यूक्रेन की स्वतंत्रता दिवस पर रूस ने पैंसेंजर ट्रेन को ही उड़ाया, जेलेंस्की का दावा, 22 नागरिकों की हुई मौत
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर सैन्य अभियान चलाने का आदेश दिया था और उसके बाद से अभी तक युद्ध चल ही रहा है, जिसमें हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।
कीव, अगस्त 25: यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए अब 6 महीने खत्म होने वाले हैं और अभी तक युद्ध चल ही रहा है और किसी को नहीं पता, कि ये लड़ाई कहां जाकर खत्म होगी। वही, अब कीव में अधिकारियों ने कहा कि एक रूसी मिसाइल हमले में 22 नागरिकों की मौत हो गई। यूक्रेनी अधिकारियों ने दावा किया है, कि यूक्रेन की स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रूस ने एक पैसेंजर ट्रेन को निशाना बनाया है, जिससे यात्री ट्रेन में आग लग गई, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की स्वतंत्रता की 31 वीं वर्षगांठ से पहले हमले की आशंका जताई थी और उन्होंने तमाम सार्वजनिक समारोहों को रद्द कर दिया था।

6 महीने से चल रही है जंग
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर सैन्य अभियान चलाने का आदेश दिया था और उसके बाद से अभी तक युद्ध चल ही रहा है, जिसमें हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक वीडियो संबोधन में यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि, पूर्वी यूक्रेन में रूस के कब्जे वाले डोनेट्स्क के पश्चिम में लगभग 145 किमी (90 मील) पश्चिम में छोटे शहर चैपलिन में रूस ने एक पैसेंजर ट्रेन पर रॉकेट हमला किए हैं, जिसमें 22 लोगों की मौत हुई है। जेलेंस्की ने पैसेंजर ट्रेन पर किए गये रॉकेट हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है और कहा कि, "चैपलिन की घटना से हम बहुत दुखी हैं। इस हमले में अब तक 22 लोग मारे गए हैं। वहीं, ज़ेलेंस्की के सहयोगी क्यारीलो टायमोशेंको ने बाद में कहा कि, रूसी सेना ने चैपलिन पर दो बार गोलाबारी की थी। उन्होंने एक बयान में कहा कि पहले हमले में एक लड़के की मौत हो गई, जब एक मिसाइल उसके घर पर गिरी और बाद में 21 लोगों की मौत हो गई, जब रॉकेट रेलवे स्टेशन से टकरा गए और पांच ट्रेन के डिब्बों में आग लग गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया। रूस ने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है।

यूक्रेन को और अमेरिकी मदद
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ट्विटर पर कहा कि, "यूक्रेन में नागरिकों से भरे एक ट्रेन पर रूस की मिसाइल हमला अत्याचारों के एक पैटर्न पर फिट बैठता है''। उन्होंने कहा कि, हम यूक्रेन के साथ खड़े होने और रूसी अधिकारियों के लिए जवाबदेही तलाशने के लिए दुनिया भर के भागीदारों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। आपको बता दें कि, यूक्रेन की स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रूस की सेना ने रूसी तोपखाने ने खार्किव, मायकोलाइव, निकोपोल और निप्रो जैसे सीमावर्ती शहरों को निशाना बनाया है और ऐसा दावा यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार ओलेक्सी एरेस्टोविच ने किया है।

रूस के खिलाफ यूक्रेन ने सौंपे सबूत
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनी निकायों को रूसी हमले के बारे में जानकारियां सौंपी हैं, जिसमें यूनाइटेड नेशंस भी शामिल है। इन सबूतों में मारियुपोल के कारखानों में यूक्रेनी लड़ाकों को करीब एक महीने तक बंधक बनाकर रखना भी शामिल है। आपको बता दें कि, मारियुपोल यूक्रेन का बंदरगाह शहर है, जिसपर अप्रैल महीने में रूसी ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया था और मारियुपोल में स्थित अज़ोवस्टल स्टील प्लांट में करीब एक हजार यूक्रेनी सैनिकों को करीब एक महीने तक रूस ने बंधक बनाकर रखा था। राष्ट्रपति जेलेंस्की के सलाहकार एरेस्टोविच ने कहा कि, ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि कीव रूस के साथ कभी भी शांति वार्ता पर विचार नहीं करेगा, जब तक रूस की तरफ से हमले जारी रहते हैं।

यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस को जानिए
आपको बता दें कि, अगस्त 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन एक अलग देश बना था और ये पहले सोवियत संघ का ही हिस्सा था और इसकी आजादी में वोटिंग का इस्तेमाल किया गया था और बहुमत आबादी ने यूक्रेन की आजादी के लिए वोट डाला था। हालांकि, इस बार 24 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश में आजादी का जश्न नहीं मनाया गया और कई यूक्रेनियन लोगों ने राष्ट्रीय पोशाक की विशिष्ट कढ़ाई वाली शर्ट पहनकर इस अवसर को चिह्नित किया। स्वतंत्रता दिवस के दिन के राजधानी कीव में हवाई हमले के सायरन कम से कम सात बार बजाए गए, हालांकि कोई हमला नहीं हुआ। जेलेंस्की और उनकी पत्नी, ओलेना ज़ेलेंस्का, कीव के 11वीं सदी के सेंट सोफिया कैथेड्रल में एक सेवा के लिए धार्मिक नेताओं के साथ शामिल हुए और शहीद सैनिकों के स्मारक पर फूल चढ़ाए। वहीं, 44 साल के जेलेंस्की ने इस मौके पर एक बार फिर से क्रीमिया को यूक्रेन में मिलाने की कसम खाई, जिसपर रूस ने साल 2014 में कब्जा कर लिया था।












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