दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालय में पाकिस्तानी छात्र बना रहे मस्जिद, शुरू हुआ बवाल, स्थानीय लोगों ने बताया आतंकी
दक्षिण कोरिया में करीब 2 लाख मुसलमान रहते हैं, जिनमें से ज्यादातर दूसरे देशों के हैं। ये विवाद तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तान के एक छात्र ने मस्जिद पुननिर्माण के लिए चंदा जुटाना शुरू किया।

South Korea Daegu university mosque: दक्षिण कोरिया के एक टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में मस्जिद बनाने को लेकर विवाद तूल पकड़ता जा रहा है और दक्षिण कोरिया के स्थानीय निवासी मस्जिद बनाने के खिलाफ खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी छात्रों ने मस्जिद को बनाना शुरू किया है, लेकिन दक्षिण कोरिया के स्थानीय लोगों का कहना है, कि 'दक्षिण कोरिया मल्टी कल्चर को अपनाता है, ये सही बात है, लेकिन हम मस्जिद नहीं बनाने देंगे।'
अलजजीरा के मुताबिक, पाकिस्तान के रहने वाले मुआज़ रज़ाक, जो साल 2019 में पहली बार दक्षिण कोरिया में अपनी कंप्यूटर साइंस मास्टर की पढ़ाई करने के लिए पाकिस्तान छोड़ा था, वो इस मस्जिद विवाद के केन्द्र में हैं। अलजजीरा ने लिखा है, कि पाकिस्तानी छात्र ने कभी नहीं सोचा था, कि दक्षिण कोरिया में धार्मिक सहिष्णुता की परीक्षा होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के टॉप विश्वविद्यालयों में शामिल क्युंगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी में पाकिस्तानी छात्र मुआज़ रज़ाक ने एडमिशन लिया था और उन्होंने बताया, कि यूनिवर्सिटी के पास में ही एक पुरानी मस्जिद थी, जिसे फिर से बनाने का काम शुरू किया गया है।
यूनिवर्सिटी कैंपस में मस्जिद बनाने का विवाद
पाकिस्तानी छात्र का कहना है, कि वो पाकिस्तान के पारंपरिक लिबास में विश्वविद्यालय जाते थे और उनकी दाढ़ी बढ़ी थी, जो दक्षिण कोरिया के लोगों में उत्सुकता बढ़ाती थी, लेकिन कभी उनके साथ दुश्मनी या भेदभाव नहीं किया गया।
लेकिन, ये विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब विश्वविद्यालय के लगभग 150 मुसलमानों ने 2014 में स्कूल के पश्चिमी गेट के पास स्थित मस्जिद का नवीनीकरण करने का फैसला किया। पाकिस्तानी छात्र ने कहा, कि मस्जिद को फिर से बनाने की योजना के बाद निर्माण स्थल को उग्र इस्लामोफोबिया का शिकार होना पड़ रहा है।
ये मस्जिद दक्षिण कोरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर डेगू के बुक जिले में स्थित है और राजधानी सियोल से लगभग 240 किमी (149 मील) दूर स्थिति है। आधिकारिक तौर पर ये मस्जिद, दार-उल-इमान क्यूंगपुक और इस्लामिक सेंटर के रूप में जाना जाता है, जहां से इस्लाम का प्रचार प्रसार किया जाता है।
डेगू जिले में और आसपास लगभग एक दर्जन मस्जिदें हैं, जो मुख्य रूप से उपनगरों में हैं, जहां मुसलमान श्रमिकों की आबादी है।

मस्जिद पर विवाद कैसे शुरू हुआ?
इस मस्जिद को लेकर विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले 150 मुस्लिम छात्रों ने पुराने मस्जिद को गिराकर नया मस्जिद बनाने के लिए चंदा जमा किया और फिर दो मंजिला मस्जिद बनाने का काम शुरू किया।
छात्रों ने मस्जिद के बगल में एक घर भी खरीदा, जहां मुस्लिम छात्र अस्थाई तौर पर नमाज पढ़ते हैं। ये विवाद 2021 में पहली बार शुरू हुआ, जब मस्जिद का एक बीम बनाए जाने के बाद स्थानीय निवासियों ने उसका विरोध शुरू कर दिया।
स्थानीय निवासियों के भारी विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक आदेश जारी किया, जिसके बाद मस्जिद बनाने के काम पर रोक लगा दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है, कि मस्जिद के अंदर छात्र अजीब खाना पकाते हैं, जिससे काफी गंध फैलता है, उनके अजान से शोर मचता है और यातायात प्रभावित होती है। वहीं, पाकिस्तानी छात्र ने कहा, कि पहले इस तरह की दिक्कतें नहीं थी, लेकिन मस्जिद निर्माण के बाद से शिकायतें आने लगीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने गहरी आपत्ति जताई और फिर उस क्षेत्र में पैम्फलेट बांटे जाने लगे, जिसमें दावा किया गया, कि यह इलाका एक "झुग्गी" बन जाएगा और संपत्ति की कीमत गिर जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने इन छात्रों को, जो अब पढ़ाई छोड़कर मस्जिद निर्माण के लिए एक्टिविस्ट बन चुके हैं, उन्हें आतंकवादी कहा जाने लगा।
दक्षिण कोरिया के सड़कों पर इन छात्रों के खिलाफ आपत्तिजनक बैनर लगाए गये, रैलियां आयोजित की जाने लगीं और अस्थाई नमाज स्थल के बाहर तेज संगीत बजाया गया।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मिला साथ
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद दक्षिण कोरिया के कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मदद से मस्जिद का निर्माण फिर से शुरू किया गया और दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में फैसला सुनाया, कि निर्माण रोकने का प्रशासनिक आदेश अवैध था। लेकिन फिर भी, नफरत बढ़ती रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिर से मस्जिद का निर्माण शुरू हो गया है, लेकिन अब मस्जिद के सामने सूअर का मांस फेंका जाता है। एक बार फिर से पोर्क बारबेक्यू पार्टियां निर्माण स्थल के सामने आयोजित की गई हैं और सुअर के सिर बाहर छोड़ दिए गए हैं।
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स्थानीय निवासी किम जोंग-ए, जो मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं, उनका कहना है, कि "यह हमारे जीवन की रक्षा के बारे में है।" उन्होंने कहा, कि मुस्लिम छात्र "कहीं और जाने के लिए स्वतंत्र हैं, बस वहां नहीं।" उन्होंने संकरी गली में मस्जिद के स्थान का जिक्र करते हुए कहा।
पाकिस्तानी छात्र रजाक, जो अब विश्वविद्यालय के मुस्लिम छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वो अपने समुदाय पर हमलों के लिए कुछ धार्मिक समूहों को दोषी मानते हैं और कहते हैं कि वे स्थानीय लोगों को उनके खिलाफ होने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
आपको बता दें, कि आधिकारिक तौर पर दक्षिण कोरिया में करीब 2 लाख मुसलमान रहते हैं, जिनमें से अधिकतर दूसरे देशों से हैं। वहीं, मस्जिद बनाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है और कुछ और मुस्लिम देशों से मस्जिद के लिए समर्थन मिलने के बाद अब ये विवाद कूटनीतिक भी होता जा रहा है।












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