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Singapore: सिंगापुर में तंगराजू सुपैया को दी गई फांसी, दुनिया करती रह गई माफी की अपील, क्यों मचा हंगामा?

सिंगापुर में दुनिया का सबसे कठोर ड्रग्स कानून है। पिछले साल 22 अप्रैल को भी एक और ड्रग तस्कर नागेंद्रन धर्मलिंगम को फांसी दे दी गई थी।

Singapore Tangaraju Suppiah

Singapore executes Man For Cannabis Trafficking: सिंगापुर में तंगराजू सुपैया को आज सुबह सुबह फांसी दे दी गई है। तंगराजू सुपैया को मिली फांसी की सजा पर भारी हंगामा मचा हुआ था और पूरी दुनिया के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सिंगापुर सरकार से अपील की थी, कि तंगराजू सुपैया को फांसी नहीं दी जाए, लेकिन सिंगापुर सरकार ने किसी की भी बात नहीं सुनी।

तंगराजू सुपैया को करीब 1 किलो गांजे की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था और अब उसे फांसी दे दी गई है, जिसकी पुष्टि उसके परिवार ने कर दी है। सिंगापुर सरकार के इस फैसले की कई मानवाधिकार समूहों ने निंदा की है, क्योंकि वो लंबे वक्त से सिंगापुर सरकार से मृत्युदंड की सजा को लेकर उदार नजरिया अपनाने की अपील कर रहे थे।

एक तरफ जहां दुनिया के कई देशों में अब गांजा सेवन को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी जा रही है, वहीं सिंगापुर में दुनिया का सबसे कठोर ड्रग कानून है। सिंगापुर सरकार का मानना है, कि मृत्युदंड की सजा मिलने से, मादक पदार्थों के तस्करों को रोकने में मदद मिलता है और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए मौत की सजा मिलना जरूरी है।

सिंगापुर में पिछले साल 22 अप्रैल को भी एक और ड्रग तस्कर नागेंद्रन धर्मलिंगम को फांसी दे दी गई थी और वो भी भारत का रहने वाला था।

सिंगापुर में कठोर ड्रग्स कानून

तंगराजू सुपैया की बहन लीलावती सुप्पिया ने सीएनएन को बताया, कि 46 साल के तंगाराजू सुप्पिया को चांगी जेल में बुधवार तड़के फांसी पर लटका दिया गया और परिवार को मृत्यु प्रमाण पत्र दिया गया है। फांसी पर चढ़ाए जाने से पहले, परिवार के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने क्षमादान के लिए सार्वजनिक अपील की थी और उनकी सजा की सुरक्षा पर सवाल उठाया। यह छह महीने में सिंगापुर में दी गई पहली फांसी थी।

सिंगापुर की सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो (CNB) के एक बयान के अनुसार, तंगराजू को पहली बार 2018 में "एक किलोग्राम गांजा (1,017.9 ग्राम) की तस्करी को बढ़ावा देने" के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने पाया, कि वह सिंगापुर में गांजे की तस्करी करने की कोशिश में पकड़े गए दो अन्य लोगों के साथ फोन पर बात कर रहा था।

सीएनबी ने कहा, कि उनकी दोषसिद्धि और मौत की सजा के खिलाफ उसकी पिछली अपीलों को अदालतों ने 2019 में खारिज कर दिया था, जबकि राष्ट्रपति ने भी उसकी क्षमादान की याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया था।

तंगराजू सुपैया की सजा पर सवाल क्यों?

तंगराजू सुपैया को एक किलो गांजा सिंगापुर से मलेशिया तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, उनके बचाव पक्ष का कहना था, कि तंगराजू सुपैया को गांजे के साथ पकड़ा नहीं गया था, लेकिन सरकारी वकील का कहना था, कि तंगराजू सुपैया इस तस्करी का मास्टरमाइंड था।

सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया, कि इस तस्करी कांड में जो मोबाइल नंबर ट्रेस किए गये थे, वो तंगराजू सुपैया के ही थे।

सिंगापुर के कानून में ड्रग्स के तस्कर के लिए मौत की सजा का कानून है, जबकि ड्रग्स पहुंचाने वाले के लिए कम सख्त सजा का प्रावधान है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है, कि "तंगराजू सुपैया को सजा पुलिस के सामने उसके दिए गये बयानों के आधार पर ठहराया गया था, और कोर्ट में उसे ना वकील की सुविधा दी गई और ना ही उसे कोर्ट की कार्यवाही समझने के लिए दुभाषिये की ही सुविधा दी गई। सिर्फ दो सह-आरोपियों के बयान के आधार पर उसे गुनहगार साबित मान लिया गया, जिनमें से एक सह आरोपी को बरी कर दिया गया।"

तंगराजू सुपैया के परिवार ने क्या कहा?

CNN से बातचीत करते हुए तंगराजू सुपैया की बहन लीलावति ने कहा, कि उसका भाई बेगुनाह था। उसने कहा, कि "जेल के अंदर से भी, वह अपनी बेगुनाही के लिए लड़ना चाहता था।" उसने सीएनएन को बताया, कि "उन्हें विश्वास था, कि एक निष्पक्ष सुनवाई होगी और वह हर कदम पर अपनी बेगुनाही साबित करना चाहते थे।"

वहीं, ट्रांसफॉर्मेटिव जस्टिस कलेक्टिव (टीजेसी), जो स्थानीय उन्मूलनवादी आंदोलन संगठन है, उसने तंगराजू को दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल किए गए सबूतों पर सवाल उठाया और कहा, कि ये सबूत काफी कमजोर थे। टीजेसी ने कहा, कि "तंगराजू के खिलाफ मामला काफी हद तक परिस्थितिजन्य है और अनुमानों पर आधारित था।"

तंगराजू सुपैया ने कोर्ट में साफ तौर पर इस बात से इनकार किया, कि घटना में इस्तेमाल किए गये मोबाइल फोन से उनका कोई ताल्लुक है। उसने कोर्ट में कहा, कि उसका एक फोन खो गया था, जबकि दूसरा फोन उसका नहीं था। लेकिन, जज ने तंगराजू सुपैया की बात को खारिज कर दिया।

वहीं, टीजेसी ने कहा, कि पुलिस का कहना था, कि दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल हुआ, जबकि दूसरा मोबाइल फोन कभी भी पुलिस बरामद ही नहीं कर पाई।

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    आपको बता दें, कि ब्रिटेन के अरबपति कारोबारी सर रिचर्ड ब्रैनसन ने सिंगापुर में मौत की सजा पर गंभीर सवाल उठाया था। पिछले साल जब नागेंद्रन धर्मलिंगम को फांसी दी गई थी, तो उन्होंने इसे हैरान करने वाला बताया था। वहीं, तंगराजू सुपैया की मौत को लेकर उन्होंने लिखा, कि "सिंगापुर संदिग्ध सबूतों के आधार पर एक निर्दोष शख्स की हत्या करने जा रहा है।" हालांकि, सिंगापुर के गृहमंत्रालय ने रिचर्ड ब्रैनसन के आरोपों को खारिज कर दिया था।

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