... उन्हें शादी नहीं करनी थी तो चली गईं अंटार्कटिका
"मैं नहीं जाना चाहती हूं. मैं उस ज़मीन (अपने घर) वाली दिशा में नहीं जाना चाहती हूं."
"इस क्रिसमस पर पहली बार किसी भी चाचा या चाची ने मुझसे नहीं पूछा कि मैं शादी करने कब जा रही हूं. बस उन्होंने पूछा कि तुम अब कब अंटार्कटिका जा रही हो?"
37 साल की मीना राजपूत के लिए यह पहली बार चौंकाने वाला था कि उनके परिवार को क्या हो गया है.
अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्रीनपीस का एक जहाज़ अंटार्कटिका में नए वैज्ञानिक प्रमाण तलाश कर रहा है. वैज्ञानिक कहते हैं कि यहां एक समुद्र तटीय पारिस्थितिकी तंत्र है जिसको एक ख़ास सुरक्षा की ज़रूरत है.
छोटी पनडुब्बियां वैज्ञानिकों को लहरों और समुद्र के गहरे नीचे ले जाती हैं. जहां वो समुद्र के नए प्रमाण इकट्ठे करते हैं. इसका एक मक़सद दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य बनाना भी है.
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परिजन चाहते हैं शादी हो
इसी जहाज़ पर इंग्लैंड के लेटन बज़र्ड के अपने घर से बहुत दूर मीना राजपूत सवार हैं. वो ग्रीनपीस के साथ काम कर रही हैं. वो एक पारंपरिक ब्रिटिश-भारतीय परिवार से आती हैं.
उनकी मां आशा कहती हैं कि जब वह अंटार्कटिका जा रही थीं तो उनका परिवार बहुत उत्साहित था क्योंकि वह अच्छे काम के लिए जा रही थीं.
वह कहती हैं, "उनके बड़े मामा जी का कहना था कि उनको लड़की पर बड़ा गर्व है और वह अच्छा काम कर रही है. साथ ही उन्होंने उस समय कहा कि मेरी इच्छा है कि वह जल्दी शादी करके अपना घर बसा ले तो अच्छा होता लेकिन साथ ही उन्होंने उस पर गर्व भी किया."
अंटार्कटिका के बारे में मीना कहती हैं, "हर कोई जानता है कि इस क्षेत्र को सुरक्षित रखने की क्यों आवश्यकता है और जब यहां आप होते हैं तो देखते हैं कि दुनिया में कितनी चीज़ें अनछुई हैं.
वो उस टीम का हिस्सा हैं जो दुनिया के सबसे मुश्किल मौसम में खोज कर रही है. वो नाविक के तौर पर काम करने की तैयारी कर रही हैं. वह वेल्डिंग करना, रस्सियों को जोड़ना और जहाज़ पर टीम के साथ काम करना सीख रही हैं.
वो टीम के साथ गहरे समुद्र पर नाव में भारी कपड़े पहनकर जाती हैं. उनका कहना है कि ये बहुत मुश्किल काम है क्योंकि यहां काफ़ी सर्दी होती है. ये टीम तस्वीरें और सबूत इकट्ठा करती है.
जब वो युवा लड़की थीं तब से उन्हें शादी करने और एक परिवार बनाने के लिए प्रेरित किया जाता रहा है.
मीना कहती हैं, "मुझ पर ये साबित करने का दबाव था कि मैं एक अच्छी भारतीय लड़की हूं. जिसे परिवार के लिए खाना बनाना और सफ़ाई करनी आती हो. इसके अलावा आपका करियर तभी महत्वपूर्ण होता है जब आप डॉक्टर, वकील या अकाउंटेंट होते हैं वरना इसके अलावा कुछ नहीं है और अपने पूरे जीवन भर चपातियां बनाइये."
"फिर मैंने सोचा कि मैं ये नहीं कर सकती हूं क्योंकि और भी बहुत कुछ करने को है."
वह आगे मज़ाकिया अंदाज़ में कहती हैं कि उनकी शादी होने की उम्मीद थी इसलिए वह अंटार्कटिका चली आईं.
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परिजनों ने रंगभेद भी झेला
वह आगे कहती हैं कि वह अपने परिजनों पर दबाव को देख सकती थीं कि उन पर अंग्रेज़ी समुदाय में ख़ुद को शामिल करने की कोशिश की थी.
वह बताती हैं कि उनकी मां की दुकान के बाहर रंगभेदी चिन्ह बना दिए जाते थे और उनके भाई को एक बार पीटा गया और उनके रंग को लेकर लड़कियां बातें किया करती थीं.
मीना ने जहाज़ पर काम करने की ट्रेनिंग ली है और जहाज़ पर रहने वाले बाकी कर्मचारी बताते हैं कि वह बहुत तेज़ी से सीखती हैं.
मीना इस यात्रा को अपने धार्मिक मूल्यों की एक अभिव्यक्ति भी मानती हैं.
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'मेरा काम मेरी पहचान है, ना कि मेरे पति का नाम'
'हिंदू धर्म जीवन पद्धति है'
वह कहती हैं, 'मेरा पूरा परिवार हिंदू है और मेरे परिजनों ने मुझ पर कभी धर्म नहीं थोपा. हिंदू धर्म बाकी लोगों का सम्मान करता है, साथ ही प्रकृति का सम्मान करता है. बीते पांच सालों से मेरे किसी भी परिजन ने यह नहीं कहा कि तुम यह कैसा काम कर रही हो या ख़ुद को ख़तरे में डाल रही हो."
वह कहती हैं, "हिंदू धर्म सत्य और प्रकृति पर आधारित है. यह धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है."
मीना ग्रीनपीस क्लाइंब टीम में भी रही हैं. इसका काम इमारतों, किसी वस्तु या जो भी हो उसको नापना है. उनको इंग्लैंड के एक बंदरगाह पर एक टावर पर चढ़ने पर पहली बार गिरफ़्तार किया गया था. यह विरोध डीज़ल कारों के आयात के फ़ैसले पर किया गया था.
मीना कहती हैं, "गिरफ़्तारी के बाद मुझे लगा था कि मेरे घरवाले कहेंगे कि तुमने हमें शर्मिंदा करने का काम किया है लेकिन मेरे चाचा ने मेरी तारीफ़ की. उन्होंने कहा कि यह अच्छा है और यह हमारी पृष्ठभूमि है जैसा (महात्मा) गांधी ने किया."
उनके पिता की हाल में मृत्यु हुई है. उनकी मां कहती हैं कि वह उनके पिता को याद करती हैं और वह होते तो बेटी पर गर्व करते.
वह कहती हैं कि उनकी इच्छा है कि उनकी बेटी अंटार्कटिका से अपने साथी के साथ लौंटे. फिर वह मज़ाकिया अंदाज़ में कहती हैं कि चाहे वह पेंगुइन ही क्यों न हो.
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