Sex Workers Day: दुनिया का सबसे पुराना पेशा 'वेश्यावृत्ति', भारत में कब हुई इसकी शुरुआत?
Sex Workers Day: दिल्ली में जीबी रोड, कोलकाता का सोनागाछी और मुंबई का कमाठीपुरा। भारत के इन शहरों के ये वो बदनाम इलाके हैं जिनके बारे में खुलकर बात नहीं होती, लेकिन यकीन मानिए ये इतने ज्यादा चर्चा में होते हैं कि मैंने अभी तक ये नहीं बताया येे एरिया किस बात के लिए जानें जाते हैं और आप समझ चुके हैं। हम बात कर रहे हैं वैश्यावृत्ति की, जिसे अक्सर दुनिया का सबसे पुराना पेशा कहा जाता है, इसका इतिहास 2400 ईसा पूर्व पुराना तक बताया जाता है। इसकी जड़ें 4400 साल पहले मेसोपोटामिया के बेबीलोन शहर तक आसानी से मिलती हैं।
सामाजिक बहस और समाज
अपनी ऐतिहासिक जड़ों के बावजूद, यह आज भी सबसे कठोर दंडनीय अपराधों में से एक है। कई जगह यह काम परमीशन के साथ होता है, तो कहीं सरकारों की मौन सहमति रहती है, लेकिन होता जरूर है। वेश्यावृत्ति से जुड़े कानूनी ढांचे में कई तर्क-वितर्क हैं। कुछ इसेे जारी रखने का समर्थन देते हैं तो कुछ इसे देह नोचने वाला व्यापार बताकर इसकी खिलाफत भी करते हैं। इसकी कई परतें और सारी परते एक से ज्यादा एक स्याह हैं। मेल सेक्स वर्कर्स की अगर बात करें तो उनकी जरूरत इसमें कम मालूम पड़ती है, लेकिन महिलाओं की इस पेशे में तारीख बहुत दूर तक मिलती है। कुछ जिंदा रहने के लिए इसमें आती हैं, कुछ मजबूरी के चलते और बाकी जबरन धकेली जाती हैं। आज 2 जून है और सेक्स वर्कर डे भी। शायद इस दिन रखने के पीछे जरूर दो जून की रोटी से इसका संबंध रहा होगा। इसलिए सेक्स वर्कर डे पर हम जानेंगे इस पेशे के वो सभी पहलू जिनकों हमने कभी वो नजरिया देने की जरूरत नहीं समझी जो इसकी वजह बनीं।

भारत में वेश्यावृत्ति का कानून
किसी काम को सेक्स वर्क के रूप में आंकने के कुछ मानदंड भी हैं, जैसे इनमें यौन सेवाओं के लिए पैसे या सामान का आदान-प्रदान, दूसरे किस्म के लेन-देन की व्यवस्था करना, शामिल व्यक्तियों की जिम्मेदारियां और वेश्यालय जैसी जगहों का मालिकाना हक। इनमें से हर एक काम वेश्यावृत्ति की कानूनी परिभाषा में योगदान देता है। भारत में इसके लिए कानून थोड़ा उलझा सा लगता है। जैसे अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956, इसे कानूनी स्वरूप देने की कोशिश करता है। जिसमें वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को कम करने की नीयत से प्रावधान हैं, लेकिन इस पेशे को दंडनीय अपराध नहीं बनाया गया है। 2006 में में एक संशोधन जिक्र होता है, जिसमें ग्राहकों की डिमांड को अपराध से मुक्त करने की मांग की गई थी, जो इसकी सामाजिक स्वीकार्यता की ओर इशारा करता है।
कोर्ट की एक बहस...
बुद्धदेव कर्मस्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के ऐतिहासिक मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यौनकर्मियों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है, संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। इस फैसले के बाद यौनकर्मियों के अधिकारों को मान्यता दी गई और राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया कि वे यौनकर्मियों को इस धंधे से बाहर निकलने में मदद करने के लिए काम करें। साथ ही जबरन वेश्यावृत्ति में धकेले जा रहे लोगों चाहे वो महिला हो या पुरुष उनकी हर संभव मदद की जाए। इसका मतलब, पता सबको सब है, कोशिशें कागजों पर लंबे अरसे से चल रही हैं, लेकिन इस पेशे पर हजारों साल से पूर्ण विराम तो छोड़िए अभी तक कोई कोमा भी नहीं लग सका है, हां पर इसे बातों के बीच डॉट-डॉट-डॉट (...)कर के जरूर बोला जाता है।
भारत में वेश्यावृत्ति का इतिहास
भारत में वेश्यावृत्ति का इतिहास भी कोई कम पुराना नहीं है। भारत में, यह पेशा ब्रिटिश काल, मुगल काल, वैदिक काल और तमाम युगों से गुजरने के साथ 2600 साल का हो चुका है। फिर भी आज, सेक्स वर्क से जुड़ा कानूनी ढांचा बहुत बहस और अनिश्चितता से भरा हुआ है। पर इसकी कहानियां मानव सभ्यता के ताने-बाने से पूरी तरह जुड़ी हैं। मॉर्डन हिस्ट्री की बात करें तो मुंबई का कमाठीपुरा आधुनिक इतिहास का भारत में सबसे पुराना रेडलाइट एरिया है, जिसे 1880 में बसाया गया था। ब्रिटिश राज में इस इलाके को एक ऐसी जगह बनाया गया जहां यूरोपीय सेक्स वर्कर्स आकर ब्रिटिश अफसरों को मनचाही सेवाएं देती थीं. जबकि भारतीय सेक्स वर्कर्स की एंट्री इस इलाके में आजादी के बाद हुई. आज भी कमाठीपुरा देश के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया में से एक है । इसके अलावा लगभग हर बड़े शहर में इस तरह का एक छोटा सा एरिया आपको मिल सकता है।
दुनियाभर में रेड लाइट एरिया
अगर वर्ल्ड लेवल के रेड लाइट एरिया की बात करें तो नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम में सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया माना जाता है, जिसे 'सिन सिटी' यानी पापों का शहर भी कहते हैं। कहा जाता है कि इस शहर को 1270 के आस-पास बसाया गया था और तब से ही इसकी संकरी गलियां अपने अंधेरों में वेश्यावृत्ति के किस्सों के झेलती आई हैं। इसके अलावा थाईलैंड के बैंकोक में बना पटपोंग मार्केट भी दुनिया के सबसे पुराने रेड लाइट एरिया में से एक है। दुनिया भर से यहां भीड़ बनकर पहुंचे लोग यहां ग्राहक के लिबाज में दिख जाते हैं। जहां शोरूम सी दिखने वाली दुकानों के शीशे पर बुत की तरह खड़ी लड़कियों उनके लिए एक वस्तु मात्र होती हैं। इसके दोषी सभी हैं, पुरुष भी- महिलाएं भी, कड़वा है पर यही सच है।
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