यूक्रेन युद्ध में पुतिन के खेमे में पहुंचे सऊदी अरब- UAE? राष्ट्रपति बाइडेन का नहीं उठा रहे हैं फोन
द गार्डियन अखबार ने वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्राध्यक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से टेलीफोन पर बात करने के लिए समय नहीं दे रहे है।
वॉशिंगटन, मार्च 09: यूक्रेन में चल रही लड़ाई का आज 14वां दिन है और युद्ध के 13वें दिन अमेरिका ने रूस के खिलाफ अपने सबसे बड़े हथियार का प्रयोग करते हुए उसके तेल और गैस पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया है। लेकिन, अमेरिका का ये फैसला उसके ऊपर ही बहुत भारी पड़ सकता है, क्योंकि दो प्रमुख तेल उत्पादक देश सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अमेरिकी राष्ट्रपति का फोन उठाना ही बंद कर दिया है।

अमेरिका से नहीं कर रहे बात
द गार्डियन अखबार ने वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्राध्यक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से टेलीफोन पर बात करने के लिए समय नहीं दे रहे है और इसके पीछे इन दोनों ही देशों को तेल की कीमत में इजाफा होने का डर है। यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए रूस से तेल और गैस खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसकी वजह से तेल की कीमत में ऐतिहासिक स्तर तक इजाफा हो सकता है। रूस ने तेल की कीमत बढ़कर 300 डॉलर प्रति बैरल होने की संभावना जताई है तो स्वतंत्र तेल बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, बहुत जल्द कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल को पार कर जाएगा, लिहाजा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तेल संगठन ओपेक के दो सबसे महत्वपूर्ण सदस्य सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से बात करना चाहते हैं, लेकिन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष जो बाइडेन ने टेलीफोन पर बात करने का समय नहीं दे रहे हैं।

अमेरिकी अखबार का बड़ा दावा
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मिडिल ईस्ट और अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए रिपोर्ट पल्बिश की है, कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और संयुक्त अरब अमीरात के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, दोनों अमेरिकी अनुरोध के बाद भी चर्चा के लिए राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। सऊदी प्रिंस मोहम्मद और बाइडेन के बीच बात करने को लेकर एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि, "एक फोन कॉल की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह [सऊदी तेल के] स्पिगोट को चालू करने का हिस्सा था।"

तेल उत्पादन बढ़ाने से इनकार
आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते, ओपेक+, जिसमें रूस भी शामिल है, उसने पश्चिमी देशों के आग्रह के बावजूद तेल उत्पादन बढ़ाने से इनकार कर दिया था। लेकिन, अमेरिकी प्रशासन तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए सऊदी अरब और यूएई पर लगातार प्रेशर बढ़ाने की कोशिश में है, ताकि सऊदी अरब और यूएई से और तेल खरीदा जा सके। लेकिन, रूस पहले ही सऊदी अरब को धमकी दे चुका है, लिहाजा सऊदी अरब तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने के मूड में नहीं है। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है, जो पिछले 14 सालों में अपने उच्चतम स्तर पर है। वहीं, एक्सपर्ट्स की माने तो, जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका और खाड़ी देशों के संबंध ठंडे पड़ गये हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप के शासन में सऊदी अरब और अमेरिका के संबंध ऐतिहासिक स्तर पर मजबूत होने लगे थे। लेकिन, बाइडेन ने राष्ट्रपति बनने के बाद सऊजी क्राउन प्रिंस सलमान से बात करने से इनकार कर दिया था।

खाड़ी देशों से ठंडे पड़े संबंध
खाड़ी देशों से अमेरिका के ठंडे पड़ रहे संबंध की वजह ईरान के साथ न्यूक्लियर समझौते की तरफ अमेरिका का फिर से लौटना और यमन में चल रहे गृहयुद्ध में सऊदी अरब को मिल रहे अमेरिकी सहयोग में कमी मुख्य वजहे हैं। वहीं, हूती विद्रोहियों ने पिछले महीने यूएई में मिसाइल हमले भी किए हैं। जबकि, जमाल खशोही मर्डर को लेकर अमेरिका ने सीधे तौर पर सऊदी क्राउन प्रिंस को जिम्मेदार ठहराया है और उस सीक्रेट रिपोर्ट को पब्लिश कर दिया है, जिसे सार्वजनिक करने से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इनकार कर दिया था। वहीं, जो बाइडेन ने चुनाव प्रचार के दौरान यहां तक कहा था, कि ''सऊदी अरब में वर्तमान सरकार में बहुत कम सामाजिक मुक्ति मूल्य है।"

बाइडेन का रियाद जाने का प्लान नहीं
पिछले हफ्ते व्हाइट हाइस की प्रवक्ता जेन साकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि, राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रिंस मोहम्मद के जल्द ही बात करने की कोई योजना नहीं है, और राष्ट्रपति बाइडेन के रियाद की यात्रा करने की कोई योजना नहीं है। वहीं, अमेरिका में यूएई के राजदूत यूसेफ अल ओतैबा ने, दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की पुष्टि की है। अल ओतैबा ने भविष्यवाणी की थी, कि "आज, हम एक तनाव भरे वातावरण से गुजर रहे हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि हम इससे बाहर निकलेंगे और बेहतर जगह पर पहुंचेंगे।" वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, दोनों खाड़ी देशों को तेल की कीमतों में उछाल को कम करने के लिए तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने का एकमात्र वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में माना जाता है।

रूस ने सऊदी अरब को दी थी चेतावनी
आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते आई एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन 'के वास्तविक' नेता सऊदी अरब ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए और अधिक तेल उत्पादन करने के अमेरिकी अनुरोध को खारिज कर दिया है। यूक्रेन युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया था कि, सउदी अरब और अन्य लोगों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता का उद्देश्य एक-दूसरे के कार्यों में समन्वय करना और समझना था और रूस ने कहा है कि, सऊदी अरब वैश्विक ऊर्जा के मुद्दों का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए।

प्रिंस सलमान ने की पुतिन से बात
पिछले हफ्ते रूसी राष्ट्रपति पुतिन-प्रिंस सलमान में बातचीत रूसी समाचार एजेंसी TASS ने रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें क्रेमलिन की तरफ से कहा गया था कि, "कई पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए रूस-विरोधी प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं करने को कहा है।" आपको बता दें कि, कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए ओपेक प्लस नाम का एक संगठन है, जिसमें सऊदी अरब और रूस प्रमुख देश हैं, हालांकि, ओपेक के फैसलों पर सऊदी अरब का प्रभाव काफी ज्यादा रहता है, लिहाजा अमेरिका किसी भी तरह से सऊदी अरब पर प्रेशर बनाने की कोशिश में लगा हुआ है और अगर सऊदी अरब तेल का प्रोडक्शन नहीं बढ़ाता है, तो फिर अमेरिका और ब्रिटेन बहुत बुरी तरह से फंस जाएंगे और उन्हें रूस के खिलाफ लगाए गये तेल प्रतिबंधों को वापस लेने पर मजबूर होना पड़ेगा।












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