेलो हैं और अमेरिका के प्रसिद्ध MIT कॉलेज में रिसर्च कर रहे हैं।

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      किशलय, आकाशगंगा और दूर के ब्रह्मांड में तारकीय बायनेरिज़ से लौकिक आतिशबाजी की खोज के लिए जमीन पर और अंतरिक्ष में विस्तृत क्षेत्र के इमेजिंग सर्वेक्षणों का काम करते हैं। तारों में होने वाले परिवर्तनों को समझने की कोशिश करते हैं और आकाशगंगा में गुरूत्वाकर्षण के प्रभाव को समझने के लिए रिसर्च करते हैं।

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