Falta Re-Polling: फलता सीट पर पुनर्मतदान संपन्न, रिकॉर्ड वोटिंग के साथ जनता ने बदला चुनावी मिजाज!
West Bengal Falta Assembly Re-Polling Updates: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को पुनर्मतदान (री-पोल) भारी सुरक्षा और अभूतपूर्व उत्साह के बीच संपन्न हो गया। राजनीतिक हिंसा और तनाव के इतिहास को पीछे छोड़ते हुए इस बार फलता की जनता ने लोकतंत्र के उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, इस सीट पर कुल 88.13 प्रतिशत का रिकॉर्ड तोड़ और बंपर मतदान दर्ज किया गया है। सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग के दौरान पोलिंग बूथों पर दिनभर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें नजर आईं, जो शाम 6 बजे तक अनवरत जारी रहीं। आइए जानतें हैं मंत्री ने क्या कहा और इस पुनर्मतदान के पीछे की बड़ी वजह व सियासी समीकरण क्या हैं।

क्यों रद्द हुआ था पिछला मतदान?
दरअसल, पिछले महीने 29 अप्रैल को हुए नियमित मतदान के दौरान फलता सीट पर बड़े पैमाने पर चुनावी गड़बड़ियों, डराने-धमाने और ईवीएम (EVM) में कथित छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे थे। विपक्ष की ओर से शिकायत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अक्षुण्ण रखने के लिए वहां के मतदान को पूरी तरह रद्द घोषित कर दिया था। इसी वजह से निर्वाचन आयोग को इस सीट पर दोबारा वोटिंग कराने का फैसला लेना पड़ा।
पिछले कड़वे अनुभवों से सबक लेते हुए चुनाव आयोग ने इस बार फलता में सुरक्षा की अभेद्य दीवार खड़ी की थी। निर्वाचन क्षेत्र में कुल 285 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जहां शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की करीब 35 कंपनियों को जमीन पर उतारा गया था। आयोग ने सुरक्षा का स्तर इस कदर कड़ा कर दिया था कि पिछली बार प्रति बूथ 4 जवानों की तुलना में इस बार हर एक पोलिंग बूथ पर 8 केंद्रीय जवानों की मुस्तैदी रही। इसके साथ ही किसी भी आपातकालीन स्थिति या अप्रिय घटना से तुरंत निपटने के लिए 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT) लगातार इलाके में गश्त कर रही थीं।
टीएमसी उम्मीदवार के मैदान छोड़ने से बदला समीकरण
इस पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले फलता के सियासी गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने इसके पीछे अपने 'निजी कारणों' का हवाला दिया था। हालांकि, टीएमसी ने इस पर सफाई देते हुए इसे जहांगीर खान का पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला बताया, लेकिन मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार के पीछे हटने से जमीनी समीकरण काफी हद तक बदल गए। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस सीट से देवांग्शु पांडा को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो पूरी मजबूती से डटे रहे।
24 मई को खुलेगा नतीजों का पिटारा
भारी सुरक्षा के साये में हुए इस शांतिपूर्ण और बंपर मतदान के बाद अब सभी की निगाहें नतीजों पर टिक गई हैं। इस सीट पर मुख्य मुकाबला किसके पक्ष में जाएगा और फलता की जनता किसे अपना नया विधायक चुनेगी, इसका आधिकारिक फैसला 24 मई को होगा। चुनाव आयोग इसी दिन मतगणना आयोजित कर पुनर्मतदान के अंतिम परिणाम जारी करेगा












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