Pakistan Afghanistan Tension: अफगान सीमा पर पाकिस्तान का बड़ा ऑपरेशन, 30 की मौत, बॉर्डर पर भारी तनाव

Pakistan Afghanistan Tension: पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान सीमा के पास सैन्य कार्रवाई करते हुए 30 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। इस ऑपरेशन को हाल के आतंकी हमलों का जवाब बताया गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान में आतंकवाद खत्म होने का नाम क्यों नहीं ले रहा?

सालों तक जिन आतंकी संगठनों पर ढिलाई बरतने के आरोप लगते रहे, आज वही देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। सीमा पर लगातार बढ़ती हिंसा और दोनों देशों के बीच अविश्वास यह दिखाता है कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

Pakistan Afghanistan Tension

आतंक के खिलाफ जंग या अपनी नीतियों का नतीजा?

कराची में रेंजर्स मुख्यालय पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर बड़ा ऑपरेशन चलाया। सरकार का कहना है कि कार्रवाई आतंकियों के ठिकानों पर की गई। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि लगातार सुरक्षा अभियान के बावजूद आतंकी संगठन पाकिस्तान के भीतर बड़े हमले कैसे कर पा रहे हैं। इससे देश की Counter Terror Strategy पर भी सवाल खड़े होते हैं।

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TTP बना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) आज पाकिस्तान की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बन चुका है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता है कि TTP को अफगानिस्तान से मदद मिलती है। हालांकि अफगान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ता अविश्वास सीमा पर तनाव को और गहरा कर रहा है, जिससे आम नागरिक भी इसकी कीमत चुका रहे हैं।

सीमा पर बढ़ती कार्रवाई, लेकिन शांति अब भी दूर

पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कई बार हवाई और जमीनी कार्रवाई हुई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी सीमा का इस्तेमाल आतंकी करते हैं। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लगातार सैन्य कार्रवाई से तनाव तो बढ़ रहा है, लेकिन सीमा क्षेत्र में शांति लौटती नजर नहीं आ रही।

नागरिकों पर भी पड़ रहा संघर्ष का असर

सीमा पर हर सैन्य कार्रवाई का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। अफगानिस्तान पहले भी आरोप लगा चुका है कि पाकिस्तानी हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिकों की जान गई। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि उसने केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। ऐसे विरोधाभासी दावों के बीच सबसे ज्यादा नुकसान सीमा पर रहने वाले लोगों को उठाना पड़ता है।

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सिर्फ गोली नहीं, भरोसे की भी जरूरत

पाकिस्तान का कहना है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल सैन्य कार्रवाई से आतंकवाद की समस्या खत्म नहीं होती। जब तक सीमा सुरक्षा, खुफिया सहयोग और पड़ोसी देशों के साथ भरोसे पर आधारित नीति नहीं बनेगी, तब तक हिंसा का यह सिलसिला जारी रह सकता है। स्थायी शांति के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास भी उतने ही जरूरी हैं।

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