नए शोध में बड़ा खुलासा, मंगल ग्रह की सतह पर हैं नमक से भरे हुए गड्ढे, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

लंदन। मंगल ग्रह को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बड़ा खुलासा किया है, उनके मुताबिक मंगल ग्रह की पूरी सतह साल्टी यानी कि नमकीन गढ्ढों से ढकी हुई है, हालांकि, इन गढ्ढों का तापमान इतना कम है कि मानव जीवन संभव नहीं है, यूनिवर्सिटीज स्पेस रिसर्च एसोसिएशन के वैज्ञानिकों के शोध के मुताबिक मंगल ग्रह की 40 फीसदी तक की मिट्टी पर एक विशेष तरह का नमक पाया जाता है, जो कि रात में वायुमंडल से जलवाष्प को खींच सकता है, जिससे कि जलवाष्प बर्फ बनने से बच सकता है।

मंगल ग्रह पर होता है खारे पानी का निर्माण

मंगल ग्रह पर होता है खारे पानी का निर्माण

दरअसल अमेरिका में प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में दावा किया था कि मंगल ग्रह की सतह पर वर्ष में एक बार कुछ दिनों के लिए खारे पानी का निर्माण होता है लेकिन बर्फ अपने पिघलने के बिंदु तक पहुंचने से बहुत पहले वातावरण में फैलकर विलुप्त हो जाती है इसलिए स्पेस रिसर्च एसोसिएशन के शोधकर्ताओं ने एक कंप्यूटर मॉडल भी विकसित किया है जो कि तापमान और जलवायु परिस्थितियों के बारे में अध्ययन करके पता लगाएंगे कि किस बिंदु पर जलवाष्प को तरल बनने से रोका जाए।

जानिए मंगल ग्रह के बारे में ये खास बातें

जानिए मंगल ग्रह के बारे में ये खास बातें

  • सौर मंडल में मंगल सूरज से 14.2 करोड़ मील की दूरी पर है।
  • सौर मंडल में धरती तीसरे नंबर पर और चौथे नंबर पर मंगल है।
  • धरती सूरज से 9.3 करोड़ मील की दूरी पर है।
  • धरती की तुलना में मंगल ग्रह इसका आधा है।
  • मंगल पर सोलर डे 24 घंटे 37 मिनट का होता है।
  • मंगल का व्यास 4,220 मील है।
मंगल सूरज का पूरा चक्कर 687 दिनों में लगाता है

मंगल सूरज का पूरा चक्कर 687 दिनों में लगाता है

  • धरती और मंगल पर गुरुत्वाकर्षण शक्ति अलग होने के कारण धरती पर 100 पाउंड वजन वाला व्यक्ति मंगल पर 38 पाउंड वजन का हो जाएगा।
  • मंगल सूरज का पूरा चक्कर 687 दिनों में लगाता है।
  • धरती की तुलना में मंगल सूरज का चक्कर लगाने में दोगुना वक्त लेता है और यहां एक साल 687 दिनों का होता है।
 ज्योतिष की नजर में मंगल क्रूर ग्रह

ज्योतिष की नजर में मंगल क्रूर ग्रह

जबकि भारतीय ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार सौरमंडल के नवग्रहों में मंगल एक क्रूर ग्रह है। मंगल सीधा और सच्चा चलने वाला ग्रह है, यह एक पुरूष ग्रह और इसका रंग रक्तिम है और दक्षिण दिशा का यह स्वामी है। पित्त प्रकृति का यह ग्रह अग्नि तत्व प्रधान है। यह धैर्य, साहस और वीरत्व गुणों का स्वामी, भाई का कारक और रक्त शक्ति वाला ग्रह है। यह अनैतिक प्रेम का प्रतिनिधित्व भी करता है, इस ग्रह की प्रमुख विशेषता यह है कि यह ग्रह मध्यम नहीं रह सकता। इसकी अशुभता एवं शुभता उच्चकोटि की होती है।

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