गिरफ्तारी से डर गए पुतिन, दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने से किया इनकार
अगले महीने दक्षिण अफ्रीका में 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस कार्यक्रम में शरीक नहीं होंगे। द. अफ्रीका ने इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक जोहान्सबर्ग में आयोजित शिखर सम्मेलन में पुतिन के बदले रूसी संघ का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव करेंगे।
COVID-19 महामारी और उसके बाद के वैश्विक प्रतिबंधों के उभरने के बाद व्यक्तिगत रूप से आयोजित होने वाला पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होगा। लेकिन अब तय हो चुका है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स देशों के ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा नहीं होंगे।

द. अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने ब्रिक्स देशों - ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक 15वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए दक्षिण अफ्रीका की तैयारी की घोषणा की। शिखर सम्मेलन में ब्राजील, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेता भाग लेंगे।
दरअसल कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि 22-24 अगस्त को ब्रिक्स देशों की बैठक के दौरान पुतिन की गिरफ्तारी हो सकती है। दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े विपक्षी दल 'द डेमोक्रेटिक अलायंस' सरकार पर पुतिन को जोहानिसबर्ग दौरे के दौरान गिरफ्तार करने का दबाव बना रही थी।
हालांकि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर व्लादिमीर पुतिन को गिरफ्तार करने का कोई भी प्रयास रूस के खिलाफ युद्ध की घोषणा होगी। राष्ट्रपति ने प्रिटोरिया की अदालत में एक एफिडेविट के जरिए विपक्ष की इस मांग का जवाब दिया है।
शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई होगी। 32 पेज की इस एफिडेविट में राष्ट्रपति ने कहा कि पुतिन को गिरफ्तार करना रूस के खिलाफ युद्ध का ऐलान करने जैसा होगा। रामाफोसा ने इसे देश के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बताया था। दरअसल कुछ महीने पहले यूक्रेन में युद्ध छेड़ने को लेकर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
आईसीसी का कहना है कि पुतिन पर यूक्रेन में युद्ध अपराधों के आरोप लगाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। अगर पुतिन देश से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इसलिए कई मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि जोहानिसबर्ग दौरे पर पुतिन को गिरफ्तार किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका में विपक्ष की तीव्र मांग ने इसमें आग में घी डालने का काम किया।












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