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खतरनाक लासा वायरस से बच के रहें, वैज्ञानिकों को मिला बड़ा CLUE

गंभीर मामलों में लासा से मृत्यु दर 15 प्रतिशत, गर्भवती महिलाओं में 90 प्रतिशत तक हो सकती है, और बचे हुए लोगों में से एक चौथाई में बहरापन हो सकता है, लासा वायरस से बचाव के लिए कोई टीका या एंटीवायरल नहीं है।

न्यूयॉर्क,23 जुलाई: वायरस का प्रकोप दशकों से दुनिया के देशों में मंडराता रहा है। वायरस के कहर ने लोगों के जीवन पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव डाला है। हालांकि, लोग ऐसे वक्त में काफी मजबूत भी हुए हैं। हम इबोला, कोविड-19, मंकीपॉक्स के खतरनाक वायरस से उत्पन्न महामारी को झेल ही रहे हैं। इबोला के मामले भारत में नहीं के बराबर है। लेकिन कोविड-19 का खतरा अभी भी मंडरा ही रहा है।

लासा वायरस का Clue

लासा वायरस का Clue

अब एक और बीमारी है जो लासा वायरस से उत्पन्र होती है। इसका भी प्रकोप काफी खतरनाक माना जाता है। लासा बुखार इबोला के समान एक तीव्र वायरल रक्तस्रावी बीमारी है, जो लोगों को भोजन या अन्य वस्तुओं के संपर्क में आने से संक्रमित करती है जो संक्रमित चूहों के मूत्र या मल से दूषित हो गए हैं। अब इस वायरस को शिकंजे में लेने की दिशा में एक (scientists got clue to stop lassa virus infection) अभूतपूर्व कार्य हुआ है।

लासा के खिलाफ वैज्ञानिकों को लगी बड़ी सफलता

बता दें कि, लासा वायरस पर वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने एक प्रोटीन की भूमिका की पहचान की है जो लासा बुखार की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लासा बुखार मुख्य रूप से पश्चिम अफ्रीका में देखा गया है। लासा बुखार इबोला के समान एक तीव्र वायरल रक्तस्रावी बीमारी है, जो लोगों को भोजन या अन्य वस्तुओं के संपर्क में आने से संक्रमित करती है जो संक्रमित चूहों के मूत्र या मल से दूषित हो गए हैं।

किसे हो सकता है अधिक खतरा

किसे हो सकता है अधिक खतरा

गंभीर मामलों में इसकी मृत्यु दर 15 प्रतिशत, गर्भवती महिलाओं में 90 प्रतिशत तक हो सकती है, और बचे हुए लोगों में से एक चौथाई में बहरापन हो सकता है, लासा वायरस से बचाव के लिए कोई टीका या एंटीवायरल नहीं है। मरीजों को इस बीमारी से जान बचाने के लिए ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी (एलजेआई) और स्क्रप्सि रिसर्च के वैज्ञानिक यह समझने के लिए काम कर रहे हैं कि लासा वायरस मानव मेजबानों के भीतर कैसे दोहराता है।

बीमारी की कोई एंटीवायरल दवा नहीं

बीमारी की कोई एंटीवायरल दवा नहीं

प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित एक नए अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ता बताते हैं कि कैसे एक महत्वपूर्ण लासा वायरस प्रोटीन, जिसे पोलीमरेज कहा जाता है, इंसान मेजबानों में एक सेलुलर प्रोटीन का उपयोग करके संक्रमण को बढ़ाता है। एक संयुक्त एलजेआई और स्क्रप्सि रिसर्च स्नातक छात्र जिंगरू फैंग बताते हैं कि इस बीमारी की कोई दवा नहीं है जो विशेष रूप से लासा वायरस को लक्षित करती है।

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