पुतिन के आगे सरेंडर को तैयार जेलेंस्की? NATO से किया तौबा, रहेंगे तटस्थ, शर्तें मानने को तैयार यूक्रेन?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने नाटो की सदस्यता लेने की अपनी जिद छोड़ने की तरफ संकेत देते हुए नाटो की सदस्यता लेने से तौबा कर लिया है।
कीव/मॉस्को, मार्च 09: यूक्रेन युद्ध के 14वें दिन ऐसा लग रहा है कि, अगले कुछ दिनों में यूक्रेन और रूस के बीच चल रही लड़ाई खत्म हो सकती है और ऐसे संकेत मिल रहे हैं, कि यूक्रेन की सरकार ने रूस के द्वारा रखी शर्तों को मानना शुरू कर दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पहले बयान दिया था कि, वो नाटो में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं और अब रूसी मीडिया ने दावा किया है, कि यूक्रेन तटस्थ रहने के भी तैयार हो गया है। लेकिन, दूसरी तरफ रूस अभी भी कई यूक्रेनी शहरों पर भारी गोलीबारी कर रहा है।

नाटो की सदस्यता से तौबा
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने नाटो की सदस्यता लेने की अपनी जिद छोड़ने की तरफ संकेत देते हुए नाटो की सदस्यता लेने से तौबा कर लिया है। जेलेंस्की ने कहा है कि, वो अब नाटो की सदस्यता लेने के लिए ज्यादा जोर नहीं देंगे। इसके साथ ही जेलेंस्की ने कहा कि, रूस ने यूक्रेन से जिन दो हिस्सों को अलग करके उन्हें अलग देश देश घोषित किया है उसपर भी वह व्लादिमीर पुतिन के साथ 'समझौता' करने के लिए तैयार हैं, जिन्हें रूस ने स्वतंत्र देश घोषित करने के बाद 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला बोल दिया था। जेलेंस्की ने कहा कि ''मैंने बहुत समय पहले ही इस प्रस्ताव को पीछे छोड़ दिया था, जब मैं यह समझ गया था कि नाटो यूक्रेन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। नाटो को डर है कि इससे काफी विवाद होगा और रूस से टकराव की स्थिति पैदा होगी।'' नाटो की सदस्यता का जिक्र करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि ''मैं ऐसे देश का राष्ट्रपति नहीं बनना चाहता हूं जो किसी चीज की भीख मांग रहा हो।''

रूसी मीडिया का बड़ा दावा
वहीं, रूसी मीडिया ने दावा करते हुए कहा है कि, यूक्रेन तटस्थ रहने के लिए तैयार हो गया है और रूसी मीडिया का दावा अगर सही है, तो फिर इसका मतलब ये हुआ, कि अब यूक्रेन अमेरिका और पश्चिमी देशों के करीब जाने की कोशिश नहीं करेगा, जो रूस चाहता था। इसके साथ ही जेलेंस्की ने अमेरिकी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि, 'मैं एक ऐसे देश का राष्ट्रपति नहीं रहना चाहता, जो भीख मांगता हुआ दिखे'। जेलेंस्की के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं और कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हो सकता है कि जेलेंस्की अब राष्ट्रपति पद छोड़ देने का मन बना रहे हों, या फिर वो अपना पाला बदलकर रूस के पाले में भी जा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, 'नेता अंत में नेता ही रहते हैं।' लेकिन, सवाल उठता है कि, क्या रूस इसके लिए तैयार होगा, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति जो एक बार सोच लेते हैं, उससे पीछे नहीं हटते हैं और इसकी बानकी अभी पूरी दुनिया देख रही है, कि तमाम प्रतिबंधों के बाद भी रूस ने एक कदम भी पीछे नहीं हटाया है।

पुतिन ने रखी थी चार शर्तें
रूस ने सोमवार को यूक्रेन के सामने युद्ध विराम के लिए चार शर्तें रखी थीं। रूस ने कहा था कि, अगर कीव चार शर्तों की सूची को पूरा करता है, तो वह 'एक पल में' सैन्य अभियानों को रोकने के लिए तैयार है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा था कि, यूक्रेन को अपनी सैन्य कार्रवाई बंद कर देनी चाहिए और "फिर कोई गोली नहीं चलाएगा।"। 24 फरवरी को यूक्रेन के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण की शुरुआत के बाद से रूस द्वारा अब तक दिया गया यह सबसे स्पष्ट और सीधा बयान है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के तीसरे दौर की वार्ता के लिए सोमवार को मिलने के बाद ये मांगे सामने आईं हैं। रूस ने जो चार शर्तें रखीं थीं, उनमें पहली शर्त 1- फौरन गोलीबारी बंद करने, 2- संविधान में संशोधन, 3- क्रीमिया को रूस का हिस्सा मानने और 4- डोनबास इलाके में स्थिति, डोनेट्स्क और लुगांस्क के अलगाववादी गणराज्यों को स्वतंत्र राज्यों के रूप में मान्यता देने की बात थी। और ऐसी रिपोर्ट है कि, इन सभी शर्तों पर समझौता करने पर यूक्रेनी राष्ट्रपति के तेवर नरम पड़ रहे हैं।

इजरायली राष्ट्रपति कर रहे मध्यस्थता
शनिवार को इजरायली प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने अचानक रूस की यात्रा की थी और उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लंबी मुलाकात की थी और माना जा रहा है कि, इजरायली प्रधानमंत्री की मध्यस्थता की कोशिश रंग ला रही है। इजरायली अधिकारियों ने हालांकि, मुलाकात को लेकर कोई ज्यादा जानकारी तो नहीं दी, लेकिन इजरायरी अधिकारियों ने कहा कि, 'प्रधानमंत्री बेनेट ने युद्ध रोकने का कोई प्लान नहीं बताया है, सिर्फ पुतिन और जेलेंस्की की बातों को एक दूसरे तक पहुंचा रहे हैं।' इसके साथ ही रिपोर्ट है कि, इजरायली प्रधानमंत्री ने रूसी राष्ट्रपति को यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात करने और अन्य वैश्वित नेता रूस से क्या चाह रहे हैं, उसके बारे में उन्हें बताने की कोशिश की। माना जा रहा है कि, इजरायल के हस्तक्षेप से रूस के रूख में भी थोड़ी नरमी आई है।

क्या युद्ध खत्म ही हो जाएगा?
हालांकि, दोनों पक्षों की तरफ से नरमी के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि, शांति स्थापना हो ही जाएगी। इजरायली अधिकारियों का भी मानना है कि, रूस ने यूक्रेन के सामने जो चार शर्तें रखी हैं, वो इतने कठोर हैं, कि यूक्रेन उन्हें स्वीकार करेगा या नहीं, इसको लेकर वो भी आश्वस्त नहीं हैं। दूसरी तरफ अभी भी, यूक्रेन भी लगातार रूस के खिलाफ ऑपरेशंस को अंजाम दे रहा है, जिसमें रूस की सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, एक दिन पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करीब 50 मिनट तक बातचीत की थी, और इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से डायरेक्ट बातचीत करने का आग्रह किया था। जबकि, फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी पुतिन को मनाने की अपील की है, लिहाजा युद्ध में शांति होने के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन क्या युद्ध खत्म ही हो जाएगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है।












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