अमेरिका को नहीं बनने देंगे दुनिया का ‘चौधरी’, भारत नहीं बनेगा 'अंकल सैम' का यस मैन, US पर भड़का रूस

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि, अमेरिका की कोशिश है कि, वो किसी ‘चौधरी’ की भूमिका में रहे और बाकी दुनिया उसके तमाम हुक्म को कड़ाई से माने।

मॉस्को, मार्च 20: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने भारत और चीन के नाम पर अमेरिका पर जमकर जवाबी हमला बोला है और पिछले दो दिनों में रूस ने भारत को लेकर दो अहम बयान दिए हैं। रूस के विदेश मंत्री ने कहा है कि, अमेरिका 'एकध्रुवीय' दुनिया का निर्माण करना चाहता है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। रूस के विदेश मंत्री ने कहा है कि, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के खिलाफ जितने भी प्रतिबंध लगाए हैं, उसकी वजह से रूस और अमेरिका के संबंध और मजबूत ही होगें।

दुनिया का चौधरी बनना चाहता है यूएस

दुनिया का चौधरी बनना चाहता है यूएस

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि, अमेरिका की कोशिश है कि, वो किसी 'चौधरी' की भूमिका में रहे और बाकी दुनिया उसके तमाम हुक्म को कड़ाई से माने। उन्होंने कहा कि, अमेरिका एक 'वैश्विक गांव' का नहीं, बल्कि 'अमेरिकी गांव' का निर्माण करना चाहता है, लेकिन रूस को पूरी उम्मीद है कि, भारत, ब्राजील, अर्जेंटीना जैसे देश कभी 'यस मैन' की भूमिका में नहीं आएंगे। वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने उपहास करते हुए कहा कि, चीन के साथ मास्को के संबंध अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से और भी मजबूत होंगे। इंटरफैक्स समाचार एजेंसी के अनुसार, क्रेमलिन के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि, चीन के साथ रूस के संबंध ऐसे समय में प्रगाढ़ होंगे, जब पश्चिम उन सभी नींवों को कमजोर कर रहा है, जिन पर अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली आधारित है।

अमेरिका पर बरसे रूसी विदेश मंत्री

अमेरिका के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि, 'रूस और चीन के बीच यह सहयोग और मजबूत होगा, क्योंकि ऐसे समय में जब पश्चिम स्पष्ट रूप से उन सभी नींवों को कमजोर कर रहा है जिन पर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था आधारित है, निश्चित रूप से हमें - दो महान शक्तियों के रूप में, इस दुनिया में कैसे आगे बढ़ना है, यह सोचने की जरूरत है'। आपको बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को चेतावनी दी थी, कि अगर यूक्रेन पर आक्रमण के दौरान बीजिंग रूस को समर्थन प्रदान करता है तो उसके गंभीर 'परिणाम' होंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने यह कहने से इनकार कर दिया कि, वे परिणाम क्या होंगे और यह कहने से इनकार कर दिया कि क्या बाइडेन ने चीन के बारे में कोई विशेष जानकारी मांगी है, जिसका रूस के साथ घनिष्ठ राजनयिक संबंध है।

‘अमेरिका देखता है अपना हित’

‘अमेरिका देखता है अपना हित’

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि, अमेरिका ने अभी तक अपने हितों के आधार पर दुनिया को 'एकजुट' किया है। रूसी विदेश मंत्री का इशारा 'नाटो' और 'यूरोपीय' संघ की तरफ था। उन्होंने कहा कि, अमेरिका की कोशिश 'अमेरिकी गांव' बनाने की है, लेकिन दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जो अमेरिका की चौधराहट को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। सर्गेई लावरोव ने कहा कि, 'भारत, ब्राजील और चीन जैसे देश, 'अंकल सैम' की आदेशों का पालन नहीं करेगें और 'अंकल सैम' के इशारों पर यस सर नहीं कहेंगे।'

जब इतिहास लिखा जाएगा....

जब इतिहास लिखा जाएगा....

