‘सलमान रुश्दी अब जिंदा लाश से ज्यादा कुछ नहीं’, हमलावर को ईरान में मिला सम्मान, गिफ्ट की गई जमीन
75 साल के सलमान पर पिछले साल अगस्त में हमला किया गया था। तब वो एक प्रोग्राम में शिरकत कर रहे थे। 24 साल के मातर ने माना था कि वो रुश्दी की किताब सैटेनिक वर्सेस की वजह से नाराज था।

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ईरान के एक फाउंडेशन ने मशहूर लेखक सलमान रुश्दी पर अमेरिका में हमला करने वाले हमलावर हादी मातर की प्रशंसा की है और उसे इनाम देने की घोषणा भी की है। इस फाउंडेशन ने कहा है कि वो मातर को 1,000 स्क्वेयर मीटर कृषि योग्य जमीन दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस इनाम का ऐलान ईरान के सरकारी टीवी पर किया गया है। स्टेट चैनल इसे अपने टेलीग्राम चैनल पर रिपोर्ट किया है।

'रुश्दी एक जिंदा लाश से ज्यादा कुछ नहीं'
इमाम खुमैनी के फतवों को लागू करने वाले फाउंडेशन के सचिव मोहम्मद इस्माइल जरेई ने कहा, 'हम ईमानदारी से उस युवा अमेरिकी की बहादुरी का शुक्रिया अदा करते हैं, जिसने रुश्दी की आंखों में से एक को खराब कर दिया और एक हाथ को बिना काम का कर दिया।' जरेई ने आगे कहा कि रुश्दी एक जिंदा लाश से ज्यादा कुछ नहीं है। इस बहादुर कार्रवाई का सम्मान करने के लिए लगभग 1000 वर्ग मीटर कृषि भूमि हमला करने वाले व्यक्ति या उसके किसी कानूनी प्रतिनिधि को दान में दी जाएगी।
अगस्त में हुआ हमला
75 वर्षीय सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में पिछले साल अगस्त में तब हमला किया गया था, तब वो एक प्रोग्राम में हिस्सा ले रहे थे। 24 साल के हादी मातर ने एक लाइव प्रोग्राम के दौरान रुश्दी के गले पर चाकू से 10-15 बार हमला किया था। रुश्दी को एयर लिफ्ट करके एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। मातर एक शिया कट्टरपंथी ग्रुप से ताल्लुक रखता था। रुश्दी के गले और पेट पर चाकू के कई घाव थे।

हमलावर ने माफी की अपील की
हादी मातर ने स्वीकार किया था कि वो लेखक की किताब सैटेनिक वर्सेस की वजह से नाराज था। हमले में इस लेखक को गंभीर चोट आई थी। उन्हें एक आंख भी गंवानी पड़ी थी। इसके साथ ही उनकी एक हाथ भी बुरी तरह जख्मी हो गई थी। हमलावर शिया समुदाय से ताल्लुक रखता है। फिलहाल, वो न्यूयॉर्क की जेल में है। उस पर हत्या के प्रयास और मारपीट का चार्ज लगा है। हालांकि हादी मातर ने दूसरे दर्जे की हत्या के प्रयास और हमले के आरोपों में 'दोषी नहीं' होने का अनुरोध किया है।
कई देशों में बैन है 'द सैटेनिक वर्सेज'
आपको बता दें कि सलमान रुश्दी ने 1988 में 'द सैटेनिक वर्सेज' नाम की एक किताब लिखी थी, जिसे मुस्लिम ईशनिंदा के रूप में देखते हैं। भारत सहित दुनिया के कई देशों में यह उपन्यास बैन है। इस किताब को लेकर ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने रुश्दी के खिलाफ एक फतवा जारी किया था। न सिर्फ सलमान रुश्दी बल्कि उनकी किताब ‘द सैटेनिक वर्सेस' के अनुवादकों पर भी हमले होते रहे। द सैटेनिक वर्सेस उपन्यास जापानी ट्रांसलेटर हितोशी इगाराशी की हत्या कर दी गई। जबकि इटैलियन ट्रांसलेटर और नॉर्वे के पब्लिशर पर भी हमले हुए।












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