रूस-यूक्रेन महायुद्ध रोकने की आखिरी कोशिश, 10 प्वाइंट्स में समझिए पिछले दो दिनों में क्या हुआ?
अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि, हम कूटनीति के लिए हमेशा तैयार हैं। यदि रूस युद्ध का विकल्प चुनता है, तो हम रूस के ऊपर तीव्र और गंभीर परिणाम थोपने के लिए भी तैयार हैं।
मॉस्को/वॉशिंगटन, फरवरी 21: यूक्रेन संकट सोमवार को भी जारी है और पूर्वी यूक्रेन में सोमवार को भी हिंसक घटनाएं हो रही हैं। इस बीच आज एक बार फिर से संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूसी आक्रमण की आशंकाओं पर नए सिरे से अलार्म बजाया। यूक्रेन के साथ सीमा पर सैनिकों की संख्या को कम करने के लिए रूस के पहले के वादों को रद्द कर चुका तो अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी रूसी राष्ट्रपति से मिलने के लिए तैयार हो गये हैं। आईये जानते हैं उन 10 प्वाइंट्स के बारे में, जो यूक्रेन-रूस के बीच लेटेस्ट अपडेट है।

पुतिन से मिलेगे राष्ट्रपति बाइडेन
यूक्रेन तनाव कम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस के व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के लिए "सैद्धांतिक रूप से" स्वीकार कर लिया है और व्हाइट हाउस की तरफ से बाइडेन और पुतिन के बीच होने वाले शांति शिखर सम्मेलन की पुष्टी भी की जा चुकी है। हालांकि, बैठक को लेकर अनिवार्य शर्त ये रखा गया है कि, कि अगर बैठक से पहले रूस आक्रमण कर देता है, तो फिर बाइडेन इस बैठ को कैंसिल कर देंगे। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि, रूस पहले ही अपने सैनिकों को हमला करने के आदेश दे चुका है।

कूटनीति के लिए तैयार अमेरिका
अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि, हम कूटनीति के लिए हमेशा तैयार हैं। यदि रूस युद्ध का विकल्प चुनता है, तो हम रूस के ऊपर तीव्र और गंभीर परिणाम थोपने के लिए भी तैयार हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जेन साकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि, अगर रूस शांति के रास्ते पर नहीं चलता है और यूक्रेन पर हमला करता है, तो उसे काफी गंभीर परिणाण चुकाने होंगे और अमेरिका तो प्रतिबंध लगाए ही, साथ ही साथ अमेरिका अपने सहयोगी देशों से भी रूस पर प्रतिबंध लगाने की अपील करेगा।

फ्रांस के राष्ट्रपति ने की बात
वहीं, रविवार को पूर्वी यूक्रेन में भारी तनाव के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करीब 105 मिनट तक टेलीफोन पर बातचीत की और रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने व्लादिमीर पुतिन को युद्ध नहीं करने के लिए मनाने की कोशिश की। वहीं, खबर ये भी है कि, शिखर सम्मेलन की योजना भी फ्रांस की तरफ से ही बनाई गई है और इसके लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन, जो बाइडेन, व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन के बीच कई बार फोन कॉल पर बात की गई।

विदेश मंत्रियों की होगी मुलाकात
इन सबके बीच आगामी 24 फरवरी को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच भी मुलाकात होगी। माना जा रहा है कि, दोनों देशों के विदेशमंत्रियों के बीच होने वाली बैठक में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच होने वाले शिखर सम्मेलन को लेकर रूप-रेखा तैयार की जाएगी।

यूक्रेनी राष्ट्रपति की अपील
वहीं, रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान रूसी राष्ट्रपति को मुलाकात करने और बातचीत के जरिए शांति समझौता करने का न्योता दिया है। हालांकि, यूक्रेनी राष्ट्रपति के इस न्योते पर अभी तक रूस की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया है। जिसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रविवार को एक बार फिर से ट्वीट करते हुए संघर्ष विरान का आह्वान किया।

यूक्रेन से लोगों को निकालने की तैयारी
एक तरफ विश्व के कई देश शांति स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ देशों ने यूक्रेन से अपने लोगों निकालने की तैयारी भी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई देशों में यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने की व्यवस्था कर ली है और जैसे ही युद्ध शुरू होता है, वो अपने नागरिकों को यूक्रेन से बाहर निकाल लेंगे। वहीं, मॉस्को स्थिति अमेरिकी दूतावास ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि, ''हमारे पासे निकासी योजनाएं हैं, जो अमेरिका सरकार पर निर्भर नहीं है''।

यूक्रेन में भारत भी सक्रिय
यूक्रेन संकट के बीच भारत सरकार ने भी यूक्रेन में रहने वाले भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है और भारत सरकार ने कहा है कि, जिन नागरिकों का यूक्रेन में रहना जरूरी नहीं है, वो यूक्रेन छोड़कर फौरन भारत वापस आ जाएं। भारतीय दूतावास के अधिकारियों के परिवार के सदस्यों को भी यूक्रेन से बाहर जाने के लिए कहा है। इसने उन लोगों को "व्यवस्थित और समय पर प्रस्थान" के लिए उपलब्ध कॉमर्शियल या फिर चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए यूक्रेन से बाहर आने के लिए कहा गया है।
फ्रांस के साथ भारत की चर्चा
वहीं, युद्ध की स्थिति में अगर यूरोपीय देश और अमेरिका रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का ऐलान करते हैं, तो उसका असर सीधे तौर पर भारत पर भी पड़ सकता है और इस असर को कम करने की कोशीश भारत सरकार ने शुरू कर दी है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस वक्त फ्रांस दौरे पर हैं, जहां उन्होंने फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-यवेस ले ड्रियन से मुलाकात की है और यूक्रेन की मौजूदा स्थिति पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा की गई है। अगर अमेरिका रूस पर प्रतिबंध लगाता है, तो रूसी बैंको पर इसका सीधा असर पड़ेगा वहीं इस मामले से परिचित लोगों का हवाला देते हुए समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि, प्रतिबंध अमेरिकी वित्तीय संस्थानों को प्रमुख रूसी बैंकों के लेनदेन के साथ ट्रांजेक्शन को रोक सकते हैं।

रूसी कंपनियों पर लगेगा प्रतिबंध
इसके साथ ही रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि, अमेरिका ने कई रूसी नागरिकों और रूसी कंपनियों को 'स्पेशल डेजिगनेटेड नेशनल्स (एसडीएन)' की लिस्ट में रखा है और रूस पर बैन लगाने के साथ ही अमेरिका इन रूसी नागरिकों और रूसी कंपनियों को अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली से बाहर कर देगा और उनके व्यापारों पर भी प्रतिबंध लगा देगा। इसके साथ ही अमेरिका कई रूसी कारोबारियों की अमेरिका में स्थिति संपत्ति को भी फ्रीज कर देगा।












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