BRICS का हिस्सा अभी नहीं बना सऊदी अरब, बार-बार क्यों दे रहा गच्चा? पलटी मारने की वजह जानिए

BRICS News: कल गुरुवार को ये खबर आई थी कि मुस्लिम देश सऊदी अरब ब्रिक्स का हिस्सा बन गया है। दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री नलेदी पंडोर ने बुधवार को कहा था कि सऊदी अरब BRICS का हिस्सा बन गया है लेकिन इस बीच खबर आ रही है कि सऊदी अरब ने अभी तक ब्रिक्स में शामिल होने के निमंत्रण का जवाब नहीं दिया है।

एक सऊदी आधिकारिक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि पिछले साल शामिल होने के लिए कहे जाने के बाद सऊदी अरब अभी भी ब्रिक्स देशों के समूह का सदस्य बनने के निमंत्रण पर विचार कर रहा है। सऊदी आधिकारिक सूत्र ने रॉयटर्स को एक बयान में कहा कि "सऊदी अरब ने अभी तक ब्रिक्स में शामिल होने के निमंत्रण का जवाब नहीं दिया है। यह अभी भी विचाराधीन है।"

Saudi Arabia Not Joined BRICS

US Election: ट्रंप-बाइडेन दोनों से नाराज हैं वोटर, क्या अमेरिका को इस बार पहला स्वतंत्र राष्ट्रपति मिलेगा?
ब्रिक्स दुनियाभर की विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक वैश्विक मंच है। कुल पांच देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका इसके सदस्य देश हैं। इसी साल से इसमें कुछ नए सदस्य भी जोड़े गए हैं। यूएई, इजिप्ट, ईरान और इथियोपिया BRICS का हिस्सा बन चुके हैं लेकिन, सऊदी अरब को लेकर अभी भी दुविधा की स्थिति बनी हुई है।

ब्रिक्स ने पिछले साल अगस्त में सऊदी अरब, यूएई, इजिप्ट, ईरान, अर्जेंटीना और इथियोपिया को 1 जनवरी से इस वैश्विक मंच के साथ जुड़ने के लिए इनविटेशन भेजा था। हालांकि इसके बाद अर्जेंटीना में सत्ता परिवर्तन हो गया। पूंजीवाद के समर्थक नेता और चीन विरोधी जेवियर मिलेई अर्जेंटीना के नए राष्ट्रपति बने। जेवियर मिलेई ने ब्रिक्स का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।

सऊदी अरब के अर्थव्यवस्था मंत्री फैसल अलीब्राहिम ने पिछले महीने की शुरुआत में कहा था कि सऊदी अरब अभी भी इस मामले पर गौर कर रहा है। दरअसल सऊदी अरब इस चिंता में है कि चीन, रूस और अमेरिका के बीच जो जियो-पोलिटीकल टेंशन यानी भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति है, उसमें क्या रूख लिया जाए।

BRICS ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से बना है और इसे G-7 (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) के प्रतिकार के रूप में देखा जाता है।

दरअसल अभी भी सऊदी अरब नुकसान-लाभ का आकलन कर रहा है और फिर निर्णय लेगा कि वह ब्रिक्स का हिस्सा बने या नहीं। सऊदी के इस ग्रुप में जुड़ने से ब्रिक्स को आर्थिक मजबूती मिलेगी। यह ग्लोबल साउथ का चैंपियन बनने की अपनी घोषित महत्वाकांक्षा को भी बढ़ा सकता है जिससे विश्व व्यवस्था में फेरबदल करने में मदद मिलेगी।

हालांकि पश्चिम एशिया में हमास-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति बदल चुकी है। अभी यदि सऊदी अरब ब्रिक्स का मेंबर बनता है तो इससे ये संदेश जाएगा कि उसका अमेरिका पर से भरोसा कम हो गया है। और इसे अमेरिकी सहयोगियों का अमेरिका पर से मोहभंग माना जाएगा।

ईरान अब ब्रिक्स का हिस्सा बन चुका है, अमेरिका-सऊदी अरब का कट्टर दुश्मन है। सऊदी का इस ग्रुप का हिस्सा बनना उसे खुद अलग-थलग कर देगा। ब्रिक्स जैसे असैन्य संगठन का हिस्सा बनकर भी वे वो ताकत हासिल नहीं कर पाएगा जो उसे अमेरिका के करीब रहकर मिलती है।

सऊदी अरब यदि ब्रिक्स का हिस्सा बनता है तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका होगा। वहीं सऊदी का पड़ोसी और गल्फ कॉपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी के सदस्य देश यूएई ने कहा है कि उसने ब्रिक्स को जॉइन कर लिया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+