Sri Lanka: शपथ लेते ही श्रीलंका के राष्ट्रपति ने संसद को किया भंग, जानिए क्यों करवाना चाहते हैं संसदीय चुनाव?
Sri Lanka News: श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने मंगलवार देर रात संसद को भंग कर दिया है और घोषणा की है, कि 14 नवंबर को संसदीय चुनाव होंगे। श्रीलंकन राष्ट्रपति ने चुनावी कैम्पेन के दौरान ही वादा किया था, कि अगर वो जीतते हैं, तो 45 दिनों के अंदर देश में संसदीय चुनाव करवाए जाएंगे।
इस कदम का मकसद राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के बाद संसद पर अपने नियंत्रण को मजबूत करना है, ताकि अगर वो कठोर फैसले लें, तो संसद में उस फैसले का विरोध ना हो और कोई भी बिल आसानी से संसद से पास हो सके।

दिसानायके ने क्यों किया संसद भंग?
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में एक सरकारी नोटिस के हवाले से कहा गया है, कि मंगलवार की आधी रात को संसद भंग कर दी गई है। दिसानायके की पार्टी के पास वर्तमान में 225 सदस्यीय संसद में सिर्फ तीन सीटें हैं, इसलिए समय से पहले चुनाव संभावित रूप से उन्हें संसद में बहुमत हासिल करने में सक्षम बना सकते हैं और वो इस वक्त चुनाव में इसलिए जाना चाहते हैं, क्योंकि फिलहाल देश में उनकी लोकप्रियता बनी हुई है और वो इसका फायदा उठाना चाहते हैं।
इससे पहले मंगलवार को दिसानायके ने हरिनी अमरसूर्या को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है, जिससे वे 24 वर्षों में श्रीलंका की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गईं। 54 साल की विश्वविद्यालय प्रोफेसर हरिनी, अमरसूर्या दिसानायके के मार्क्सवादी झुकाव वाले नेशनल पीपुल्स पावर गठबंधन से जुड़ी हुई हैं।
उनकी नियुक्ति दिसानायके की पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और विपक्षी नेता सजीथ प्रेमदासा पर निर्णायक जीत के बाद हुई है, जो पिछले प्रशासन द्वारा गंभीर आर्थिक संकट से निपटने के तरीके से जनता के असंतोष को दर्शाता है।
अमरसूर्या, जिन्होंने न्याय, स्वास्थ्य, महिला, व्यापार और उद्योग सहित चार अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारियां भी संभालीं हैं, उन्हें विजिता हेराथ का समर्थन प्राप्त होगा, जिन्हें विदेश मामलों, परिवहन और सार्वजनिक सुरक्षा सहित छह विभागों की देखरेख दी गई थी।
दिसानायके ने IMF बेलआउट समझौते के तहत अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के कार्यकाल के समय लगाए गए कड़े टैक्स और अन्य कठोर आर्थिक उपायों को कम करने का संकल्प लिया हुआ है। उन्होंने टैक्स और देश में महंगाई कम करने को अपने चुनावी कैम्पेन में एक बड़ा मुद्दा बनाया था और इसका उन्हें जबरदस्त फायदा हुआ है। लेकिन, टैक्स और महंगाई कम करना आसान नहीं होगा और सवाल ये हैं, कि क्या वो टैक्स रेट में कटौती करके आईएमएफ की शर्तों का उल्लंघन करेंगे?
अगर राष्ट्रपति दिसानायके IMF की शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो 3 अरब डॉलर के बेलऑउट पैकेज पर इसका गहरा असर पड़ सकता है और आईएमएफ बेलऑउट पैकेज को रोक सकता है, जिससे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से चरमरा सकती है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जनता से भारी भरकम वादे करना राष्ट्रपति दिसानायके के लिए भारी पड़ सकता है और अगर वो वादे पूरे करने में नाकाम होते हैं, तो जनता के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है।
पाकिस्तान के मामले में हम देख चुके हैं, कि जब इमरान खान की सरकार के समय IMF की शर्तों का उल्लंघन किया गया था, तो कैसे उसे मिलने वाली किश्तों पर रोक लगा दी गई और फिर पाकिस्तान को अगली किश्त हासिल करने के लिए IMF के सामने दर्जनों बार नाक रगड़ने पड़े थे।
श्रीलंका ने IMF का बेलऑउट पैकेज भारत, जापान और चीन के गारंटी पर हासिल की है और आईएमएफ बेलऑउट पैकेज समझौते से बाहर निकलना द्वीप देश को भारी पड़ सकता है।












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