Mars Mystry Marks : मंगल ग्रह पर ऋतुराज वसंत की दस्तक, रहस्यमयी निशान कर रहे रोमांचित

मंगल ग्रह पर ऋतुराज वसंत (spring on red planet) का आगमन हुआ है। इसी दौरान मार्स के ऊपर मंडराने वाले ऑर्बिटर ने मंगल ग्रह पर रहस्यमय निशानों को कैप्चर किया है। मंगल की सतह पर दिखे अजीब चिह्नों से रोमांच बढ़ा है।

नई

दिल्ली,
29
जून
:
धरती
पर
ऋतुओं
के
राजा
के
रूप
में
लोकप्रिय
ऋतुराज
वसंत
ने
मंगल
ग्रह
पर
(Spring
on
Mars)
भी
दस्तक
दी
है।
मंगल
ग्रह
की
कुछ
ताजा
और
रहस्यमयी
तस्वीरों
में
(red
planet
mystry
marks)
देखा
जा
सकता
है
कि
कुछ
सुराखों
से
गैस
निकल
रही
(vents
releasing
gas)
है।
खगोल
विज्ञान
के
जानकारों
के
मुताबिक
लाल
ग्रह
के
रूप
में
मशहूर
मंगल
यानी
मार्स
पर
वसंत
ऋतु
की
शुरुआत
हुई
है।
तस्वीरों
में
देखा
जा
सकता
है
कि
मंगल
की
सतह
पर
बनी
दरारों
से
वाटर
आइस
निकल
रहा
है।
तस्वीरों
में
वाटर
आइस
के
साथ
बहुभुज
आकृतियां
(Polygons)
भी
देखे
जा
सकते
हैं।
तस्वीरें
नासा
की
MRO
के
माध्यम
से
सामने
आई
हैं।
मंगल
ग्रह
पर
बादलों
के
संकेत
के
संबंध
में
अंतरिक्ष
एजेंसी
नासा
के
आधिकारिक
ट्विटर
हैंडल
@NASA
पर
भी
ट्वीट
किया
गया।
(सभी
तस्वीरें
वीडियो
ग्रैब।
साभार
YouTube
@
NASA
Jet
Propulsion
Laboratory)

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क्या है MRO, कैसे कैप्चर हुई तस्वीरें

मार्स रीकॉनायसेंस ऑर्बिटर (Mars Reconnaissance Orbiter or MRO) की उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग प्रयोग (HiRISE) कैमरे से ली गई नई तस्वीरों में मंगल ग्रह पर रहस्यमय घटना देखी जा सकती है। बता दें कि MRO को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- NASA की ओर से मंगल ग्रह पर मौजूद हालात का जायजा लेने भेजा गया था। टोही ऑर्बिटर एमआरओ 2006 से ही कक्षा से लाल ग्रह के वातावरण और इसके भूभाग का अध्ययन कर रहा है। यह एक प्रमुख डेटा रिले स्टेशन के रूप में भी कार्य करता है। नासा ने 29 जून के अपने ट्वीट में लिखा कि MRO की तस्वीरों में मंगल पर बादलों के संकेत मिले हैं।

मंगल ग्रह पर वसंत ऋतु का आगमन

मंगल ग्रह पर वसंत ऋतु का आगमन

दरअसल, मंगल हमेशा से न केवल जिज्ञासा बल्कि आकर्षण का विषय भी रहा है। भले ही मंगल एक दुर्गम ग्रह है, लेकिन वैज्ञानिक इस ग्रह पर जीवन की संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। मार्स टोही ऑर्बिटर MRO की नई तस्वीरों में मंगल की सतह पर बहुभुज के आकार के निशान (Mars polygon-shaped markings) हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल ग्रह पर वसंत ऋतु का आगमन हुआ है।मंगल ग्रह पर चार ऋतुएं होती हैं। पृथ्वी की तुलना में ये लगभग दोगुने समय तक रहती हैं। लाल ग्रह पर वसंत ऋतु 190 दिनों तक रहता है। बता दें कि पृथ्वी पर वसंत का मौसम लगभग 90 दिनों तक रहता है।

 Mars की सतह पर पॉलिगन शेप, MRO ने लीं तस्वीरें

Mars की सतह पर पॉलिगन शेप, MRO ने लीं तस्वीरें

मंगल ग्रह पर वसंत ऋतु और MRO की पॉलिगन शेप वाली तस्वीरों के संबंध में इंडियाटुडे डॉटकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक तस्वीरों में देखा जा सकता है कि मंगल ग्रह पर उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों में सतह पर सफेद ज़िग-ज़ैग के पैचवर्क के नेटवर्क जैसी छवि है। इनके बीच कहीं-कहीं काले और नीले रंग में धुंध जैसी आकृति देखी जा सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक उच्च अक्षांशों पर मंगल की सतह को तराशने में पानी और शुष्क बर्फ दोनों की प्रमुख भूमिका है।

मंगल की सतह पर बर्फ

मंगल की सतह पर बर्फ

अमेरिका के एरिज़ोना विश्वविद्यालय के अनुसार, बहुभुज (polygon) पानी की बर्फ का परिणाम है जो मिट्टी में जमी हुई है और इसे अलग कर रही है। इन बहुभुजों के किनारे वसंत ऋतु में फट जाते हैं क्योंकि सतह की बर्फ गैस में बदल जाती है। इस प्रोसेस को सबलिमेशन कहा जाता है। बता दें कि एरिजोना यूनिवर्सिटी मंगल ग्रह की कक्षा में अंतरिक्ष यान का प्रबंधन करती है।

