अनुरा कुमारा दिसानायके होंगे श्रीलंका के नए राष्ट्रपति, सबको पीछे छोड़ कुछ यूं पहुंचे इस पद तक
Sri Lanka Presidential Election: राष्ट्रपति पद के लिए श्रीलंका में जारी वोटों की गिनती अब समाप्त हो गई है। इसी के साथ मार्क्सवादी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) 42.31 प्रतिशत वोट हासिल कर श्रीलंका के नए राष्ट्रपति बन गए हैं। जी हां...उन्होंने राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत लिया है।
श्रीलंका में ऐसा पहली बार हो रहा है कि राष्ट्रपति की कुर्सी पर कोई वामपंथी नेता विराजमान होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मतदाताओं के बड़े वर्ग ने राष्ट्रपति पद के लिए अनुरा कुमारा दिसानायके को चुना। इसी के साथ दिसानायके ने अपने तीन नामी प्रतिद्वंदियों को इस चुनाव में मात दी है।

बता दें कि दिसानायके ने नमल राजपक्षे, साजिद प्रेमदासा और रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति पद के चुनाव में हरा दिया। जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) पार्टी के नेता दिसानायके इस चुनाव में एनपीपी गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति पद के कैंडिडेट बने थे। दिसानायके को सोमवार को कोलंबो के राष्ट्रपति सचिवालय में शपथ दिलाई जाएगी।
जो सपना देखा था, वह हो रहा है साकार
अनुरा कुमारा दिसानायके ने अपने X हैंडल पर लिखा, 'सदियों से हमने जो सपना देखा था, वह आखिरकार साकार हो रहा है। यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति के काम का नतीजा नहीं है, बल्कि आप जैसे लाखों लोगों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है। आपकी प्रतिबद्धता ने हमें यहां तक पहुंचाया है और इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं।'
इतना ही नहीं, उन्होंने आगे लिखा कि यह जीत हम सबकी है। यहां तक पहुंचने का हमारा सफर कई लोगों के बलिदानों से तय हुआ है, जिन्होंने इस मकसद के लिए अपना पसीना, आंसू और यहां तक कि अपनी जान भी दे दी। उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। हम उनकी उम्मीदों और संघर्षों का राजदंड थामे हुए हैं, यह जानते हुए कि इसमें कितनी जिम्मेदारी है।
उम्मीद और उम्मीद से भरी लाखों आंखें हमें आगे बढ़ाती हैं और हम मिलकर श्रीलंका के इतिहास को फिर से लिखने के लिए तैयार हैं। यह सपना एक नई शुरुआत से ही साकार हो सकता है। सिंहली, तमिल, मुस्लिम और सभी श्रीलंकाई लोगों की एकता इस नई शुरुआत का आधार है। हम जिस नए पुनर्जागरण की तलाश कर रहे हैं, वह इसी साझा ताकत और दृष्टि से उभरेगा।
दिहाड़ी मजदूर के घर हुआ था जन्म
एक साधारण परिवार में जन्में अनुरा दिसानायके के राष्ट्रपति बनने तक की कहानी काफी दिलचस्प है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुरा दिसानायके का जन्म श्रीलंगका की राजधानी कोलंबो से कुछ दूर थंबुटेृगामा में एक दिहाड़ी मजदूर के घर में हुआ था।
शुरुआत में पेराडेनिया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। लेकिन, अपनी राजनीतिक विचारधाराओं के कारण धमकियां मिलने पर वह केलानिया विश्वविद्यालय चले गए। अपने विश्वविद्यालय के वर्षों के दौरान ही दिसानायके ने राजनीति में कदम रखा, 1980 के दशक के अंत में सरकार विरोधी आंदोलन के बीच वे JVP में शामिल हो गए।












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