तालिबान के 'विदेश मंत्री' शेर मोहम्मद को इंडियन आर्मी ने दी है ट्रेनिंग, क्या अब चुका रहा है नमक का कर्ज?

तालिबान का प्रमुख राजनीतिक चेहरा, शेर मोहम्मद अब्बासी, जिसने भारतीय प्रतिनिधियों के साथ दोहा में मुलाकात की, उसे इंडियन आर्मी ने ट्रेनिंग दी है।

दोहा/नई दिल्ली, सितंबर 01: भारत सरकार ने पहली बार आधिकारिक तौर पर तालिबान के साथ बातचीत की है और इसकी पुष्टि अब आधिकारिक तौर पर हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अफगानिस्तान से भारतीयों को निकालने से लेकर कई मुद्दों पर तालिबान के साथ बातचीत की है। लेकिन, क्या आप जानते हैं, तालिबान की तरफ से जो शख्स भारत से बात करने आया था, उसे इंडियन आर्मी ने ही ट्रेंड किया है। वो भारत के मिलिट्री स्कूल से ही पढ़ा लिखा है? दोहा में भारतीय अधिकारियों से मीटिंग से पहले भी तालिबान के पॉलिटिकल कमेटी के हेड ने भारत को जो ऑफर दिया था, उससे साफ पता चलता है कि वो भारत के नमक का कर्ज अदा करने की कोशिश कर रहा है।

भारत के साथ बातचीत

भारत के साथ बातचीत

कतर की राजधानी दोहा में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने मंगलवार को तालिबान के प्रतिनिधियों से बात की। जिसमें तालिबान की तरफ से बड़े नेताओं में से एक वो शख्स भी शामिल था, जिसे भारतीय सेना ट्रेनिंग दे चुकी है। इस शख्स का नाम है, शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनिकजई, जिसे भारत में ट्रेनिंग के दौरान उसके दोस्त शेरू कहकर बुलाते थे। पिछले महीने 15 अगस्त को जब काबुल पर तालिबान का कब्जा हुआ था और अचानक पूरी दुनिया में कोहराम मच गया था, दुनिया के तमाम देशों ने अपने अपने अधिकारियों को काबुल से निकालना शुरू कर दिया था, उस वक्त भी शेर मोहम्मद अब्बास ने भारत को ऑफर दिया था कि वो काबुल से अपने अधिकारियों को नहीं निकाले, तालिबान की तरफ से उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी। लेकिन, भारत सरकार ने एहतियात बरतते हुए अपने सभी अधिकारियों को काबुल से बुला लिया था, और अब एक बार फिर से 'शेरू' ने भारत के साथ बातचीत में बड़ा ऑफर दिया है।

कौन है तालिबान में भारत का 'शेरू'

कौन है तालिबान में भारत का 'शेरू'

रिपोर्ट के मुताबिक 1970 के दशक के अंत में औऱ 1980 के दशक के शुरूआत में शेर मोहम्मद अब्बासी ने भारत में रहकर मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी। शेर मोहम्मद अब्बास जब इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पढ़ाई कर रहा था, उस वक्त उसे उसके बैचमेट्स 'शेरू' कहकर संबेधित करते थे। शेर मोहम्मद अब्बास के बैचमेट्स कहते हैं कि भारत में पढ़ाई करने के दौरान शेर मोहम्मद अब्बास कतई कट्टरपंथी नहीं था, या उसने कभी अहसास नहीं दिलाया कि वो एक कट्टरपंथी लड़का है, जो आगे जाकर तालिबान का बड़ा नेता बनने वाला है। राजनीति विज्ञान का अध्ययन करने के बाद शेर मोहम्मद स्टानिकजई इंडियन मिलिट्री एकेडमी में शामिल हो गया था, जहां उसने भारतीय सैन्य संस्थान द्वारा अफगानों के लिए अपने द्वार खोलने के बाद 1.5 साल तक ट्रेनिंग ली थी।

1982 बैच में पढ़ाई करता था 'शेरू'

