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इजरायल को लेकर सऊदी राजघराने में फूट, ताकतवर MBS के सीक्रेट प्लान के विरोध में है ये प्रिंस

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नई दिल्ली। Saudi Arabia On Israel: इजरायल को लेकर अरब देशों में चल रही नई सुगबुगाहट के बीच प्रमुख अरब देश सऊदी अरब की राजशाही में मतभेद उभर आए हैं। एक तरफ जहां सत्ता में सबसे ताकतवर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को इजरायल के साथ रिश्तों को शुरू करने का समर्थक बताया जा रहा है वहीं दूसरी ओर राजघराने में ही एमबीएस के प्लान का विरोध होने लगा है।

इजरायल से रिश्ते को लेकर सऊदी अरब में सुगबुगाहट

इजरायल से रिश्ते को लेकर सऊदी अरब में सुगबुगाहट

हाल ही में सऊदी अरब के करीबी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन, सूडान, मोरक्को ने इजरायल के साथ दुश्मनी को भुलाते हुए अपने राजनयिक संबंध बहाल किए थे। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि सऊदी अरब भी इजरायल से संबंध बहाल कर सकता है। हालांकि सऊदी अरब ने अभी तक ऐसा नहीं किया लेकिन इस बीच नवम्बर में सऊदी अरब और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व में मुलाकात की खबरें जरूर आईं।

इजरायल के सरकारी मीडिया ने एक खबर दी थी जिसमें ये दावा किया गया था कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक फ्लाइट में बैठकर सऊदी अरब गए थे जहां उनकी और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की गुप्त मुलाकात हुई थी। हालांकि सऊदी अरब ने इस खबर का पूरी तरह से खंडन किया और इजरायल के किसी भी शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात से इनकार किया था।

वहीं जब नेतन्याहू से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि "क्या आप सीरियस हैं ? मैने कभी भी इस तरह के सवालों का जवाब नहीं दिया है तो आप अब सोच रहे हैं कि मैं इसकी शुरुआत (जवाब देने की) करूंगा।" हालांकि नेतन्याहू की कैबिनेट के मंत्री ने मुलाकात की पुष्टि की थी जबकि रक्षा मंत्री बेनी गेट्ज ने इस खबर के लीक होने को चिंताजनक बताया था।

प्रिंस तुर्की अल फैसल ने किया विरोध

प्रिंस तुर्की अल फैसल ने किया विरोध

ऐसा कहा जा रहा है कि सऊदी अरब में सत्ता में किंग सलमान के बाद सबसे ताकतवर शख्स माने जाने वाले मोहम्मद बिन सलमान यानि एमबीएस इजरायल के साथ संबंध बहाल करने को लेकर सहमत है। इस दौरान उनकी योजना के सबसे बड़े विरोधी उनके चचेरे भाई और पूर्व खुफिया प्रमुख प्रिस तुर्की अल-फैसल बन गए हैं।

इस महीने की शुरुआत में ही बहरीन में एक बैठक को संबोधित करते हुए प्रिंस तुर्की अल-फैसल (Prince Turki bin Faisal Al Saud) ने इजरायल को मध्य-पूर्व में पश्चिमी साम्राज्यवाद की आखिरी निशानी बताया था। उन्होंने मंच से कहा था कि ये इजरायल है जिसने पड़ोसी अरब जमीन पर कब्जा किया है न कि दूसरों ने।

प्रिंस तुर्की के इस बयान इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही एमबीएस और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व में मुलाकात की खबरें बाहर आई थीं। प्रिंस फैसल ने कहा कि इजरायल खुद को छोटे और खतरे में घिरा देश बताता है जो चारों तरफ से ऐसे खूनी हत्यारों से घिरा हुआ है जो उसे मिटाना चाहते हैं। फिर भी वे कहते हैं कि वे सऊदी अरब से दोस्ती करना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने फिलस्तीनी लोगों की हत्या करने और उनके इलाके और घरों पर कब्जा करने का आरोप लगाया।

प्रिंस फैसल का बयान इजरायल के लिए धक्का

प्रिंस फैसल का बयान इजरायल के लिए धक्का

उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों को सुरक्षा के नाम पर शिविरों में कैद करके रखा जा रहा है। यहां युवा और बुजर्ग, आदमी, औरतें और बच्चे सड़ रहे हैं। वे जिसे चाहे उसे मार रहे हैं। सऊदी प्रिंस जब ये कह रहे थे उस दौरान बहरीन और इजरायल के विदेश मंत्री बैठे हुए थे। सऊदी के इस रुख से इजरायल खुद हैरान था।

बाद में प्रिंस के संबोधन के बाद इजरायल के विदेशमंत्री गाबी अशकेनाजी ने कहा कि सऊदी प्रतिनिधि की टिप्पणी पर मैं दुखी हूं। मुझे नहीं लगता कि वे मध्य पूर्व में हो रहे बदलावों को समझ रहे हैं।

सिर्फ यही नहीं प्रिंस फैसल ने कहा कि फिलिस्तीन समस्या का समाधान अरब पीस इनिशिएटिव लागू होने में ही है। अरब पीस इनीशिएटिव एक प्रस्ताव है जिसे 2002 में अरब देशों ने जारी किया था। इसके मुताबिक 1967 में इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्र को फिलिस्तीन देश के रूप में मान्यता देने पर इजरायल के साथ संबंध बहाल किए जा सकते हैं।

एक और प्रिंस का एमबीएस को मिला समर्थन

एक और प्रिंस का एमबीएस को मिला समर्थन

हाल ही में अपने अरब सहयोगियों के साथ इजरायल के रिश्ते सामान्य बनाने को लेकर ट्रंप प्रशासन ने काफी महत्वपूर्ण पहल की थी। इसका नतीजा था कि यूएई, बहरीन और इजरायल के बीच वाशिंगटन में ऐतिहासिक अब्राहम समझौता हो सका। इसके बाद अमेरिका को उम्मीद है कि और भी अरब देश इजरायल से रिश्ते सामान्य करेंगे।

हालांकि अब सऊदी अरब और फिलिस्तीन के बीच रिश्तों में पहले जैसी गर्माहट नहीं रह गई है। हाल ही में एक महत्वपूर्ण सऊदी प्रिंस बंदार बिन सुल्तान (Bandar bin Sultan) ने सऊदी के सरकारी टीवी चैनल अल अरबिया पर कहा था कि हम हमेशा फिलिस्तीनी लोगों के साथ रहे हैं। हमने जब भी जरूरत पड़ी उन्हें मदद की है और उन्हें अपनी सलाह दी है। लेकिन वे हमारी मदद लेते हैं पर सलाह नहीं लेते। आगे उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि सऊदी अरब को अपने राष्ट्रीय हित को देखते हुए अपनी राह चुननी चाहिए।

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English summary
split in saudi princes over peace deal with israel
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