दो या दो से अधिक धाराएं

दो या दो से अधिक धाराएं

एमआरओ की मार्स सरफेस वाली ताजा तस्वीरों के संबंध में विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि अक्सर दरारें बंद हो जाती हैं। इंडियाटुडे की रिपोर्ट के मुताबिक दरारों के बंद होने के बाद एक ही स्थान से आने वाले दो या दो से अधिक धाराएं प्रकट होती हैं। इस संबंध में एमआरओ की HiRISE टीम ने एक बयान में कहा, वसंत ऋतु में उन धाराओं में कटाव होता है, जिनसे बहुभुज की सीमाएं बनती हैं। कटाव का कारण शुष्क बर्फ का सबलिमेशन होना है। इस कारण धाराओं में बहुत सारे मोड़ बनते जाते हैं।

मंगल पर वसंत का संकेत हैं पॉलिगन शेप

मंगल पर वसंत का संकेत हैं पॉलिगन शेप

गौरतलब है कि मंगल की सतह पर स्प्रे और ज़िग-ज़ैग जैसी आकृति का उभरना वसंत ऋतु के आगमन के प्रमुख संकेतों में से एक हैं। मंगल ग्रह के उच्च अक्षांशों वाले इलाके में ऐसा देखे जाने पर वसंत ऋतु की दस्तक की पुष्टि होती है। इस समय भूमिगत बर्फ में छिपे हुए जलाशय शुष्क मंगल ग्रह की सतह (dry Martian surface) पर दिखाई देने लगते हैं।

कैसी है मंगल की सतह

कैसी है मंगल की सतह

वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल ग्रह की सतह पर पारभासी (translucent) शुष्क बर्फ की परत है। वसंत ऋतु में इसमें दरारें पैदा होती हैं। इसी समय गैस बाहर निकलता है और मंगल की सतह पर मौजूद महीन कण गैस के साथ एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। इससे बर्फ के चैनल नष्ट हो जाते हैं।

मंगल पर मिस्ट्री मार्क और गैस की भूमिका

मंगल पर मिस्ट्री मार्क और गैस की भूमिका

मंगल ग्रह पर दिखी रहस्यमयी आकृति पर इंडियाटुडे की रिपोर्ट में एरिजोना विश्वविद्यालय के हवाले से कहा गया, गैस के साथ जाने वाले कण मंगल की सतह पर गिरते हैं। इनका रंग गहरा और आकार पंखे की तरह होता है। कभी-कभी काले कण सूखी बर्फ में डूब जाते हैं। डूबने से पहले मूल जगह पर पंखे के आकार में गिरे कणों के कारण चमकीले निशान बन जाते हैं।

क्लोराइड जमा होने का संकेत

क्लोराइड जमा होने का संकेत

विशेषज्ञों के मुताबिक मंगल की सतह पर मौजूद दरारें अक्सर बंद हो जाती हैं। फिर खुद-ब-खुद खुल भी जाती हैं। दो या दो से अधिक पंखे एक ही स्थान से उत्पन्न होते हैं, लेकिन हवा की दिशा बदलते ही अलग-अलग दिशाओं में चले जाते हैं। MRO की मदद से मंगल की सतह पर प्रकाश-टोन वाले बहिर्वाहों को भी कैप्चर किया जिनसे क्लोराइड जमा (Mars chloride deposits) होने का संकेत मिलता है।

MRO की तस्वीरों से मंगल पर बादल के संकेत !

MRO की तस्वीरों से मंगल पर बादल के संकेत !

बता दें कि मंगल ग्रह पर बादल दिखने के संबंध में नासा ने 28 जून को रिपोर्ट लिखी। इसमें मार्स पर क्लाउडस्पॉटिंग (NASA Mars cloudspotting) के लिए MRO ऑर्बिटर के आंकड़ों का जिक्र किया गया। NASA की ओर से अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल से जुड़े विषयों में रूचि रखने वाली जनता से अपील की गई है कि मंगल ग्रह पर बादलों की तलाश करने में मदद करें। (फोटो क्रेडिट- NASA/JPL-Caltech/MSSS)

21 छवियों को जोड़कर बनी तस्वीर

21 छवियों को जोड़कर बनी तस्वीर

MRO पर प्रकाशित रिपोर्ट में NASA ने एक दूसरी तस्वीर के साथ लिखा, नासा के क्यूरियोसिटी मार्स रोवर ने 19 मार्च, 2021 को सूर्यास्त के बाद बादलों की तस्वीर कैद की। इसमें लिखा गया कि फोटो 21 अलग-अलग छवियों से बनी है जो एक साथ जोड़े गए हैं। कलर करेक्शन के बाद दृश्य वैसा ही है जैसा मानव आंख को दिखाई देता है। NASA के मार्स मिशन- क्यूरियोसिटी के तहत चट्टान जैसी आकृति "मोंट मर्को" (Mont Mercou) के ऊपर से बादलों को गुजरते देखा जा सकता है। (फोटो क्रेडिट- NASA/JPL-Caltech/MSSS)

NASA ने मंगल पर कब भेजा MRO

NASA ने मंगल पर कब भेजा MRO

2006 में लाल ग्रह का अध्ययन करने के लिए लॉन्च किए गए मंगल टोही ऑर्बिटर- MRO के छह उपकरणों में से एक HiRISE है। इस कैमरे की हाई-रिज़ॉल्यूशन क्षमता (प्रति पिक्सल 30 सेंटीमीटर तक की छवि) लाल ग्रह के अध्ययन में किसी भी मौजूदा ऑर्बिटर में अभूतपूर्व है। साथ ही रोबोटिक और भविष्य के मानव अन्वेषण के लिए लैंडिंग साइट फाइनल करने में भी HiRISE से मदद मिलेगी। ऐसे में मंगल ग्रह को एक्सप्लोर करने के मद्देनजर HiRISE को एक अनिवार्य साधन भी कहा जाता है।

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