वैज्ञानिकों का दावा-'एरोसोलाइज्ड मल' के माध्यम से हवा में फैल सकता है कोरोना वायरस
नई दिल्ली। कोरोना वायरस दुनिया भर में फैलते हुए तबाही मचा रहा है। कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए वैज्ञानिक हर संभव मदद कर रहे हैं। एक्सपर्ट की ओर से लोगों को अब टॉयलेट सीट के ढक्कन को बंद करने की सलाह दी जा रही है। शोधकर्ताओं के समूह ने पाया है कि बग मल पदार्थ से फैल सकता है जो फ्लश के दौरान नीचे बचा रह जाता है। उधर अमेरिका में वैज्ञानिक कोरोना वायरस के संक्रमण की पहचान करने के लिए सीवेज की जांच करेंगे। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ता अब सीवेज की जांच कर यह पता लगाएंगे कि किन क्षेत्रों से सार्स कोव-2 संक्रमित मल सीवेज में आ रहा है।

एरोसोलाइज्ड मल टॉयलेट प्लम के माध्यम से हवा में फैल सकता
वैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि, मल-ओरल ट्रांसमिशन से कोरोना वायरस के कारण होने वाली बीमारी फैल सकती है। एसोसिएशन फॉर प्रोफेशनल्स इन इंफेक्शन कंट्रोल एंड एपिडेमियोलॉजी द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए फोर्ब्स के कहा कि, कोरोना वायरस एयरोसोलाइज्ड मल के माध्यम से भी फैल सकता है। उन्होंने कहा कि, एरोसोलाइज्ड मल टॉयलेट प्लम के माध्यम से हवा में फैल सकता है।

हवा में आने से ऐसे रोका जा सकता है कोरोना को
दरअसल जब टॉललेट को फ्लश किया जाता है तो उस समय पानी प्रेशर के साथ निकलता है। इस दौरान यह संभावना रहती है कि, मल मौजूद कोरोना वायरस हवा में प्रसारित हो सकता है। पर्ड्यू विश्वविद्यालय के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर, डॉ क्विंग्यान चेन ने फोर्ब्स को बताया कि, टॉयलेट प्लम के दौरान बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने का एक मात्र उपाय है कि, फ्लश से पहले टॉयलेट का ढक्कन बंद कर दें। चेन ने बताया कि ढक्कन को बंद करने से 80 प्रतिशत मल कणों को हवा में जाने से रोका जा सकता है।

कोरोना से 2 लाख से अधिक लोगों की मौत
दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से लगातार जूझ रही है। इस वायरस से मरने वालों की संख्या दो लाख को पार कर गई है और 29 लाख 21 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। जबकि आठ लाख 36 हजार से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका में मृतकों की संख्या 54 हजार को पार कर गई है और नौ लाख 60 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।












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