यूक्रेन पर विश्व का सबसे विध्वंसक मिसाइल चला सकता है रूस, शैतान Sarmat को पुतिन ने दिया आदेश, जानें क्या है?
Russia Deploy RS-28 Sarmat Missile: यूक्रेन युद्ध के करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद अब रूस ने दुनिया की सबसे विध्वंसक मिसाइल को जंग के मैदान में तैनात कर दिया है और अगर रूस इस न्यूक्लियर मिसाइल का इस्तेमाल कर देता है, तो फिर यूक्रेन का पूरी तरह से तहबाह-ओ-बर्बाद हो जाना तय समझिए।
ये मिसाइल कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं, कि पश्चिमी देशों में इस मिसाइल को 'शैतान' कहकर संबोधित किया जाता है।

रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोसमोस के प्रमुख यूरी बोरिसोव ने एक बयान में कहा है, कि RS-28 सरमत इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) को यूक्रेन युद्ध में तैनात कर दिया गया है। रूस का दावा है, कि ये आईसीबीए मिसाइल "दुनिया की सबसे घातक मिसाइल" है और इसकी जंग के मैदान में अब तैनाती कर दी गई है।
आरएस-28 सरमत रूस की अगली पीढ़ी की इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) है, जिसके देश के साइलो-आधारित स्ट्रैटजिक डेटरेंट के मुख्य एलिमेंट्स के रूप में काम करने की उम्मीद है। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख ने कहा है, कि रूस ने इस मिसाइल सिस्टम को फिलहाल "लड़ाकू चेतावनी मुद्रा" पर रखा है।
उन्होंने कहा, कि "सरमत स्टैटजिक कॉम्पैक्स को युद्ध लड़ने के लिए तैनात किया गया है।" हालांकि, रोस्कोस्मोस के प्रमुख ने घोषणा के दौरान सटीक तैनाती की तारीख या स्थान का खुलासा करने से परहेज किया है।
सरमत न्यूक्लियर मिसाइल की तैनाती
सरमत ICBM का पहला प्रक्षेपण रूस ने 20 अप्रैल 2022 को आर्कान्जेस्क क्षेत्र के प्लेसेत्स्क कॉस्मोड्रोम से किया था। यूक्रेन पर आक्रमण करने के करीब दो महीने बाद रूस ने इस मिसाइल का परीक्षण किया था।
रूस ने कहा था, कि मिसाइल का प्रक्षेपण पूरी तरह से नॉर्मल और कामयाब था।
राष्ट्रपति पुतिन ने उस समय चेतावनी दी थी, कि मिसाइल "उन लोगों को सोचने पर मजबूर कर देगी, जो रूस को धमकी देने की कोशिश कर रहे हैं।"
हालांकि, पश्चिमी विशेषज्ञों ने 2022 के परीक्षण को "परमाणु कृपाण-धमकाने" के रूप में लेबल किया था, यानि रूस सिर्फ धमकी देने के लिए इस मिसाइल का परीक्षण किया है, लेकिन अब जब रूस ने इस मिसाइल को तैनात कर दिया है, तो फिर यूक्रेन युद्ध के विध्वंसक होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
माना जा रहा है, कि पिछले डेढ़ साल के युद्ध में रूस के प्रमुख फाइटर जेट्स और युद्धपोतों को काफी नुकसान पहुंचा है, लिहाजा अब रूस, आर-पार की जंग लड़ने के मूड में आ रहा है।

