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श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के देश छोड़ने पर लगी रोक, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

8 मई को भी श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के खिलाभ भीषण प्रदर्शन शुरू हुआ था, जब उन्होंने पीएम पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों के पीएम आवास घेरने के बाद महिंदा राजपक्षे फरार हो गये थे।

कोलंबो, जुलाई 15: श्रीलंका की सर्वोच्च अदालत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और पूर्व वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे को 28 जुलाई तक बिना अनुमति के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। श्रीलंका से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, भ्रष्टाचार विरोधी समूह ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल श्रीलंका ने कहा है कि, सुप्रीम कोर्ट ने राजपक्षे भाइयो के देश से बाहर निकलने पर रोक लगा दी है।

महिंदा राजपक्षे के देश छोड़ने पर रोक

महिंदा राजपक्षे के देश छोड़ने पर रोक

आपको बता दें कि, श्रीलंका की सत्ता से बाहर हो चुके राजपक्षे परिवार के सदस्य किसी ना किसी तरह से देश छोड़ने की फिराक कर रहे हैं और राष्ट्रपति रहते हुए गोटाबाया राजपक्षे अपनी पत्नी के साथ देश छोड़कर भाग चुके हैं, वहीं वित्तमंत्री बासिल राजपक्षे ने भी दो दिन पहले देश से भागने की कोशिश की थी, लेकिन एयरपोर्ट पर बगावत के बाद उन्हें उल्टा लौटना पड़ा था। जिसके बाद श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट में राजपक्षे परिवार के देश से बाहर निकलने पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की गई थी और अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए दोनों राजपक्षे भाइयों के देश से बाहर निकलने पर 28 जुलाई तक के लिए रोक लगा दी है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल श्रीलंका ने कहा कि, राजपक्षे भाइयों के अलावा, केंद्रीय बैंक के दो पूर्व गवर्नरों सहित तीन अन्य पूर्व अधिकारी भी अदालत की अनुमति के बिना 28 जुलाई तक देश से बाहर यात्रा नहीं कर सकते हैं।

भ्रष्टाचार के लगे हैं आरोप

भ्रष्टाचार के लगे हैं आरोप

आपको बता दें कि, मई महीने भी पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के देश से बाहर निकलने पर रोक लगाई गई थी और उस समय महिंदा के अलावा 17 और मंत्री और अधिकारियों के देश छोड़ने पर रोक लगाई गई थी। श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और उनके बेटे नमल राजपक्षे के अलावा इस लिस्ट में सांसद जॉनसन फर्नांडो, पवित्रा वन्नीराचची, संजीवा इदिरिमाने, कंचना जयरत्ने, रोहिता अबेगुनावर्धना, सीबी रत्नायके, संपत अतुकोराला, रेणुका परेरा, सनत निशांत, वरिष्ठ डीआईजी देशबंधु तेन्नेकून व अन्य शामिल थे। मई में सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने कोर्ट से इन 17 लोगों को देश छोड़ने पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। अटार्नी जनरल ने तर्क दिया था कि, गोटागोगामा और माइनागोगाम स्थल पर हुए हमले की जांच के सिलसिले में इनकी उपस्थिति जरूरी है। उन्होंने शक जाहिर करते हुए कहा था कि इन हमलों के तार इन लोगों से जुड़े हुए हैं। इस हमले में उन्हें षड़यंत्र की बू नजर आ रही है।

नौसेना बेस में ठहरे हैं महिंदा राजपक्षे

नौसेना बेस में ठहरे हैं महिंदा राजपक्षे

आपको बता दें कि, 8 मई को भी श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के खिलाभ भीषण प्रदर्शन शुरू हुआ था, जब उन्होंने पीएम पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों के पीएम आवास घेरने के बाद महिंदा राजपक्षे फरार हो गये थे और वो एक विशेष हेलीकॉप्टर से अपने पूरे परिवार को श्रीलंका के उत्तरी पूर्वी भाग स्थित त्रिंकोमाली में एक नौसेना बेस चले गये थे।। तब से उन्होंने वहीं पर शरण ली रखी है। वहीं, उनके छोटे भाई और देश के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे भी दो दिन पहले देश से भाग गये थे और श्रीलंका में आज ही आधिकारिक तौर पर उनके इस्तीफे की पुष्टि की गई है।

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