G20 समिट पर भारत के खिलाफ निगेटिव रिपोर्टिंग, रूसी अखबार ने अमेरिकी मीडिया को लगाई लताड़, बताया दोगला...
G20 Summit 2023: भारत के जी20 कॉर्डिनेटर हर्ष वर्धन श्रृंगला ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया है, कि भारत पिछले डेढ़ सालों से जी20 शिखर सम्मेलन के लिए तैयारियां कर रहा है और भारत की कोशिश, एक ऐसे शानदार आयोजन करने की है, जिसे सालों तक याद रखा जा सके।
भारत में आज जी20 शिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है, लेकिन पश्चिमी मीडिया को भारत के खिलाफ निगेटिव रिपोर्टिंग से फुर्सत नहीं है। कई विदेशी अखबार, भारत के मोदी विरोधी पत्रकारों से आर्टिकिल्स लिखवा रहे हैं और उसके जरिए वही पुरानी घिसीपिटी बातें, जैसे मानवाधिकार, अल्पसंख्यकों को अधिकार नहीं है, मोदी राज में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं, विपक्ष को दबाया जा रहा है, जैसे प्रोपेगेंडा से भरे लेख प्रकाशित करने में व्यस्त हैं।

उदाहरण के लिए, अलजजीरा ने भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर रहने वाली कथित इतिहासकार अरूंधती राय से आर्टिकिल लिखवाया है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जमकर जहर उगला गया है। जिसको लेकर रूस ने पश्चिमी मीडिया की सख्त आलोचना की है और पश्चिमी मीडिया को 'दोगला' बताया है।
रूस ने पश्चिमी मीडिया को लगाई फटकार
प्रमुख रूसी समाचार आउटलेट, रशिया टुडे (आरटी) ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले संगठन जी20 की सफल मेजबानी में भारत की भव्यता को उजागर करने में नाकाम रहने के लिए पश्चिमी मीडिया की निंदा की है।
रूसी अखबार ने कहा है, कि भारत ने कड़ी मेहनत के साथ भव्य शिखर सम्मेलन का आयोजन किया है, लेकिन पश्चिमी मीडिया भारत के खिलाफ एक से बढ़कर एक निगेटिव आर्टिकिल्स लिखे जा रहा है। रूसी अखबार ने लिखा है, कि पश्चिमी मीडिया ने जी20 शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन करने वाले भारतीय अधिकारियों के जबरदस्त प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया है।
पश्चिमी मीडिया की सलेक्टिव रिपोर्टिंग
आरटी के लेख में बताया गया है, कि पश्चिमी पत्रकारों ने मुख्य रूप से जी20 शिखर सम्मेलन से पहले मलिन बस्तियों को साफ़ करने के लिए भारतीय अधिकारियों द्वारा चलाए गए सौंदर्यीकरण अभियान पर ध्यान केंद्रित किया है।
रूसी मीडिया ने लिखा है, कि "कार्यक्रम की सफल आयोजन करवाने के लिए भारतीय अधिकारियों ने दिन रात एक कर दिया और सौंदर्यीकरण अभियान चलाया गया, भारतीय अधिकारियों ने काफी कड़ी मेहनत की, लेकिन पश्चिमी मीडिया पूर्वाग्रह पर अड़ा रहा, जिससे साफ जाहिर होता है, कि गैर-पश्चिमी देशों के बारे में नकारात्मक कहानियां ढूंढना कितना आसान है।"
G20 शिखर सम्मेलन के लिए किए गए खर्च के संबंध में, बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया है, कि भारत सरकार ने 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा जी20 के आयोजन में खर्च किया है। इसमें कहा गया है, कि जी20 का आयोजन भारत के 50 शहरों में 200 बैठकों का आयोजन किया गया है।
आरटी ने कहा, कि खामियां कहां नहीं होती हैं और पहले जिन देशों ने जी20 की मेजबानी की है, क्या उन देशों ने गलतियां नहीं की हैं, क्या उनके आयोजन में खामियां नहीं थीं और ऐसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में ऐसी खामियां होना आम बात हैं, लेकिन पश्चिमी मीडिया को भूसे के ढेर से सूई निकालने की कोशिश में है।
रूसी अखबार आरटी ने लिखा है, कि भारत ने इस कार्यक्रम को लोगों से जोड़ा है, मानवीयता पर ध्यान दिया है, इसके लिए भारत की तारीफ होनी चाहिए। रूसी मीडिया ने लिखा है, कि नई दिल्ली में आम आमदी पार्टी की सरकार ने भी आयोजन की तारीफ की है।
वॉशिंगटन पोस्ट को आरटी ने लताड़ा
रूसी अखबार ने भारत के खिलाफ निगेटिव रिपोर्टिंग के लिए कुख्यात रहे वॉशिंगटन पोस्ट को लताड़ लगाई है। आरटी ने लिखा है, कि वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने आर्टिकिल में लिखा है, कि "जी20 के जरिए प्रधानमंत्री मोदी अपनी रीब्रांडिंग कर रहे हैं। पूरे देश में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे के साथ बिलबोर्ड चिपकाया गया है।"
अखबार ने लिखा है, कि "यह संदेश देने की कोशिश की गई है, कि दुनिया की शीर्ष नेताओं की मेजबानी करके भारत एक ताकत के तौर पर उभरा है, लेकिन हकीकत ये है, कि जी20 की अध्यक्षता करने का मौका बारी बारी से हर एक सदस्य देश को मिलता है।"
वॉशिंगटन पोस्ट के इस लेख को लेकर आरटी ने लिखा है, कि "अगर यही बात है, तो दुनिया के किस देश के नेता ने अपने चेहरा चमकाने के लिए ऐसा नहीं किया है? दुनिया भर के नेताओं ने अपनी इमेज बनाने के लिए इस आयोजन का इस्तेमाल किया है और मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की है, लेकिन बात अगर भारत की करें, तो भारत साल 2000 से ही अतुल्य भारत अभियान चला रहा है और अगर दुनिया भर के नेता, किसी हादसे के वक्त या फिर किसी सम्मेलन में जाकर अपना चेहरा चमकाते हैं, तो फिर सिर्फ भारतीय नेता की ही आलोचना क्यों हो रही है?"
भारत के खिलाफ दोगलापन क्यों?
आरटी ने लिखा है, कि "गरीबी की बात से भारत ने कभी इनकार नहीं किया है और अगर पश्चिमी मीडिया भारत की गरीबी की बात करती है, तो उसे याद रखना चाहिए, कि सिलिकॉन वैली (कैलिफोर्निया) में ज्यादातर लोगों के पास अपने घर नहीं हैं।"
आगे लिखा गया है, कि "अमेरिकी मीडिया को ये नहीं भूलना चाहिए, कि अमेरिका ड्रग्स से तबाह हो रहा है और यूरोपीय शहर बेरोजगारी से तबाह हो रहे हैं।" आरटी ने आगे लिखा है, कि "हॉलीवुड के एक्टर कम वेतन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पश्चिमी देशों की मीडिया को विकासशील देशों में ही गरीबी दिखती है, दो उसका कट्टर दोगलापन है।"












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