ब्रह्मांड में रेस्टोरेंट जैसा शोरगुल! साइंटिस्ट्स ने किया चौंकाने वाला दावा, जानिए हकीकत

स्पेस साइंटिस्ट्स ने भारत और आस्ट्रेलिया में टेलीस्कोप के जरिए सैंकड़ो रिसर्च की हैं, जो स्पेस साइंस के क्षेत्र में मील का पत्थर हैं। अब ब्रह्मांड के एक और नए रहस्य का पता चला है।

Background Hum like restaurant in Space: ब्रह्मांड में सुनी जाने वाले शोरगुल का पता लगाने के लिए दुनिया के कई देशों के साइंटिस्ट्स अध्ययन कर रहे हैं। उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन, भारत और ऑस्ट्रेलिया में रेडियो दूरबीन के जरिए कई साइंटिस्ट्स ने ब्रह्मांड के एक रहस्य का पर्दाफाश किया है। इसे स्पेस का रहस्य का पता लगाने के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। साइंटिस्ट्स ने कहा स्पेस में अक्सर किसी रेस्टोरेंट में होने वाले शोरगुल जैसा आवाज सुनाई देती है।

गुरुवार (29 जून) को खगोलविदों ने अपनी एक घोषणा में कहा कि गुरुत्वाकर्षण तरंगों जैसी एक अन्य ध्विननि तरंग का पतला चला है। जो ब्रह्मांड में गड़गड़ाहट जैसी सुनी जा सकती है। इसकी तुलना अल्वर्ट आइंसटीन की एक घोषणा से की गई। जिमसें उन्होंने कहा था कि गुरुत्वाकर्षण तरंगों जैसी एक अन्य ध्विनि ब्रह्मांड में मौजूद है।

Sound like noise of a restaurant in universe

हालांकि वर्ष 2015 तक अल्वर्ट आइंसटीन का दावे पर कोई ठोस रिसर्च सामने नहीं आई। लेकिन जब अमेरिका और इटली में दो वेधशालाओं के जरिए ब्लैक होल से टकराने के कारण उत्पन्न ग्रेविटेशनल वेब्स का पता लगाया तो यकीन होने लगा। इसके बाद पिछले लगभग एक दशन के दौरान सांटिस्ट्स कम आवृत्ति वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों पर रिसर्च कर रहे हैं। ये वही तरंगे हैं, जो बैकग्राउंड शोर जैसी हैं और ये अंतरिक्ष में भ्रमण भी करती हैं।

इन ध्वनि तरंगों को लेकर ऑस्ट्रेलिया के पार्क्स पल्सर टाइमिंग एरे के सदस्य डैनियल रियरडन ने एएफपी को बताया कि तरंगें ब्रह्मांड में हर जगह आकाशगंगाओं के मूल में एक दूसरे के चारों ओर चक्कर लगाने वाले सभी सुपरमैसिव ब्लैक होल बाइनरी सिस्टम का योग होंगी। कीथ ने कहा कि "इन सभी ब्लैक होल के आसपास कुछ आवाजें (Background Hum) एक रेंस्तरां में शोरगुल जैसी सुनाई देती हैं।" ये साउंड वैसे ही हैं, जैसे किसी रेस्टोरोंट में कई लोगों के एकसाथ बात करने की अवाजें सुनाई देती हैं।

ऑस्ट्रेलिया के पार्क्स पल्सर टाइमिंग एरे के सदस्य कीथ ने कहा कि पृथ्वी और बिग बैंग के बीच की आकाशगंगाओं में संभवतः ऐसी ही आवाजें हैं। इन वेब्स के जरिए साइंटिस्ट्स का दावा है कि वे कैसे आकाशगंगाएं बनती और विकसित होती हैं, इसको लेकर भी जानकारी हासिल कर लेंगे।

इस दिशा में इंटरनेशनल पल्सर टाइमिंग ऐरे कंसोर्टियम के साथ कई साइंटिस्ट महाद्वीपों पर गुरुत्वाकर्षण तरंग डिटेक्टर को लेकर काम कर रहे हैं। साइंटिस्ट्स का दावा है कि उन्हें ब्रह्मांड में 'बैकग्राउंड हम' यानी अंतरिक्ष के शोरगुल के पुख्त सबूत मिले हैं। यूरोपीय पल्सर टाइमिंग ऐरे के माइकल कीथ ने एएफपी को बताया, "अब हम जानते हैं कि ब्रह्मांड गुरुत्वाकर्षण तरंगों से भरा हुआ है।" उन्होंने आगे कहा कि इसका पता लगाने के लिए मृत तारों की जांच की जाएगी।

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