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कोरोना वायरस: 6 देशों में फैला खतरनाक C.1.2 स्ट्रे्न, वायरस में एंटीबॉडीज को चकमा देने की क्षमता

नई दिल्ली, अगस्त 31: दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्होंने एक नए कोरोना वायरस वेरिएंट की पहचान की है। जो म्यूटेशन के बाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए वेरिएंट में कई सारे म्यूटेशन देखे गए हैं। वैज्ञानिकों ने एक शोध पत्र में कहा कि तथाकथित C.1.2.पहली बार मई में दक्षिण अफ्रीकी प्रांतों मपुमलंगा और गौटेंग में पहचान की गई थी। मपुमालंगा वह प्रांत है, जहां जोहानिसबर्ग और राजधानी शहर प्रिटोरिया स्थित है।

South African scientists identified a new coronavirus variant C.1.2 Strain

13 अगस्त तक, यह दक्षिण अफ्रीका के नौ प्रांतों में से छह के साथ-साथ कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मॉरीशस, पुर्तगाल, न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड में पाया गया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि वायरस के म्यूटेशन के चलते संक्रमण के मामलों में इजाफा देखा गया है, जबकि वायरस से एंटीबॉडीज को चकमा देने की क्षमता में भी इजाफा हुआ है। वायरस में म्यूटेशन के चलते इन आशंकाओं को रेखांकित किया जाना अहम है।

वायरस में बदलाव की वजह से कोरोना संक्रमण की कई लहरें दुनिया भर में देखने को मिली हैं। पहले भारत में पाए जाने वाले डेल्टा वेरिएंट के चलते दुनिया भर में संक्रमण दर को बढ़ा रही है। इस म्यूटेशन को सबसे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंताजनक बताया था। एक बार कोविड स्ट्रेन की पहचान हो जाने के बाद उसके ज्यादा संक्रामक या गंभीर होने को देखते हुए वेरिएंट ऑफ कंसर्न के लिए वर्गीकृत किया जाता है।

कोविड का C.1.2. वेरिएंट C.1 से विकसित हुआ, जो वायरस का एक वंश है। जो 2020 के मध्य में दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस की पहली लहर के लिए जिम्मेदार है। चीन के वुहान में पाए गए मूल वायरस के मुकाबले इसमें 44 से 59 म्यूटेशन देखे गए हैं हैं। इस रिसर्च पेपर को दक्षिण अफ्रीका के क्वाजुलू-नटाल रिसर्च इनोवेशन और सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज ने प्रकाशित किया है।

अफ्रीकी वैज्ञानिकों ने कहा है कि मई में देश में कोरोना स्ट्रेन की कुल जीनोम सीक्वेंसिंग के 0.2 फीसदी मामले C.1.2. वेरिएंट के थे, जो जून में बढ़कर 1.6 फीसदी और जुलाई में 2 फीसदी हो गए। वैज्ञानिकों ने कहा कि हम वर्तमान में एंटीबॉडी न्यूट्रलाइजेशन पर इस प्रकार के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। क्रिस्प के निदेशक ट्यूलियो डी ओलिवेरा ने सोमवार को एक इम्यूनोलॉजी सम्मेलन में कहा परिणाम एक सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, नया स्ट्रेन अभी सिर्फ 100 जीनोम में पाया गया है, जोकि एक छोटी संख्या है, लेकिन हम इस स्ट्रेन को लेकर बेहद सतर्क हैं, क्योंकि इस स्ट्रेन में इम्यून सिस्टम को चकमा देने की पूरी गुंजाइश है।

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