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नेपाल की हिंसा के पीछे की 5 असली वजहें, Social मीडिया सिर्फ ट्रिगर था

Nepal Gen-Z protests 5 Reason: नेपाल इस समय गंभीर सियासी संकट का सामना कर रहा है। Gen-Z युवाओं के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अब अंतरिम पीएम चुनने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन संवैधानिक संकट के चलते अभी तक किसी नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। इस बीच, नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की एक बार फिर अंतरिम प्रधानमंत्री की दौड़ में आगे हो गई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह हिंसा केवल सोशल मीडिया बैन की वजह से नहीं फैली। लंबे समय से चल रहे राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक असंतोष ने जनता के गुस्से को बढ़ाया, और सोशल मीडिया बैन ने इस आंदोलन को और विकराल बना दिया। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे इस हिंसक आंदोलन के पीछे की 5 बड़ी वजहें

Nepal Gen-Z protests 5 Reason

Social Media बैन

नेपाल सरकार ने देश में फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप (Social Media Ban In Nepal) को बंद कर दिया है, जिससे देश के युवाओं की डिजिटल कमाई और ऑनलाइन गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। यह कदम विशेष रूप से उन युवा पेशेवरों और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए चुनौती बन गया है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी आमदनी और करियर का निर्माण कर रहे थे। बैन के चलते न केवल युवाओं की आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित हुई है, बल्कि उनका सामाजिक और राजनीतिक संवाद भी सीमित हो गया है। TikTok को छोड़कर सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म बंद होने से युवा समुदाय के बीच असंतोष और गुस्सा और बढ़ गया है।

5 साल में तीन प्रधानमंत्री

नेपाल में पिछले पांच वर्षों में राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता रहा है। इस अवधि में तीन प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। शेर बहादुर देउबा (Sher Bahadur Deuba), पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड (Pushpa Kamal Dahal Prachanda) और केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli)। लगातार नेतृत्व में बदलाव और राजनीतिक झुकाव ने जनता के बीच भरोसे की कमी पैदा की है। आम लोगों को सरकार की स्थिरता और नीतियों पर विश्वास नहीं रह गया, जिससे सामाजिक और आर्थिक असंतोष बढ़ा। लगातार सत्ता परिवर्तनों और राजनीतिक झगड़ों के कारण युवाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों में नाराज़गी फैली, जो अब Gen-Z आंदोलन और व्यापक प्रदर्शन के रूप में सामने आ रही है।

भाई-भतीजावाद और आर्थिक असमानता

नेपाल में राजनीतिक अभिजात वर्ग ने लगातार अपने परिवार और रिश्तेदारों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया है, जिससे सत्ता का केंद्रीकरण और भ्रष्टाचार और गहरा हुआ है। इसने आम नागरिकों में असमानता और नाराज़गी को बढ़ावा दिया है। देश में बेरोजगारी दर 10% से अधिक है, जबकि लगभग 20% लोगों के पास राष्ट्रीय संपत्ति का आधा हिस्सा जमा है। इन आर्थिक और सामाजिक विषमताओं के कारण युवा वर्ग, खासकर Gen-Z, असंतोष और गुस्से के साथ सड़कों पर उतर रहा है। भाई-भतीजावाद ने केवल प्रशासनिक और राजनीतिक प्रणाली को प्रभावित नहीं किया, बल्कि सामाजिक भरोसे और न्याय की भावना को भी कमजोर कर दिया है।

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लगातार हो रहे बड़े घोटाले

नेपाल में पिछले चार वर्षों में लगातार बड़े वित्तीय घोटाले सामने आए हैं, जिन्होंने जनता में गहरी नाराज़गी और असंतोष पैदा किया है। 2021 में गिरी बंधु भूमि स्वैप घोटाला सामने आया, जिसकी राशि लगभग ₹54,600 करोड़ बताई गई। इसके बाद 2023 में ओरिएंटल कोऑपरेटिव घोटाले का खुलासा हुआ, जिसका मूल्य ₹13,600 करोड़ था। सबसे हाल ही में 2024 में कोऑपरेटिव घोटाले ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी, जिसमें लगभग ₹69,600 करोड़ का नुकसान हुआ। इन लगातार सामने आने वाले घोटालों ने भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर की हैं और युवाओं तथा आम जनता में सरकार और प्रशासन के प्रति असंतोष और विश्वासघात की भावना को और बढ़ाया है।

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भारत से दूरी और चीन से नजदीकी

नेपाल ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी विदेश नीति में भारत से दूरी बनाए रखने और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। लिपुलेख विवाद और अन्य भू-राजनीतिक घटनाओं के चलते नेपाल-भारत संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिससे स्थानीय व्यापार और आम जनता पर आर्थिक दबाव पड़ा है। वहीं, चीन के साथ बढ़ती नजदीकी ने राजनीतिक झुकाव और विदेशी दबाव को और बढ़ा दिया है। इस कारण देश के युवाओं में निराशा और बेचैनी पनप रही है, खासकर उन समुदायों में, जैसे मधेसी लोग, जो भारत के साथ मजबूत रिश्तों के पक्षधर हैं। विदेशी नीतियों और राजनीतिक झुकाव ने Gen-Z प्रदर्शन के लिए जमीन तैयार कर दी है।

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