Moderna और Pfizer वैक्सीन को लेकर चौंकाने वाली रिसर्च, पुरषों पर ज्यादा असरदार
नई दिल्ली, 23 मई: अमेरिका में फिलहाल इस्तेमाल हो रही दोनों कोविड वैक्सीन मॉडर्ना और फाइजर पर एक चौंकाने वाली रिसर्च हुई है। इससे पता चला है कि ये दोनों वैक्सीन महिलाओं के मुकाबले पुरुषों पर ज्यादा काम कर रही हैं। शोधकर्ताओं ने इसकी वजह का भी पता लगाया है। यह रिसर्च मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में की गई गई है। इस रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि नैनोपार्टिकल्स की वजह से महिलाओं और पुरुषों का इम्यून सिस्टम अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है।

दोनों वैक्सीन पुरुषों पर ज्यादा असरदार
अमेरिका के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मॉडर्ना और फाइजर वैक्सीन का महिलाओं और पुरुषों पर होने वाले अलग-अलग असर पर रिसर्च किया है। इस शोध का नतीजा ये है कि ये वैक्सीन पुरुषों पर महिलाओं से ज्यादा काम करती हैं। मॉडर्ना और फाइजर वैक्सीन मानव के इम्यून सिस्टम के सेल्स को ऐक्टिव इंग्रीडिएंट देने के लिए नैनोपार्टिकल्स का इस्तेमाल करती हैं। मिशिगन के शोधकर्ता मॉर्टेजा महमूदी को स्टडी में यह पता लगाना था कि कोरोना वायरस वैक्सीन या सामान्य दवाइयों के मामलों में भी मरीज के लिंग के आधार पर नैनोमेडिसीन कैसे और क्यों अलग-अलग तरह से प्रभाव डालते हैं। उनका मानना है कि महिलाओं और पुरुषों पर अलग-अलग असर का यह भी एक कारण हो सकता है।
नैनोपार्टिकल्स हैं अंतर के लिए जिम्मेदार
महमूदी की स्टडी इस चुनौती पर आधारित है कि नैनोमेडिसीन के परफॉर्मेंस में लिंग (सेक्स) का क्या रोल है। मॉडर्ना वैक्सीन के मामले में देखा गया है कि यह पुरुषों में कोविड-19 को रोकने में 95.4 % प्रभावी है। जबकि, महिलाओं में उसकी तुलना में सिर्फ 93.1% ही प्रभावी है। वहीं फाइजर वैक्सीन पुरुषों में 96.4% कारगर साबित हुई और महिलाओं में 93.7% ही प्रभावी है। दोनों वैक्सीनों में लिपिड पर आधारित नैनोपार्टिकल्स का इस्तेमाल हुआ है। महमूदी ने यह पता लगाने के लिए रोम के सेपिएंजा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ भी काम किया। इसके लिए उन्होंने एक एक्सपेरिमेंट डिजाइन किया कि क्या लिपिड-बेस्ड नैनोपार्टिकल्स ही महिलाओं और पुरुषों में वैक्सीन के अलग-अलग असर के कारण हैं। यह स्टडी बीते 13 मई को जर्नल मोलेक्यूलर फार्माकोलॉजी में प्रकाशित हुई थी।
शोध से यह पता चला कि पुरुष डोनरों की तुलना में महिला डोनरों से लिए गए नैचुरल किलर सेल्स ने काफी कम नैनोपार्टिकल्स लिए। इस मॉडल के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचा गया कि वैक्सीन पुरुषों और महिलाओं के इम्यून सिस्टम पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देगी।












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