82 सेकेंड में 20 साल पहले Shuttle Mission का फ्यूचर तय ! क्यों जिंदा नहीं लौटीं कल्पना चावला?

कोलंबिया स्पेस शटल हादसा अंतिरक्ष मिशन के इतिहास में दर्ज ऐसा हादसा है, जिसके बाद अमेरिका में स्पेस मिशन अगले दो साल के लिए स्थगित कर दिया गया था।

Space Shuttle Columbia disaster

Space Shuttle Columbia Disaster: हरियाणा करनाल में जन्मी शटल मिशन एक्सपर्ट कल्पना चावला (Kalpana Chawla) भारतीय मूल की महिला, जिन्होंने एक नहीं दो बार अंतरिक्ष की सैर की थी। लेकिन दूसरी बार वो धरती पर नहीं लौट पाईं। 1 फरवरी 2003 को एक दुर्घटना (Space Shuttle Columbia disaster) में स्पेस यान कोलंबिया स्पेस शटल में मौजूद सभी सात सदस्यों की मौत हो गई। पंजाब के करनाल से अपनी शिक्षा की शुरुआत करने वाली कल्पना चावला का इतिहास सभी प्रेरित करता है। वे भारतीय मूल की ऐसी महिला की जिन्होंने 252 बार पृथ्वी के कक्षाओं में चक्कर लगाए थे। लेकिन उनकी दूसरी उड़ान का सपना पूरा करना कैसे जान की आफत बन गया?

कल्पना चावला का अंतरिक्ष सफर

कल्पना चावला का अंतरिक्ष सफर

कल्पना चावला का अंतरिक्ष मिशन 19 नवंबर 1997 शुरू हुआ था। कल्पना समेत जिसमें कुल छह-अंतरिक्ष यात्री चालक दल हिस्सा था। स्पेस शटल कोलंबिया STS-87 लांच किया गया था। उस वक्त चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं। पृथ्वी के चारों ओर 252 बार यात्रा की थी। वे अपने पहले मिशन के दौरान अंतरिक्ष में 376 घंटे यानी 15 दिन और 16 घंटे तक रहीं। स्पेस शटल कोलंबिया की इस उड़ान में कल्पना चावला एक मिशन विशेषज्ञ और प्राथमिक रोबोटिक आर्म ऑपरेटर के रूप में थी।

स्पेस शटल मिशन हादसे में मौत

स्पेस शटल मिशन हादसे में मौत

कल्पना चावला एक भारतीय मूल की एयरोस्पेस इंजीनियर थीं। वर्ष 2003 में स्पेस शटल कोलंबिया की अंतरिक्ष यात्रा उनकी अंतिम अंतिम उड़ान थी। जिसमें शटल मिशन पूरी तरह तबाह हो गया। ये उड़ान थी STS-107। जिसें चावला सात चालक दल के सदस्यों में से एक थीं। इस मिशन में कल्पना चावला की मौत हो गई। अमेरिकी में उन्हें मरणोपरांत कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा भी कल्पना चावला को कई विश्वविद्यालयों ने भी मरणोपरांत सम्मानित किया।

क्यों हुआ बड़ा हादसा?

क्यों हुआ बड़ा हादसा?

STS-107 की उड़ान के भयंकर हादसे के बाद शटल मिशन दो साल के लिए रोक दिया गया। हादसे की जांच के लिए गठित बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि अंतरिक्ष यान का भविष्य 16 जनवरी को टेक-ऑफ के दौरान ही तय हो गया था। जब शटल के बाहरी टैंक से फोम का एक बड़ा टुकड़ा गिरा था।

82 सेकेंड बाद विमान में होल

82 सेकेंड बाद विमान में होल

शटल विमान के बाहरी टैंक से फोम का एक बड़ा टुकड़ा निकल गया था। ये घटना उड़ान के 82 सेकेंड बाद ही देखी गई। इससे अंतरिक्ष यान का पंख टूट गया था। जिसके बाद वायुमंडलीय गैसें शटल के अंदर प्रवेश कर गईं। जिससे मिशन का सेंसर प्रभावित हुए। स्थि ये हुई की विमान अनियंत्रित हो गया। जिसके बाद मिशन की तबाही शुरू हो गई थी। हादसे के दौरान आसमान में एक तेज रोशनी देखी थी। हादसे में सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई।

डीऑर्बिट, रीएंट्री के दौरान हादसा

डीऑर्बिट, रीएंट्री के दौरान हादसा


शटल के उड़ान भरने के बाद आखिरी बार डीऑर्बिट और रीएंट्री के लिए आखिरी बार नासा (NASA) की ओर से ग्रीन सिग्नल दिया गया था। नासा के एंट्री फ्लाइट डायरेक्टर लेरॉय कैन ने ये सिग्नल दिए थे। स्पेस सेफ्टी मैगजीन की एक रिपोर्ट के अनुसर, हर सेकंड सेंसर में खराबी के सिग्नल दिखने लगे। कुछ ही देर में शटल का संपर्क भी टूट गया। राडर से भी शटल का पता नहीं लगाया जा सका। टेक्सास में लोगों ने आसमान में आग का गोला जैसी आकृति देखी। आसमान में ही शटल पूरी तरह तबाह हो चुका था।

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