अमेरिका को एक बार फिर झटका देगा सऊदी अरब, ईरान के बाद अब सीरिया संग करने जा रहा दोस्ती
Saudi Arab-Syria Friendship: अगर सऊदी अरब, सीरिया संग डिप्लोमैटिक रिलेशन बहाल करेगा तो यह अमेरिका के लिए लगातार दूसरा बड़ा झटका होगा। इससे पहले ईरान और सऊदी ने आपसी संबंध बहाल करने का फैसला किया था।

Image: Oneindia
कभी अरब जगत का दुलारा रहा सीरिया एक बार फिर से इस सियासत का हिस्सा बनने जा रहा है। 2011 में देश में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद सीरिया के संबंध सऊदी अरब से खराब हो गए थे। लेकिन इस बीच खबर आ रही है कि ईरान संग संबंध बेहतर करने के बाद अब सऊदी अरब अपने कट्टर दुश्मन सीरिया संग दोस्ती करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब सऊदी अरब सीरिया के साथ 11 साल से बंद कूटनीतिक संबंध को फिर से बहाल करने के लिए वार्ता कर रहा है।
दोनों देश खोलेंगे दूतावास
रॉयटर्स की रिपोर्ट ये फैसला सउदी अरब और एक सीरियन इंटेलीजेंस ऑफिसर के बीच कई दौर की बातचीत के बाद लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक सीरिया और सऊदी अरब दोनों ने ही एक दूसरे देशों में फिर से दूतावास को खोलने पर सहमति जताई है। इसकी शुरुआत ईद के बाद अप्रैल दूसरे सप्ताह में होगी। अगर ऐसा होता है तो एक बार फिर से सीरिया 22 अरब देशों के ग्रुप यानी अरब लीग का हिस्सा बन सकता है।
अमेरिका को लगेगा झटका
आपको बता दें कि फैसला अचानक नहीं हुआ है। सऊदी अरब कुछ समय से सीरिया के साथ मेल-मिलाप का संकेत दे रहा है। पिछले चार-पांच साल से सीरिया को लेकर अरब देशों के नजरिए में बदलाव देखा जा रहा है। सीरिया और सऊदी अरब के रिश्ते कायम होने की खबर से एक बार फिर से अमेरिका को झटका लगता दिख रहा है। साल 2011 में कई अरब देशों की तरह सीरिया में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे जिसे असद सरकार ने बर्बरतापूर्वक दबा दिया था। इसमें करीब एक करोड़ से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे। इसे वर्ल्ड वॉर के बाद सबसे बड़ा मानवीय संघर्ष माना जाता है। इसके बाद तुर्की और अरब देशों ने उनसे संबंध तोड़ लिया था।
अमेरिका की चाहत क्या है?
इतना ही नहीं अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने सीरिया पर कई प्रकार के प्रतिबंध लाद दिए। दरअसल अमेरिका चाहता है कि सीरिया गोलान हाइट्स से अपनी दावेदारी छोड़ दे। आपको बता दें कि गोलान हाइट्स दक्षिणी-पश्चिमी सीरिया में स्थित एक पहाड़ी इलाका है। इस पर इजरायल ने कब्जा कर रखा है। ये इलाका राजनीतिक और रणनीतिक रूप से खासा अहम है। इसके अलाव अमेरिका ये भी चाहता है कि सीरिया लेबनान में हिजबुल्लाह को समर्थन ना करे और ईरान सीरिया और रूस संग संबंध तोड़ डाले।












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