गंभीर COVID-19 बेहोशी का कारण बन सकता है, अमेरिका में हुए शोध का दावा

महामारी की शुरुआत में अमेरिका में अस्पताल में भर्ती कोरोना के 150 रोगियों पर एक अध्ययन किया गया था। इन रोगियों में से 73 फीसदी रोगियों में उन्माद (बेहोशी) की स्थिति थी।

नई दिल्ली, 22 सितंबर। महामारी की शुरुआत में अमेरिका में अस्पताल में भर्ती कोरोना के 150 रोगियों पर एक अध्ययन किया गया था। इन रोगियों में से 73 फीसदी रोगियों में उन्माद (बेहोशी) की स्थिति थी। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति भ्रमित, उत्तेजित और स्पष्ट रूप से सोचने में असमर्थ रहता है। बीएमजे नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि प्रमाद (बेहोशी) में रोगी अधिक बीमारियों से ग्रसित होते हैं। उनमें उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी अन्य बीमारियों के साथ अधिक गंभीर कोरोना संबंधी बीमारियां ज्यादा दिखाई देती हैं।

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अध्ययन से जुड़े मिशिगन विश्वविद्यालय के लेखक फिलिप व्लिसाइड्स ने कहा कि कोविड कई अन्य प्रतिकूल परिणामों से भी जुड़ा हुआ है, जो मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखने और उसके देरी से ठीक होने के कारक हैं। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने मार्च और मई 2020 में आईसीयू में भर्ती मरीजों के एक समूह के अस्पताल से छुट्टी के बाद उनके मेडिकल रिकॉर्ड्स और टेलीफोन सर्वेक्षण का उपयोग किया। उन्होंने उन्माद के लक्षण विकसित करने वाले रोगियों के बीच उस सामान्य चीज को तलाशने की कोशिश की जो सभी रोगियों में उन्माद के लिए जिम्मेदार है।

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शोधकर्ताओं ने पाया कि यह रोग (कोरोना) मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी के साथ-साथ रक्त के थक्कों और स्ट्रोक के विकास का कारण बन सकता है, जिसके परिणामस्वरूप इंसान की पहचानने की शक्ति कम हो सकती है। रिसर्चरों ने पाया कि उन्माद से ग्रसित रोगियों में क्रोध की स्थिति बहुत बढ़ गई थी। उन्होंने आगे कहा इस बीमारी के कारण मस्तिष्क में आई सूजन रोगी के भ्रम और घबराहट का कारण हो सकता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि डिस्चार्ज के बाद भी संज्ञानात्मक हानि (पहचानने की शक्ति का कम होना) बनी रह सकती है।


अध्ययन में जो सबसे बड़ी बात निकलकर सामने आई वह ये कि कोरोना की शुरुआत में जब इसका टीका इजाद नहीं हुआ था, उस दौरान रोगियों में बेहोशी की स्थिति ज्यादा थी, लेकिन टीकाकरण किए हुए व्यक्तियों में प्रमाद की स्थिति में सुधार देखा गया। कुल मिलाकर अध्ययन में सामने आया कि टीकाकरण गंभीर बीमारी से बचाने में काफी मददगार है।

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