US Election: ट्रंप-बाइडेन दोनों से नाराज हैं वोटर, क्या अमेरिका को इस बार पहला स्वतंत्र राष्ट्रपति मिलेगा?
US Election 2024: अमेरिका में इस साल 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होना है। जनवरी का महीना बीत चुका है और इस बात की संभावना बन रही है कि राष्ट्रपति पद के लिए आखिरी जंग जो बाइडेन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हो सकती है।
अमेरिका के सभी सात स्विंग राज्यों में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप राष्ट्रपति बाइडेन से बहुत बड़े मार्जिन से आगे चल रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी में उनके सामने सिर्फ निक्की हेली बच गई हैं। हालांकि वो पूर्व राष्ट्रपति को बहुत अधिक चुनौती देती हुई नहीं दिखाई दे रहीं। ऐसे में ट्रंप का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है।

इस बीच बॉबी कैनेडी जूनियर एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वे अगर अंत तक जमे रहते हैं, तो डेमोक्रेटिक पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर कैनेडी जूनियर आगे भी इस लड़ाई में रहते हैं तो हमें अमेरिका में इस शरद ऋतु में तीन-तरफा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें कि, हम अमेरिकी चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरीज चला रहे हैं। इसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण और दिलचस्प जानकारियां आपसे शेयर कर रहे हैं। आज इस सीरीज का ग्यारहवां भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरीज आपको काफी पसंद आ रही होगी।
पिछली सीरीज में हमने आपको उन अहम राज्यों के बारे में बताया था जो साल 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति कौन होगा ये तय करेंगे। वहीं इस नई सीरीज में हम आपको अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में तीसरे पक्ष के बारे में बताने जा रहे हैं। इसमें हम जानेंगे कि क्या अमेरिका कभी भी दो-पक्षीय बाइनरी को तोड़ सकता है? हम इस पर भी चर्चा करेंगे कि क्या कैनेडी जूनियर, 32 साल पहले हुए चुनाव में रॉस पेरोट की सफलता को दोहरा पाएंगे?

यूं तो अमेरिकी चुनाव में दो पार्टियों रिपब्ल्किन और डेमोक्रेटिक पार्टियों का वर्चस्व होता है और ऐसा कभी नहीं हुआ जब किसी तीसरी पार्टी या किसी स्वतंत्र उम्मीदवार ने राष्ट्रपति चुनाव जीता हो। पूरे अमेरिकी इतिहास में, यहां तक कि तीसरे पक्ष के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति पद के दावेदारों ने भी कुछ सुर्खियां बटोरने और एक प्रमुख पार्टी से दूसरे के लाभ के लिए वोट छीनने के अलावा कुछ हासिल नहीं किया।
लेकिन फिर भी, हर चार साल में राजनीति से जुड़े लोग खुद को तीसरे पक्ष/स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में आगे रखते हैं। हालांकि उन्हें मिलने वाले वोटों का प्रतिशत भले कम हो मगर बड़ी संख्या में अमेरिकी उन्हें वोट देते हैं। कई लोगों का तो ये भी कहना है कि वे भी तीसरे पक्ष/स्वतंत्र उम्मीदवारों को वोट देंगे, अगर इन उम्मीदवारों में से किसी के जीतने की कोई वास्तविक संभावना हो।
अमेरिका में दो-दलीय प्रणाली लगभग उतनी ही प्राचीन है जितनी कि यह देश पुराना है। 200 से अधिक वर्षों से, हर एक अमेरिकी राष्ट्रपति अपने चुनाव के समय देश के दो प्रमुख राजनीतिक समूहों में से एक से संबंधित था। या तो वो फेडरलिस्ट या डेमोक्रेटिक रिपब्लिकन। अब्राहम लिंकन के समय से काफी पहले ही डेमोक्रेट और रिपब्लिकन का दौर शुरू हो गया।
(पहले डेमोक्रेट और रिपब्लिकन एक ही पार्टी थी। 1824 में डेमोक्रेटिक से टूटकर रिपब्लिकन पार्टी बनी थी)
इसके बाद से अमेरिकी राजनीति में दो-पक्षीय बाइनरी इतनी चर्चित हो गई कि ये कहा जाने लगा कि अमेरिकी मतदाता किसी अंतरिक्ष से आए एलियन को वोट दे देंगे मगर वो किसी तीसरे पक्ष को वोट देकर अपना मत बर्बाद नहीं करेंगे।
पहली बार तीसरे पक्ष से मिली वास्तविक चुनौती
हालांकि पहली बार साल 1992 में ऐसा वक्त आया था जब लगने लगा था कि अमेरिका में कोई तीसरे पक्ष का नेता भी राष्ट्रपति बन सकता है। 1992 का मुकाबला रिपब्लिकन जॉर्ज बुश सीनियर बनाम डेमोक्रेट बिल क्लिंटन के बीच होने जा रहा था। ये एक ऐसा मुकाबला था जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए दोनों प्रमुख दलों के विकल्पों से असंतुष्ट थे।
जॉर्ज बुश ने सोवियत संघ के विघटन और खाड़ी युद्ध में हस्तक्षेप के साथ विदेश नीति में बड़ी सफलताएँ हासिल की थीं लेकिन उन्हें बस विदेशी मामलों को प्राथमिकता देने वाले नेता के रूप में देखा गया। ऐसा माना गया कि वे देश की आंतरिक समस्याओं को दूर करने में विफल रहे हैं। वहीं बिल क्लिंटन खुद भ्रष्टाचार और सेक्स स्कैंडल से जुड़े आरोपों से परेशान चल रहे थे।
ऐसे में टेक्सास की जनता में एक अरबपति व्यवसायी रॉस पेरोट में उम्मीद दिखने लगी। पेरोट के समर्थकों ने उनसे अपील की कि वे चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज करें। शुरू में इनकार जताने के बाद पेरोट ने कहा कि, यदि अमेरिकी लोगों ने उन्हें सभी 50 राज्यों में मतपत्र प्राप्त करने में मदद की, तो वह चुनाव लड़ेंगे।