आपको बता दें कि, अमेरिका ने रूस से भारत के तेल खरीदने को लेकर भी इतिहास लिखे जाने का हवाला दिया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने पिछले हफ्ते अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रिपोर्टर्स से बात करके हुए कहा है कि, "किसी भी देश के लिए हमारा संदेश यह है, कि हमने जो प्रतिबंध लगाए हैं, हम सभी उन प्रतिबंधों का पालन करें, जो अनुशंसित हैं।" वहीं, जब भारत द्वारा रियायती कच्चे तेल की रूसी पेशकश को स्वीकार करने की संभावना के बारे में एक रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि, "मुझे नहीं लगता कि यह (प्रतिबंधों) का उल्लंघन होगा।" व्हाइट हाउस की तरफ से आगे कहा गया कि, "लेकिन यह भी सोचें कि जब इतिहास की किताबें इस वक्त के बारे में लिखा जाएगा, तो आप कहां खड़ा होना चाहते हैं?

‘अमेरिका बना रहा भारत पर प्रेशर’

‘अमेरिका बना रहा भारत पर प्रेशर’

रूस के विदेश मंत्री ने अमेरिका को लेकर काफी आक्रामक बयान देते हुए कहा कि, रूस के साथ घनिष्ठ संबंध की वजह से ही अमेरिका चीन, तुर्की और कई अन्य देशों पर दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि, "यह सिर्फ अशिष्टता है जो वाशिंगटन से फूट रही है, मुझे नहीं पता, यह समझ से परे है"। उन्होंने कहा कि, 'यह और भी चौंकाने वाली बात है कि चीन, भारत, मिस्र जैसी प्राचीन सभ्यताओं के खिलाफ इस तरह के 'ब्लैकमेल' का इस्तेमाल किया जाता है।

‘इतिहास का युगांतकारी क्षण’

‘इतिहास का युगांतकारी क्षण’

रूसी विदेश मंत्री ने आरबीसी टीवी चैनल के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि, "यह एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षण है, यह आधुनिक इतिहास में एक युगांतरकारी क्षण है, क्योंकि यह असल में 'वैश्विक व्यवस्था' की नई 'लड़ाई' को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि, पश्चिमी देश यूक्रेन की समस्या का शांतिपूर्वक हल होने ही नहीं देना चाहता था। उन्होंने कहा कि, 'यूक्रेन मामले को शांति से क्यों नहीं सुलझाया जा सकता है?'

‘रूस-यूक्रेन ‘संवेदनशील’ मुद्दों पर सहमति के करीब’

‘रूस-यूक्रेन ‘संवेदनशील’ मुद्दों पर सहमति के करीब’

तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लू ने 'हुर्रियत डेली' को बताया कि रूस और यूक्रेन "महत्वपूर्ण" मुद्दों पर एक समझौते के करीब पहुंच रहे हैं और कुछ विषयों पर लगभग सहमत हो गए हैं। कावुसोग्लू ने यह भी कहा कि यदि पक्ष समझौते की दिशा में की गई प्रगति से एक कदम पीछे नहीं हटते हैं तो वह युद्धविराम के लिए पॉजिटिव बात है।

यूक्रेन पर फिर से हाइपरसोनिक मिसाइल से हमला

यूक्रेन पर फिर से हाइपरसोनिक मिसाइल से हमला

रूस ने कहा कि, उसने यूक्रेन में फिर से अपनी लेटेस्ट हाइपरसोनिक मिसाइल दागी है, यूक्रेन के दक्षिण में एक ईंधन भंडारण स्थल नष्ट हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, "हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ किंजल एविएशन मिसाइल सिस्टम ने मायकोलाइव क्षेत्र में कोस्त्यंतिनिव्का की बस्ती के पास यूक्रेनी सशस्त्र बलों के ईंधन और स्नेहक के लिए एक बड़े भंडारण स्थल को नष्ट कर दिया।" वही, यूक्रेन ने कहा है कि, इस हमले में कम से कम 40 सेना के जवान मारे गये हैं। आपको बता दें कि, पिछले दो दिनों में दूसरी बार रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है।

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