पाकिस्तान में शहबाज़ शरीफ़ का पीएम बनना चीन के लिए फ़ायदे का सौदा?

पाकिस्तान चीन
Getty Images
पाकिस्तान चीन

प्रधानमंत्री बनते ही शहबाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान के लिए अपनी प्राथमिकताओं का जिक्र किया.

उनकी प्राथमिकता है देश में महंगाई पर काबू पाना और थमी हुई अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाना.

भले ही उन्होंने इसके लिए उठाए जाने वाले क़दमों का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन इतना ज़रूर कहा कि वो पाकिस्तान को 'निवेशकों के लिए स्वर्ग' बना देंगे. पाकिस्तान में निवेशकों की बात करें तो ज़ेहन में दो ही नाम आते हैं - एक चीन का और दूसरा अमेरिका का.

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ़ पाकिस्तान के 2021 के आँकड़ों के मुताबिक़ पाकिस्तान में चीनी निवेश घटा है जबकि अमेरिकी निवेश बढ़ा है. जुलाई से सितंबर 2021 के बीच पाकिस्तान में चीनी निवेश केवल 10 करोड़ डॉलर था जबकि 2020 में इस अवधि के लिए ये 20 करोड़ डॉलर से ज़्यादा था.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में बलूचिस्तान कितना बड़ा रोड़ा

इसकी तुलना में अमेरिकी निवेश इस अवधि के लिए 10 करोड़ डॉलर से ज़्यादा रहा जो इससे पहले सिर्फ़ दो करोड़ डॉलर था. इस वजह से इमरान ख़ान सरकार पर चीन से दूरी बनाए रखने के आरोप हमेशा से लगते रहे.

अब जब पीएम शहबाज़ शरीफ़ पाकिस्तान को निवेशकों के लिए स्वर्ग बनाने की बात कह रहे हैं, तो पाकिस्तान और चीन की जनता मान कर चल रही है, कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में चीन का निवेश दोबारा से बढ़ेगा.

प्रधानमंत्री बनने के बाद, शहबाज़ शरीफ़ ने चीन को इस बात के लिए आश्वस्त भी किया.

उन्होंने कहा, "चीन हमेशा से पाकिस्तान का दोस्त रहा है. ये दोस्ती हुकूमतों की दोस्ती नहीं आवामों की दोस्ती है. पिछली सरकार ने इस दोस्ती को कमजोर करने के लिए जो कुछ भी कुछ किया वह बहुत तकलीफदेह दास्तान है. हम सीपेक पर और तेजी से काम करेंगे."

चीन के ख़िलाफ़ क्यों हैं बलूचिस्तान के कई लोग

चीन पाकिस्तान
Getty Images
चीन पाकिस्तान

सीपेक क्या है?

चीन का पाकिस्तान में चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपेक) में सबसे बड़ा निवेश बताया जाता है.

चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर या सीपेक चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत बनाए जा रहे व्यापारिक नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें सड़कों, बिजली संयंत्रों, रेलवे लाइनों और औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण शामिल है.

पाकिस्तान में पिछली सरकार यानी मुस्लिम लीग (नवाज़) के समय सीपीईसी परियोजना पर काम शुरू हुआ था, जिसके तहत कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और उनमें से कुछ पूरे भी हुए.

लेकिन पीटीआई के सत्ता में आने के बाद, इस परियोजना में लंबे समय से सुस्ती की शिक़ायत आ रही हैं.

सीपेक के तहत पाकिस्तान में इंफ़्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें चीन का 62 अरब डॉलर का निवेश है. चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की सभी परियोजनाओं में सीपेक को सबसे महत्वपूर्ण मानता है.

यही वजह है कि पाकिस्तान में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम पर चीन की पैनी नज़र थी.

सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाला दैनिक ग्लोबल टाइम्स ने उनके भाषण के इस अंश पर विश्लेषण छापा है.

https://twitter.com/XHNews/status/1513764258529513473

विश्लेषण का सार ये है कि पाकिस्तान की नई सरकार भले ही कुछ समय के लिए स्थिरता के लिए मशक्कत करनी पड़े लेकिन विदेश नीति में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना बहुत कम है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से इस लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति जो भी हो, चीन पाकिस्तान की दोस्ती बरकरार रहेगी. पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन चीन-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इमरान ख़ान के पीएम रहते, चीन सीपेक परियोजना की प्रगति से क्या खुश नहीं था?

