भारत और चीन के बीच तनाव कम करने के लिए आगे आया एक देश
मॉस्को। भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने के लिए रूस की तरफ से कोशिशें शुरू हो गई हैं। 23 जून को रशिया-इंडिया-चाइना (रिक) की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग है। इस मीटिंग में तीनों देशों के विदेश मंत्री शामिल होंगे। इस सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने चीनी समकक्ष वांग वाई से मुखातिब होंगे।

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जल्द से जल्द तनाव खत्म होने की उम्मीद
17 जून से ही रूस की तरफ से राजनयिक कोशिशें जारी हैं। रूस के उप-विदेश मंत्री इगोर मोरगुलोव ने क्षेत्रीय सुरक्षा जिसमें एलएसी पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव, भी शामिल था, इस पर भारतीय राजदूत के साथ बातचीत की है। रूस में भारत के राजदूत वेंकटेश वर्मा के साथ वार्ता गलवान घाटी में 15 जून को भारत और चीन की हिंसा के बाद हुई थी। इस हिंसा में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। रूस के विदेश मंत्रालय की तरफ से इस पर कोई भी बयान नहीं दिया गया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो रूस चाहता है कि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द से जल्द खत्म हो जाए। सूत्रों के मुताबिक रूस ने भारत की ओर उन कोशिशों का भी समर्थन किया है जिसके तहत चीन के साथ तनाव को सुलझाया जा रहा है।
रक्षा मंत्री जा रहे हैं रूस
बुधवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने भारत में रूस के राजदूत निकोल आर कुडाशेव से बात की थी। इसके अलावा उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुशकिन से भी 15 जून को हुई घटना पर जानकारी मांगी थी। विदेश मंत्री सर्गेई ने उम्मीद जताई थी कि दोनों देशों के बीच टकराव जल्द खत्म होगा। बताया जा रहा है कि रूस ने भारत को समर्थन देने से पहले कई बार पूर्वी लद्दाख में हुए टकराव पर प्रतिक्रिया दी थी। 23 जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मॉस्को जाने वाले हैं और उनके इस दौरे से पहले रूस की तरफ से यह बयान आना अपने आप में यह बताने के लिए काफी है कि रूस, भारत के साथ अपने संबंधों को कमजोर नहीं करना चाहता है।












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