रूस ने शुरू की S-400 मिसाइलों की डिलीवरी, क्या भारत पर प्रतिबंध लगाएगा अमेरिका? हलचल तेज
रूस ने एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी भारत को शुरू कर दी है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका भारत पर प्रतिबंध लगाने की हिम्मत करेगा?
नई दिल्ली, नवंबर 14: तय वादे और तय करार के मुताबिक, दोस्त रूस ने भारत को एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी शुरू कर दी है। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि, क्या अमेरिका भारत पर प्रतिबंध भी लगाएगा? रूसी न्यूज एजेंसी स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का आधुनिक एस-400 मिसाइल सिस्टम की पहली खेप भारत पहुंच चुकी है और रूस के सेन्ट्रल सैन्य टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन के डायरेक्टर दिमित्री शुगेव ने भारत में मिसाइलों की डिलीवरी की पुष्टि कर दी है।

एस-400 मिसाइलों की डिलीवरी शुरू
सेन्ट्रल सैन्य टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन के डायरेक्टर दिमित्री शुगेव ने समाचार एजेंसी स्पुतनिक को बताया कि, "भारत को एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति शुरू हो गई है और धीरे धीरे बाकी मिसाइल सिस्टम की भी डिलीवरी भारत को की जाएगी''। आपको बता दें कि, भारत से पहले तुर्की और चीन रूस ले एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीद चुका है और एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने से गुस्साया अमेरिका तुर्की पर प्रतिबंध भी लगा चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका भी भारत के खिलाफ कोई एक्शन लेगा? क्योंकि, अमेरिका कई बार प्रत्यक्ष और कई बार परोक्ष तौर पर इस डील को लेकर टिप्पणी कर चुका है। आपको बता दें कि, रूस और भारत ने अक्टूबर, 2018 में एल-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किए थे।
Recommended Video

भारत और रूस करार
अगस्त में रूस के राज्य हथियार निर्यातक रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के प्रमुख अलेक्जेंडर मिखेव ने समाचार एजेंसी स्पुतनिक को बताया था कि, मध्य पूर्व, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और अफ्रीका के सात देशों के साथ एस -400 वायु रक्षा मिसाइल सिस्टम के लिए बातचीत चल रही है। वहीं, भारत और रूस के बीच एस-400 मिसाइल सिस्टम के लिए अक्टूबर 2018 में 5.43 अरब डॉलर का करार हुआ था, जिसके तहत रूस भारत को पांच एस-400 मिसाइल सिस्टम सौंपेगा।

तुर्की पर लग चुका है प्रतिबंध
आपको बता दें कि, भारत के साथ साथ तुर्की भी रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है, लेकिन अमेरिका ने तुर्की को कोई रियायत नहीं दी और पिछले साल अमेरिका ने तुर्की के ऊपर प्रतिबंध लगा दिए थे। लेकिन, इसी महीने अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों के सीनेटर्स ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को जो चिट्ठी लिखकर भारत को छूट देने की मांग थी। सीनेटर्स ने बाइडेन से अपील करते हुए कहा था कि, ''हम अमेरिका की चिंताओं को समझते हैं, लेकिन अगर भारत पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो भारत के साथ सहयोग को ढटका लगेगा''। उन्होंने लिखा है कि, "हम मानते हैं कि सीएएटीएसए प्रतिबंधों के लागू होने से भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है, जबकि इस प्रतिबंध से रूसी हथियारों की बिक्री नहीं रूक सकती है।

भारत-रूस सैन्य संबंध
आपको बता दें कि, भारत हमेशा से रूस से हथियार खरीदता रहा है, लेकिन पिछले पांच सालों में भारत ने रूस से हथियारों की खरीदी में भारी कटौती कर दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच साल की अवधि की तुलना में 2016 से 2020 तक भारत में रूसी हथियारों के निर्यात में 53% की गिरावट आई है। दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत के रक्षा सौदे 2020 वित्तीय वर्ष में 3.4 बिलियन डॉलर की बिक्री के साथ बढ़ रहे हैं। जिसको सीनेटर्स ने अपनी चिट्ठी में लिखा है और अमेरिका के लिए ये एक पॉजिटिव बात बताई है। उन्होंने कहा कि, "इस समय प्रतिबंध लगाने से हमारे द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं में भारत के साथ गहरे सहयोग को पटरी से उतारा जा सकता है। जो सहयोग भारत और अमेरिका के बीच कोरोना वायरस वैक्सीन, डिफेंस सेक्टर, ऊर्जा सेक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर हुए हैं।"

मोदी से मिले अमेरिकी सीनेटर्स
रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी से पहले अमेरिकी सांसदों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाका की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीनेटर जॉन कॉर्निन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण एशिया और भारत-प्रशांत क्षेत्र के विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि, "प्रधानमंत्री ने भारत-यू.एस. संबंध को गहरा करने में अमेरिकी कांग्रेस के लगातार समर्थन की सराहना की है।'' वहीं, इस मुलाकात के दौरान सबसे खास बात ये थी कि, किसी भी अमेरिकी सीनेटर ने एस-400 मिसाइल का मुद्दा नहीं उठाया।












Click it and Unblock the Notifications