World News Hindi: आखिर सऊदी अरब ने क्यों दी 2 पाकिस्तानियों को मौत की सजा? क्या है पूरा मामला
Pakistanis executed in Saudi Arabia: पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मजबूत होती कूटनीतिक दोस्ती के बीच एक विरोधाभासी तस्वीर सामने आई है। जहां एक तरफ सऊदी अरब ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को अपने सर्वोच्च सम्मान 'किंग अब्दुलअजीज मेडल' से नवाजा है, वहीं दूसरी तरफ उसी देश में दो पाकिस्तानी नागरिकों को फांसी पर लटका दिया गया है।
साल 2025 सऊदी अरब में मृत्युदंड के लिहाज से सबसे 'खूनी साल' साबित हो रहा है, जहां फांसी का आंकड़ा 347 तक पहुंच गया है। मानवाधिकार संगठन इन सजाओं को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं।

ड्रग्स तस्करी का आरोप में सजा-ए-मौत
सऊदी अरब में जिन दो पाकिस्तानियों को फांसी दी गई है, उन्हें नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी और उन्हें अपने पास रखने का दोषी पाया गया था। सऊदी अदालतों ने ड्रग्स के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यह सख्त फैसला सुनाया। हालांकि, फांसी पाने वाले इन दोनों पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान और उनके नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। रीप्राइव संगठन के अनुसार, सऊदी अरब में इस साल दी गई कुल सजाओं में से दो-तिहाई मामले ड्रग्स से ही जुड़े हैं।
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सेना प्रमुख को सम्मान और नागरिकों को फांसी
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि एक ओर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को रियाद में किंग सलमान के आदेश पर 'फर्स्ट क्लास' मेडल दिया गया, जो दोनों देशों के बढ़ते सैन्य और रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है। लेकिन इसी दौरान अपने ही नागरिकों को दी गई फांसी पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक असहजता पैदा करती है। यह दिखाता है कि सऊदी अरब अपनी सुरक्षा और कानूनों के मामले में दोस्ती और न्याय प्रणाली को बिल्कुल अलग रखता है।
Saudi Arabia execution 2025: सऊदी का सबसे 'खूनी साल'
ब्रिटेन स्थित संगठन रीप्राइव की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सऊदी अरब में मृत्युदंड का रिकॉर्ड टूट गया है। पिछले साल के 345 के मुकाबले इस साल अब तक 347 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। इसमें चिंताजनक बात यह है कि सजा पाने वालों में आधे से अधिक विदेशी नागरिक हैं। फांसी देने के तरीकों में आमतौर पर सिर काटना या फायरिंग स्क्वॉड का इस्तेमाल किया जाता है, और परिवारों को शव सौंपने या दफनाने की जगह तक नहीं बताई जाती।
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अंतरराष्ट्रीय मानदंडों पर उठते सवाल
संयुक्त राष्ट्र और ह्यूमन राइट्स वॉच ने सऊदी अरब में बड़े पैमाने पर दी जा रही फांसी की सजाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अपराध जिनमें किसी की जान नहीं गई (जैसे ड्रग्स तस्करी), उनमें मौत की सजा देना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के खिलाफ है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि चीन और ईरान के बाद सऊदी अरब दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ सबसे ज्यादा मृत्युदंड दिया जाता है, जो चिंता का विषय है।
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