30 सालों में पहली बार रूस ने उत्तरी बेड़े पर तैनाए किए परमाणु बम, खतरे में आए नाटो के कई देश
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की सैनिक क्षमता कमजोर है, इसलिए उसके लिए परमाणु हथियारों का महत्व काफी बढ़ गया है। आने वाले वर्षों में रूस नए परमाणु हथियारों को बनाना जारी रख सकता है।

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रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी को युद्ध के 1 साल पूरे हो जाएंगे। इस बीच नॉर्वे की एक इंटेलिजेंस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। नॉर्वेजियन इंटेलिजेंस सर्विस द्वारा 13 फरवरी को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, रूसी नौसेना के उत्तरी बेड़े में युद्धपोतों को टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों से लैस किया गया है। खुफिया एजेंसी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में जहाजों पर हथियारों की मौजूदगी के बारे में बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक 30 साल में यह पहली बार है जब रूसी नौसेना का बेड़ा परमाणु हथियारों के साथ समुद्र में गया है।
परमाणु हथियारों पर बढ़ा रूस का भरोसा
दस्तावेज में दावा किया गया है कि सोवियत काल के दौरान, उत्तरी बेड़े के युद्धपोतों ने अक्सर समुद्र में सामरिक परमाणु हथियारों को तैनात किया था, लेकिन शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से ऐसी किसी भी घटना की सूचना नहीं मिली है। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन में मास्को के विशेष अभियान की शुरुआत के बाद से रूस के लिए परमाणु हथियारों का महत्व नाटकीय रूप से बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की सैनिक क्षमता कमजोर है, इसलिए उसके लिए परमाणु हथियारों का महत्व काफी बढ़ गया है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि आने वाले वर्षों में रूस नए परमाणु हथियारों को बनाना जारी रखेगा।
नाटो देशों के लिए गंभीर खतरा
नॉर्वे की खुफिया एजेंसी ने इन हथियारों को नाटो देशों के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा रूस के पास पनडुब्बी, सैटेलाइट को तबाह करने वाले हथियार और साइबर उपकरण हैं, जो नॉर्वे और नाटो को धमकी देने के लिए काफी हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन युद्ध की शुरुआत के बाद से ही परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात से परहेज करते रहे हैं। लेकिन रूस के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और नेताओं ने हाल के हफ्तों में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना जताई है।












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