South Korea Crisis: पूर्व रक्षा मंत्री ने पुलिस कस्टडी में जान देने की कोशिश की, इमरजेंसी लगाने में था अहम रोल
South Korea Crisis: दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति यून सुक येओल (Yoon Suk Yeol) की सरकार पर संकट गहराता जा रहा है। मार्शल लॉ के विवादित आदेश के चलते देश की राजनीति में भूचाल आ गया है।
इसी बीच, हिरासत में लिए गए पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून (Kim Yong-hyun) ने जान देने की कोशिश की, जिसे समय रहते रोक दिया गया। इस घटनाक्रम ने देश में सत्ता संघर्ष, संविधान की मर्यादा, और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
बीती, 3 दिसंबर को राष्ट्रपति यून सुक येओल ने मार्शल लॉ की घोषणा की। इसके तहत भारी हथियारों से लैस सैनिकों को नेशनल असेंबली (संसद) को घेरने और सांसदों को अंदर जाने से रोकने का आदेश दिया गया। यून ने दावा किया कि यह आदेश "राज्य-विरोधी ताकतों" से निपटने और "देश का पुनर्निर्माण" करने के लिए दिया गया था।
हालांकि, विपक्षी दल और विशेषज्ञ इसे असंवैधानिक मानते हैं। उनके अनुसार, मार्शल लॉ केवल "युद्ध या राष्ट्रीय आपातकाल" जैसी स्थितियों में लगाया जा सकता है, और उस समय देश ऐसी किसी स्थिति का सामना नहीं कर रहा था।
पूर्व रक्षा मंत्री की गिरफ्तारी और आत्महत्या की कोशिश
किम योंग ह्यून, जो मार्शल लॉ लागू करने में प्रमुख भूमिका निभाने के आरोपी हैं, को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। हिरासत में, उन्होंने जान देने की कोशिश की, लेकिन केंद्र के अधिकारियों ने उन्हें समय पर रोक लिया।
नेशनल असेंबली का घेराव और विवाद
मार्शल लॉ लागू करने के दौरान सैनिकों ने नेशनल असेंबली को घेर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैनिकों को सांसदों को संसद के मुख्य कक्ष में प्रवेश करने से रोकने के लिए तैनात किया गया था, ताकि वे मार्शल लॉ के खिलाफ मतदान न कर सकें।
बाद में, पर्याप्त सांसद अंदर घुसने में कामयाब हुए और उन्होंने सर्वसम्मति से मार्शल लॉ के आदेश को खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति यून की सत्तारूढ़ पार्टी पर भारी दबाव है।
विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव
यून की मार्शल लॉ डिक्री और उनके आदेशों के खिलाफ विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया है। हालांकि, पहले प्रयास में सत्तारूढ़ पार्टी के बहिष्कार के चलते यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। विपक्ष अब नए सिरे से प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है।
असंवैधानिक आदेश और लोकतंत्र पर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि यून का आदेश असंवैधानिक है क्योंकि दक्षिण कोरियाई संविधान किसी भी स्थिति में राष्ट्रपति को संसद को निलंबित करने के लिए सेना का उपयोग करने की अनुमति नहीं देता। यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ और विद्रोह के समान माना जा रहा है।
'दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून गैंगस्टर-देशद्रोही', उत्तर कोरिया का वार
उत्तर कोरिया ने इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उसने यून को "देशद्रोही" और उनकी सेना को "गैंगस्टर" करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया विदेशी सरकार विरोधी प्रदर्शनों की खबरों को अपने नागरिकों तक पहुंचने से रोकने के प्रति संवेदनशील है, ताकि वे ऐसे आंदोलनों से प्रेरित न हों।
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