1982 बैच में पढ़ाई करता था 'शेरू'

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 'शेरू' या शेर मोहम्मद स्टानिकजई जब 20 साल का था, तब वह 1982 बैच में देहरादून में आईएमए में शामिल हुआ था। भारतीय थल सेना के एक सेवानिवृत्त मेजर जनरल ने शेर मोहम्मद अब्बास के बारे में कहा कि ''वह एक ऐसा शख्स था, जो अन्य कैडेटों की तुलना में थोड़ा ज्यादा लंबा था और उसकी मुंछें काफी आकर्षक हुआ करती थीं। रिटायर्ड मेजर जनरल डीएम चतुर्वेदी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ''पढ़ाई के दौरान निश्चित तौर पर उसके पास कट्टरपंथी विचार नहीं था''

सहपाठियों ने 'शेरू' पर क्या कहा ?

सहपाठियों ने 'शेरू' पर क्या कहा ?

कर्नल (सेवानिवृत्त) केसर सिंह शेखावत, जो शेर मोहम्मद स्टानिकजई के बैचमेट भी थे, उन्होंने शेर मोहम्मद स्टानिकजई के साथ बिताए गये पलों को याद करते हुए कहा कि हम अकसर वीकेंड में नदी के किनारे घूमा करते थे। कर्नल शेखावत ने याद करते हुए कहा, "शेर मोहम्मद की एक तस्वीर उनके पास है, जिसमें वो स्वीमिंग कर रहा और वो चड्डी में है।'' उन्होंने कहा कि ''ये तस्वीर तब की है, जब हम ऋषिकेश गये हुए थे और हमने काफी देर तक गंगा में स्नान किया था''। रिपोर्ट के मुताबिक, IMA में अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, स्टैनिकजई एक लेफ्टिनेंट के रूप में अफगान नेशनल आर्मी में शामिल हो गया था और उसने सोवियत-अफगान युद्ध और अफगानिस्तान की इस्लामी मुक्ति के लिए लड़ाई लड़ी थी।

तालिबान शासन में मुख्य पदों पर रहा

तालिबान शासन में मुख्य पदों पर रहा

पिछले तालिबान शासन के दौरान स्टैनिकजई ने विदेश मामलों के उप मंत्री के रूप में काम किया था और तालिबान की ओर से राजनयिक वार्ता के लिए बिल क्लिंटन शासन के दौरान अमेरिका की यात्रा भी की थी। 2015 में स्टैनिकजई को कतर में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय का प्रमुख नियुक्त किया गया था। कहा जाता है कि काफी ज्यादा पढ़े लिखे होने की वजह से स्टैनिकजई को तालिबान में काफी अहम स्थान दिया गया है। दरअसल, तालिबान के ज्यादातर नेताओं ने मदरसों में पढ़ाई की है, जबकि स्टैनिकजई ने काफी पढ़ाई-लिखाई की है।

आईएसआई ने बनाया आतंकियों का 'बॉस'

आईएसआई ने बनाया आतंकियों का 'बॉस'

भारत में पढ़ाई-लिखाई करने के बाद स्टैनिकजई वापस अफगानिस्तान चला गया, जहां वो सेना में बड़े ओहदे पर शामिल गो गया था। भारत में पढ़ाई करने से पहले वो पॉलिटिकल साइंस में एमए कर चुका था और फिर बाद में वो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ जुड़ गया था। जहां उसे आईएसआई के साथ साथ पाकिस्तान की मिलिट्री की तरफ से आतंकियों की तरह ब्रेनवॉश किया गया और उसे स्पेशल ट्रेनिंग दी गई। स्टैनिकजई 1996 में अमेरिका भी गया था, जहां उसने तत्कालीन बिल क्लिंटन सरकार से तालिबान को राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता देने की मांग की थी। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि स्टैनिकजई का अभी भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से गहरा रिश्ता है और अब जब तालिबान की सरकार बनने वाली है, तो उसे अहम जिम्मेदारी मिलने वाली है।

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