ये भी पढ़ें : पाकिस्तान: शहबाज़ शरीफ़ बने पीएम, भारत से रिश्तों पर क्या होगा असर?

चीन पाकिस्तान
Getty Images
चीन पाकिस्तान

इमरान ख़ान के दौर में सीपेक और चीन से रिश्ते

डॉ. मरिया सुलतान, साउथ एशियन स्ट्रैटेजिक स्टेबिलिटी इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी की महानिदेशक हैं. दोनों देशों के रिश्तों और इस प्रोजेक्ट पर वे नज़र रखती हैं.

पाकिस्तान से बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में एक आम धारणा है कि इमरान ख़ान के दौर में, नवाज़ शरीफ़ के कार्यकाल के मुक़ाबले सीपेक परियोजना में कम तेज़ी देखने को मिली है. लेकिन ये बात पूरी तरह से सही नहीं है."

इसके पीछे वो तर्क भी देती है.

उनके मुताबिक़, "इमरान ख़ान ने अपने कार्यकाल में सीपेक के 'सामाजिक-आर्थिक फ़ायदों' को लोगों तक पहले पहुँचाने पर ज़ोर दिया, जिस वजह से चीन या पाकिस्तान को जिस स्तर का फ़ायदा होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वो हासिल नहीं हो पाया."

'सामाजिक-आर्थिक फ़ायदों' को समझाते हुए वो कहती हैं कि इमरान सरकार ने सीपेक परियोजना के तहत छोटे बांध बनाने और स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर ज़्यादा ज़ोर दिया, जबकि चीन और पाकिस्तान, दोनों की अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से इमरान सरकार को इस परियोजना से जुड़ी रेलवे लाइन और तेल पाइपलाइन बिछाने पर ज़ोर देने की ज़रूरत थी.

मरिया कहती हैं, " चाहे बांध हो या फिर स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट दोनों जनता के लिहाज से ज़रूरी हैं, लेकिन आर्थिक विकास में बहुत योगदान नहीं दे पाते. शहबाज़ शरीफ़ सरकार से चीन को उम्मीद होगी की वो सीपेक परियोजना में रोड, रेलवे और तेल पाइपलाइन जैसी बड़ी परियोजनाओं को एक दूसरे से जोड़ने पर ज़ोर देंगें."

ये भी पढ़ें : पाकिस्तान: शनिवार रात इमरान ख़ान के आवास पर आख़िर क्या-क्या हुआ?

सीपेक
Getty Images
सीपेक

सीपेक अथॉरिटी का गठन

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुखिया के तौर पर शहबाज़ शरीफ़ ने ऐसे कई विकास परियोजना में तेजी लाने का काम किया. जिस वजह से उनसे ये उम्मीद बंधती दिखती भी है. शहबाज़ शरीफ़ के पीएम बनते ही पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले आठ रुपये मज़बूत हुआ.

मारिया इस तथ्य को इस बात से जोड़ती हैं कि पाकिस्तानियों को शहबाज़ शरीफ़ से एक उम्मीद भी है.

एक सच ये भी है कि सीपेक परियोजना के लिए इमरान खान पीएम बनने के पहले बहुत उत्साहित नहीं दिखते थे.

लेकिन पीएम बनने के बाद उन्होंने परियोजना को अमल में लाने के लिए सीपेक अथॉरिटी का गठन किया.

सीपेक अथॉरिटी का गठन 'वन विंडो ऑपरेशन' के मक़सद से किया गया था.

ये और बात है कि बाद में इसका इस्तेमाल राजनीतिक तौर पर हुआ. इसके चेयरमैन इतनी बार बदले कि जिस मकसद से ये बनाया गया उसे पूरा नहीं कर पाई. ऐसे पाकिस्तान में कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं.

इमरान ख़ान के दौर में सीपेक परियोजना में तेज़ी नहीं आने के पीछे इसे भी बड़ी वजह बताई गई.

ये भी पढ़ें : पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल से कैसे चौपट हो रही है उसकी अर्थव्यवस्था?

