साउथ चायना सी में जंग के हालात, चीन की चेतावनी के बीच अमेरिका ने दो जंगी जहाजों से दागे गोले
अमेरिका के दो जंगी जहाजों ने चीन की चेतावनी के बीच साउथ चायना सी में युद्धाभ्यास करना शुरू कर दिया है। जिससे बौखलाए चीन ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है।
US Navy Aircraft in South China Sea: वाशिंगटन: समंदर की लहरों के बीच चीन और अमेरिका के बीच बारूदी घमासान मच सकता है। साउथ चायना सी में अमेरिका और चीन के बीच जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं। अमेरिका के दो जंगी जहाजों ने चीन की चेतावनी के बीच साउथ चायना सी में युद्धाभ्यास करना शुरू कर दिया है। जिससे बौखलाए चीन ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है। मंगलवार को अमेरिकी नौसेना के दो जंगी जहाजों ने एयरस्ट्राइक के जरिए दक्षिण चीन सागर के विवादित पानी में युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। अभी तक अमेरिका का एक ही एयरक्राफ्ट कैरियर साउथ चायना सी में था लेकिन अब एक और एयरक्राफ्ट साउथ चायना सी में पहुंच चुका है। अब दोनों जहाज चीनी धमकियों को अनसुना कर समंदर में बम-गोले दाग रहे हैं।

मिसाइल और परमाणु हथियारों से लैश एयरक्राफ्ट
अमेरिका के दो सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS थियोडोर रूजवेल्ट और USS निमित्ज साउथ याचना सी में चीन को सीधी चुनौती दे रहे हैं। अमेरिकी नौ-सेना ने कहा है कि दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर आधुनिक मिसाइल क्रूजर्स, डिस्ट्रॉयर और परमाणु हथियारों से लैश हैं। अमेरिकी नौ-सेना ने कहा है कि हम साउथ चायना सी में भारी ट्रैफिक के बीच दुश्मनों के ठिकानों को ध्वस्त करने का युद्धाभ्सास कर रहे हैं। नौ-सेना के मुताबिक वो ये भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि दुश्मन की नौ-सेना कितनी ताकतवर हो सकती है। अमेरिकी नौ-सेना के मुताबिक इन दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर के पास 120 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं।
साउथ चायना सी पर चीन करता है दावा
आपको बता दें कि समूचे साउथ चायना सी पर चीन अपना मालिकाना हक का दावा करता है। चीन का दावा है कि 1.3 मिलियन स्क्वायर मील में फैले साउथ चायना सी पर उसका हक है। चीन ने 2014 के बाद साउथ चायना सी में बड़े हिस्से पर निर्णाम करते हुए एक टापू बनाया जहां चीन ने आधुनिक मिसाइल समेत लड़ाई के साजो-सामान तैनात कर दिए हैं। चीन ने साउथ चायना सी में रनवे तक तैयार कर रखा है। जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुन्द्री कानून के मुताबिक किसी देश की सरहद से सिर्फ 12 नॉट माइल तक ही उसका हक हो सकता है। लेकिन चीन को कानूनों से कहां फर्क पड़ता है। उधर अमेरिका का कहना है कि वो समुद्री कानून के तहत साउथ चायना सी में युद्धाभ्यास कर रहा है।

अमेरिकी युद्धाभ्यास से बौखलाया चीन
पिछले 6 सालों में ये पहली बार में जब अमेरिकी नौ-सेना के दो सबसे बड़े एयरक्राफ्ट एक साथ साउथ चायना सी में चीनी हिस्से में पहुंचकर युद्धाभ्यास कर रहे हों। अमेरिकी युद्धाभ्यास से चीन आग-बबूला हो चुका है और उसने अमेरिकी एयरक्राफ्ट के वापस नहीं लौटने पर उड़ा देने की धमकी देनी शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिकी नौ-सेना के युद्धाभ्सास से अमेरिका और चीन के बीच के संबंध और खराब होंगे। अमेरिका साउथ चायना सी में हथियारों और मिसाइलों की सप्लाई करने में जुटा है, जिससे विश्व की शांती और सुरक्षा खतरे में पड़ने की संभावना है।
अभी दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन को लेकर बयान दिया है। जो बाइडेन ने CBS को दिए इंटरव्यू में कहा है कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद अभी तक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात नहीं की है। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग पर बात करते हुए जो बाइडेन ने कहा है कि जिनपिंग काफी सख्त हैं। बाइडेन ने कहा कि वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना नहीं कर रहे हैं लेकिन वो बेहद सख्त हैं। जो बाइडेन ने कहा कि राष्ट्रपति जिनपिंग लोकतांत्रिक नहीं हैं। वहीं, बाइडेन ने अमेरिका के लिए चीन को सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी भी बताया है।

जो बाइडेन ने अपने इंटरव्यू में ये भी कहा था कि चीन के मामले में वो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह आगे नहीं बढ़ेंगे। बल्कि वो चीन के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। लेकिन, बयान के दो दिन बात ही साउथ चायना सी में अमेरिकी नौ-सेना का युद्धाभ्यास करना कहीं दर्शाता है कि जो बाइडेन चीन को लेकर किस तरह रणनीति बनाएं, उसपर वो कन्फ्यूज हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने साउथ चायना सी में तीन वारशिप तैयार किए थे। जबकि जो बाइडेन के शासनकाल में अभी तक सिर्फ एक ही वारशिप को साउथ चायना सी में भेजा गया है। चीन और अमेरिका के वारशिप्स आमने-सामने हैं। माना जा रहा है कि अगर चीन ने ताइवान को लेकर नरमी नहीं दिखाई तो साउथ चायना सी जंग का मैदान बन सकता है।
आजादी के लिए युद्धाभ्यास
अमेरिका लगातार कहता है कि साउथ चाइना सी में अमेरिकन नेवी के जाने का मतलब सिर्फ एक है, समुद्री आजादी कानून को प्रमोट करना, जिसे चीन खत्म कर देना चाहता है। वहीं, मेरिकी नेवी के सातवें फ्लीट के प्रवक्ता जो केइली ने बयान जारी कर कहा है, 'मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए जहाज ताइवान स्ट्रेट से होकर निकला है। अंतरराष्ट्रीय कानून जहां भी इजाजत देता है अमेरिकी सेना कहीं भी उड़ान भरेगी, जलयात्रा करेगी और कार्य करती रहेगी।
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