उनका इनकार से भरा ये जवाब यह एक तरह से वायरल हो गया... उनके पक्ष में माहौल बनाने वाले वॉलंटियर्स और दान की बाढ़ आ गई। वो मीडिया के दुलारे तो थे ही... जल्द ही सर्वेक्षणों में उन्हें तीन-तरफा दौड़ में महत्वपूर्ण समर्थन मिलने लगा। पेरोट ने भ्रष्टाचार और शासन की विफलताओं की निंदा करते हुए दोनों पार्टियों की निंदा की। उनके पक्ष में ये था कि वे संभ्रांतवादी या विशिष्ट राजनेता की तरह बात नहीं करते थे।
जून 1992 तक ऐसा लगने लगा कि पेरोट जीत रहे हैं। उन्हें सर्वेक्षण में 37 फीसदी मत मिल रहा था। जबकि बुश के लिए 24 प्रतिशत और क्लिंटन के लिए यह 24 प्रतिशत था। उनका ये प्रदर्शन देख अमेरिका में खलबली मच गई। नेता से लेकर मीडिया तक उनके प्रदर्शन को लेकर हैरान हो गए।
अर्श से फर्श पर पहुंचे पेरोट
ठीक यही से उनका बुरा वक्त शुरू हो गया। मीडिया अब उनका इतिहास खंगाल रही थी। पेरोट के चरित्र पर लांछन लगाया जाना शुरू हुआ। उन्हें अश्वेतों संग भेदभाव करने वाला और एक उभरता हुआ फासीवादी बताया गया। सर्वेक्षण में एक महीने पहले नंबर पर रहने वाले पेरोट जुलाई में आखिरी नंबर पर आ गए। इससे घबराकर पेरोट ने चुनावी दौर छोड़ दी।
हालांकि चुनाव से एक महीने पहले अक्टूबर में वे फिर से वापस लौटे लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया। उन्हें चुनाव में 19 फीसदी जनता का समर्थन मिला। यद्यपि वह 1996 में फिर से राष्ट्रपति पद के लिए दौड़े, लेकिन वह अपने मजबूत प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके। उस समय उन्हें 8.4 प्रतिशत वोट मिले।
रॉबर्ट कैनेडी जूनियर स्वतंत्र उम्मीदवार
हालांकि जो कारनामा पेरोट ने दिखाया उसे आजतक कोई भी दोहरा नहीं पाया है। इस साल अमेरिका में एक और स्वतंत्र उम्मीदवार है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वे पेरोट का कारनामा दोहरा सकते हैं। रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर। पेरोट की तरह, कैनेडी दोनों पार्टियों से निराश मतदाताओं के लिए एक विकल्प साबित हो सकते हैं।

69 वर्षीय कैनेडी अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध राजनीतिक राजवंश के वंशज हैं। वे अमेरिका के बेहत चर्चित राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे हैं।
हाल के महीनों में, कैनेडी को एक विकल्प के रूप में पेश करने वाले सर्वेक्षणों ने उन्हें ट्रम्प और बाइडेन के साथ तीन-तरफा दौड़ में 12 से 22 प्रतिशत के बीच दिखाया है। कुछ विश्लेषक इसे अतिशियोक्ति कह रहे हैं। हालांकि जिस तरह बाइडेन का प्रदर्शन है ये बहुत आश्चर्यजनक भी नहीं लगता।
क्या रिकॉर्ड बना पाएंगे कैनेडी?
सर्वेक्षणों के मुताबिक 70 प्रतिशत अमेरिकी विकल्प के रूप में ट्रंप या बाइडेन में से किसी से भी संतुष्ट नहीं हैं। कैनेडी के पास अधिक समर्थन हासिल करने और वाशिंगटन के बाद पहले स्वतंत्र राष्ट्रपति बनने का एक वास्तविक अवसर है। हालांकि स्वतंत्र उम्मीदवारों में कॉर्नेल वेस्ट और ग्रीन पार्टी की जिल स्टीन भी मैदान में हैं मगर वे कितने असरदार हो सकते हैं...इसकी चर्चा हम किसी और सीरिज में करेंगे।
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