तालिबान सरकार को मान्यता देगा या नहीं? सऊदी अरब ने अफगानिस्तान मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी
सऊदी अरब ने पहली बार तालिबान की सरकार और अफगानिस्तान के लोगों पर बयान दिया है।
रियाद, सितंबर 10: अफगानिस्तान पर ताबिलान के कब्जे के बाद पहली बार सऊदी अरब की तरफ से अफगान संकट पर बयान आया है। अब तक अफगानिस्तान को लेकर पूरी तरह से चुप रहे सऊदी अरब ने कहा है कि देश को तालिबान की सरकार से उम्मीद है कि तालिबान की सरकार एक ऐसे शासन की स्थापना करेगी, जो देश को शांति और स्थिरता की तरफ ले जाए।

तालिबान पर बोला सऊदी अरब
अफगानिस्तान में 15 अगस्त को तालिबान के कब्जे के बाद सऊदी अरब ने पुरी तरह से चुप्पी साध रखी थी और ये बिल्कुल अस्पष्ट था कि तालिबान ने बंदूक के दम पर जिस तरह से सरकार का निर्माण किया है, उसपर उनकी क्या राय है। लेकिन, अब सऊदी अरब ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि तालिबान की सरकार युद्धग्रस्त देश में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए काम करेगी। सऊदी अरब ने इसके साथ ही अफगानिस्तान को लेकर कहा कि देश में 'विदेशी हस्तक्षेप' बिल्कुल बंद होनी चाहिए और अफगानिस्तान के आम लोगों की राय लेकर ही अफगानिस्तान के भविष्य का फैसला करना चाहिए। सऊदी अरब ने कहा कि अफगानिस्तान में आम लोगों के द्वारा किए गये विकल्पों का सऊदी अरब समर्थन करेगा और वो चाहता है कि अफगानिस्तान में आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथी ताकतों पर काबू पाया जाए।
मान्यता देने पर चुप रहा सऊदी अरब
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने हालांकि इसका बिल्कुल जिक्र नहीं किया कि तालिबान के शासन को मान्यता देने को लेकर सरकार क्या सोच रही है। सऊदी की राजधानी रियाद में एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि सऊदी अरब को उम्मीद है कि अफगानिस्तान में अंतरिम सरकार का गठन ''सुरक्षा और स्थिरता प्राप्त करने के लिए सही दिशा में उठाया गया एक सही कदम होगा, जिससे देश में हिंसा, उग्रवाद को खत्म किया जा सके और अफगानिस्तान के लोगों की आकांक्षाओं के मुताबिक उनके लिए उज्जवल भविष्य के लिए काम हो सके''।

अफगानिस्तान के लोगों का समर्थन
सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने कहा कि, सऊदी अरब, अफगानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करता है और इस 'कठिन समय' से अफगानिस्तान के लोगों की मदद करने का वचन देता है। इसके साथ ही सऊदी विदेश मंत्री ने पिछले महीने काबुल एयरपोर्ट पर बम धमाके में मारे गये लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना भी जताई है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने कहा कि, अफगान लोगों को बिना किसी 'बाहरी हस्तक्षेप' के अपने देश के लिए भविष्य के विकल्प चुनने में सक्षम होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ अफगानिस्तान की सभी पार्टियों को एक साथ आना चाहिए और अफगानिस्तान के लोगों की शांति और सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए।

तालिबान पर सऊदी ने नहीं खोले पत्ते
आपको बता दें कि 1996 में जब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनी थी, उस वक्त जिन तीन बड़े देशों ने तालिबान की सरकार को मान्यता दिया था, उनमें एक देश सऊदी अरब भी था। सऊदी अरब के साथ साथ पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी तलिबानी शासन को मान्यता दी थी। लेकिन, सऊदी अरब से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार सऊदी अरब तालिबान की शासन को जल्दबाजी में मान्यता नहीं देना चाहता है और वो वैश्विक समुदाय का रूख तालिबान को लेकर देख रहा है। सऊदी अरब के प्रिंस सलमान ने देश में कट्टरपंथी विचारधारा को खत्म करने के लिए 'मिशन 2030' चलाया हुआ है, जिसमें उन्होंने सऊदी अरब की शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक परिवर्तन कर दिए हैं और पाठ्यक्रम में अलग अलग धर्मों के बारे में भी पढ़ाया जा रहा है, जिसमें गीता और रामायण की शिक्षा भी शामिल है। सऊदी में इंग्लिश सीखना अनिवार्य कर दिया गया है, वहीं अलग अलग लेवल पर छात्रों को अलग अलग देशों की संस्कृति के बारे में सिखाया जा रहा है।

मस्जिदों पर सऊदी में ''नकेल''
सऊदी सरकार ने पिछले दिनों कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिसकी वजह से मस्जिदों से उनका विरोध किया गया। उन्होंने सऊदी अरब में नमाज के दौरान लाउडस्पीकर बजाने पर पाबंदी लगा दी और कहा कि नमाज के दौरान 'शोर' मचाना सही नहीं है। इसके साथ ही सऊदी अरब में मस्जिदों से की जाने वाली 'ऐलान' पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं रमजान के महीनों में पहले दिन में दुकाने बंद रहती थीं, जिसे अब दिनभर खोलने की इजाजत दी जा चुकी है। वहीं, पहले सऊदी अरब में रोजा नहीं रखने पर देश की पुलिस कार्रवाई करती थी, लेकिन अब सऊदी अरब में रोजा रखना अनिवार्य नहीं है। सऊदी सरकार ने कहा है कि वो एक ऐसे देश का निर्माण करना चाहती है, जहां धार्मिक कट्टरपंथ नहीं हो और देश के मुसलमान अपनी धार्मिक दकियानुसी से उपर उठते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल हों। लिहाजा इस बार सऊदी अरब ने अपने बयान में कई बार अफगानिस्तान के लोगों का और उग्रवाद का जिक्र किया है, ऐसे में माना जा रहा है कि तालिबान के लिए इस बार सऊदी अरब अपना दरवाजा इतनी आसानी से नहीं खोलेगा।












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