नवंबर 2022 में, रूस ने घोषणा की थी, कि आरएस-28 सरमत इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का बड़े पैमान पर उत्पादन किया जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस साल 23 फरवरी को घोषणा की थी, कि एडवांस सरमत मिसाइल सिस्टम इसी साल से युद्ध में अपना युद्ध ड्यूटी संभालेगी।
इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन ने एक बार फिर से 21 जून को दोहराया था, कि सरमत स्ट्रैटजिक कॉम्प्लैक्स "निकट भविष्य में" युद्धक ड्यूटी लेने के लिए तैयार हो जाएगा।
और अब रोस्कोस्मोस के प्रमुख की नई घोषणा करते हुए कहा है, कि मिसाइल को अब युद्धक ड्यूटी के लिए तैनात कर दिया गया है।
RS-28 सरमत ICBM कितना विध्वंसक?
RS-28 सरमत मिसाइल, जिसे पश्चिमी देशों में शैतान-2 के नाम से जाना जाता है, उसे रूस की सबसे दुर्जेय इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसमें अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक पहुंचने में सक्षम थर्मोन्यूक्लियर वारहेड से लैस एक सुपर-हेवी डिज़ाइन है।
इस मिसाइल को 2018 में रूसी राष्ट्र के संबोधन के दौरान पेश किया गया था और राष्ट्रपति पुतिन ने इसे "अगली पीढ़ी" के हथियार के रूप में पेश किया था, जो किसी भी मिसाइल रक्षा प्रणाली को चकमा देने में सक्षम है। रूस का दावा है, कि दुनिया में ऐसा कोई मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं बना है, जो इस मिसाइल को रोक सके।
आर्मी-2019 प्रदर्शनी के दौरान इस मिसाइल को लेकर रूस ने कुछ जानकारियां सार्वजनिक की थीं। इसके मुताबिक, सरमत इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के पास 18,000 किलोमीटर की प्रभावशाली रेंज और ये अपने साथ 200 टन से ज्यादा वजन के बम या विस्फोटक अपने साथ लेकर उड़ान भरने में सक्षम है।
इसके साथ, इस मिसाइल मं 178 टन ईंधन लेकर उड़ान भरने की क्षमता है, वहीं मिसाइल का डायमीटर 3 मीटर और इसका लंबाई 35.5 मीटर है।
यह मिसाइल अपनी असाधारण गति और रेंज, बेजोड़ सटीकता और दुनिया की किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।
इसके अलावा, सरमत एक साथ 15 हल्के परमाणु हथियार ले जा सकता है, और रूस का कहना है, कि इस मिसाइल से एक साथ 15 ठिकानों पर सटीकता के साथ हमला किया जा सकता है, क्योंकि इन हथियारों को मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल्स (एमआईआरवी) के रूप में कॉन्फ़िगर किया गया है।

युद्ध में रूस का आखिरी सहारा?
यूक्रेन युद्ध में अभी तक रूस के एक से बढ़कर एक मिसाइलें और हथियारें फेल हो चुकी हैं, क्योंकि यूक्रेन को लगातार पश्चिमी देशों से मदद मिल रही है। यूक्रेन में पश्चिमी देशों के मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी लगाए गये हैं, लिहाजा ये युद्ध लगातार खिंचता जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरमत मिसाइल को रूस ने सोवियत संघ के जमाने में बनाए गये आर-36एम2 वोयेवोडा आईसीबीएम मिसाइल को रिप्लेस करने के लिए तैयार किया गया है। आर-36एम2 को 1962 में तैयार किया गया था, जो एक साथ तीन हथियार ले जाने और निशाने पर हमला करने में सक्षम है।
वहीं, इसके विपरीत, सरमत का वजन 200 मीट्रिक टन (220 टन) है और इसमें एक विस्तारित रेंज है, जो इसे उत्तरी या दक्षिणी ध्रुवों पर यात्रा करने और दुनिया में कहीं भी लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम बनाती है, जैसा कि पुतिन ने 2018 में दावा किया था।
इसके अलावा, सरमत काफी संख्या में शक्तिशाली परमाणु हथियार ले जा सकता है। प्रारंभ में, मॉस्को ने वर्ष 2021 तक सरमत परीक्षणों को समाप्त करने के लिए एक समयरेखा की रूपरेखा तैयार की थी, जिसके बाद इसे तुरंत सेना के शस्त्रागार में पेश करने का उद्देश्य रखा गया था।
रूसी रक्षा मंत्रालय ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है, कि सरमत मिसाइल सबसे अविश्वसनीय विनाशकारी रेंज की क्षमता के साथ लैस है और विश्व स्तर पर सबसे शक्तिशाली मिसाइल है। इससे देश की रणनीतिक परमाणु ताकतों की लड़ाकू क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।












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