सीपेक
Getty Images
सीपेक

शहबाज़ शरीफ़ के लिए मुश्किल

हालांकि जेएनयू में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडी के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह की राय चीन और पाकिस्तान की नई सरकार के बीच की केमेस्ट्री को लेकर थोड़ी अलग है.

उनके मुताबिक़, "चीन और पाकिस्तान हमेशा से एक दूसरे के पक्के दोस्त रहे हैं.

सीपेक परियोजना, जो बीआरआई परियोजना का ही हिस्सा है, उसमें इमरान सरकार के आने के बाद कुछ एक बदलाव की माँग ज़रूर की थी. जिसमें सबसे अहम था, बिजली की प्रति यूनिट लागत थी. लेकिन चीन के साथ कोई टकराव वाली स्थिति नहीं आई थी. वैसे भी इस तरह की परियोजनाओं में ऐसी चर्चा हर नई सरकार करती है."

शहबाज़ शरीफ़ के आने से इस परियोजना में बहुत बड़ी तेज़ी जाएगी, प्रो. स्वर्ण सिंह ऐसा नहीं मानते.

उनका मानना है कि शहबाज़ शरीफ़ कितने दिन तक प्रधानमंत्री रह पाएंगे, इसको लेकर कई तरह के कयास पाकिस्तान में लगाए जा रहे हैं.

"फिलहाल शहबाज़ शरीफ़ का ध्यान पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति की तरफ़ ज़्यादा रहेगा, जहाँ तोड़-फोड़ और जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही है. शहबाज़ शरीफ़ का ज़्यादतर वक़्त सरकार बनाने के लिए साथ आई पार्टियों को एकजुट रखने में ख़र्च होगा. इस वजह से नहीं लगता कि सीपेक को लेकर कोई बहुत बड़ा क़दम उठाने की स्थिति में शहबाज़ फिलहाल होंगे.

लेकिन इतना ज़रूर है कि लोकतांत्रिक तरीके से वो चुन कर आए हैं, ये चीन के लिए ये अच्छी ख़बर है."

ये भी पढ़ें : पाकिस्तान में महंगाई को कितना क़ाबू कर पाएँगे शहबाज़ शरीफ़?

सीपेक
Getty Images
सीपेक

सीपेक की काम में देरी ?

दरअसल सीपेक परियोजना के तहत काम कई चरणों में पूरा होना था.

पहला चरण पहला चरण इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए था, जिनमें से ज़्यादातर नवाज़ लीग के दौर में ही पूरे हुए थे.

दूसरा चरण औद्योगिक क्षेत्र का है, जिसमें इमरान सरकार के समय काम ज़्यादा नहीं हो पाया.

डॉ. मरिया के मुताबिक़ पहले सीपेक परियोजना के तहत 50 से ज़्यादा SEZ बनने की बात थी, जो घटकर 27 रह गई. फिर कहा गया कि चरणबद्ध तरीके से ये बनाए जाएंगे और पहले चरण में चार SEZ पर काम शुरु होगा, जिसमें से दो पर ही काम शुरू हो पाया है.

इसमें देरी की एक अहम वजह कोरोना महामारी है और दूसरी वजह ग्वादर, क्वेटा, कराची और दसू में चीनी नागरिकों पर हुए चरमपंथी हमले हैं.

यही वजह है कि ग्वादर, जो पूरी सीपेक परियोजना के लिए एंट्री प्वाइंट का काम करेगा उसमें इंफ्रास्ट्रक्चर बन कर लगभग साल भर से तैयार है, लेकिन अभी तक चालू नहीं हो पाया है. इसे रेल लाइन, शिपिंग लाइन और तेल पाइप लाइन से जोड़ने की ज़रूरत है. जिन दो SEZ पर अभी काम चल रहा है, उसका फ़ायदा तब तक नहीं मिलेगा जब तक ग्वादर पूरी तरह चालू नहीं हो जाता नहीं होगा.

चीन और पाकिस्तान दोनों तरफ़ से उम्मीद जताई जा रही है नए पीएम के कार्यकाल में इसमें तेज़ी देखने को मिलेगी.

ये भी पढ़ें : पाकिस्तान में चीन से निवेश कम होने पर उठ रहे तमाम सवाल

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+