हार कर भी कैसे फायदे में रहेंगे ऋषि सुनक, जीते तो होगा भारी नुकसान, प्रचार खत्म अब 5 सितंबर का इंतजार
लंदन, 02 सितंबरः ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद की दौड़ के लिए वोटिंग आज स्थानीय समयानुसार शाम पांच बजे समाप्त हो जाएगी। प्रधानमंत्री चुनावों के नतीजों का ऐलान सोमवार 5 सिंतबर दोपहर वेस्टमिंस्टर में किया जाएगा। जिसके बाद ये तय हो जाएगा कि बोरिस जॉनसन की विरासत ऋषि सुनक या लिज ट्रस में से किसके हाथ में लगने जा रही है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि लिज ट्रस के पीएम बनने की संभावना सुनक की तुलना में ज्यादा है। पूर्व विदेश सचिव लिज ट्रस को पूर्व चांसलर ऋषि सुनक के मुकाबले ज्यादा सपोर्ट मिलता दिख रहा है।

हर सर्वे में सुनक पर लिज ट्रस भारी
नतीजे के ऐलान से पहले अब तक हुए तमाम सर्वे में लिज ट्रस, भारतवंशी उम्मीदवार ऋषि सुनक पर भारी रही हैं। लिज ने हर सर्वे में सुनक को पीछे छोड़ा है। ऐसे में इसकी भी प्रबल संभावना है कि लिज ट्रस ही बोरिस जॉनसन विरासत संभालने जा रही हैं। हालांकि सुनक ने आखिरी दम तक अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी है और पूरे दमखम के साथ जीतने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस चुनाव में लिज ट्रस को पीएम बोरिस जॉनसन का खुल कर समर्थन मिल रहा है जो कि सुनक की दावेदारी को और कमजोर बनाता है।

मतदाताओं का दिल नहीं जीत पा रहे सुनक
हालांकि बोरिस जॉनसन ने साफ कहा है कि पीएम पद की इस दौड़ में दोनों में से जो कोई सफल होता है उसे उनका पूरा समर्थन मिलेगा। इस बीच लिज ट्रस ने अपने चुनाव अभियान में टैक्स कटौती के मुद्दे को खूब भुनाया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी वायदा किया है कि वह पीएम बनने के बाद आगे भी टैक्स में कटौती करेंगी। दूसरी तरफ ऋषि सुनक इसके उलट वायदे करते नजर आए। भले ही उनका वायदा मौजूदा परिस्थियों के हिसाब से देश के हित में होगा, लेकिन वह मतदाताओं को भुनाने में अब तक सफल साबित होते नहीं दिख रहे हैं।

ब्रिटेन का पीएम बनना नुकसान का सौदा
अब जब लगभग तय हो चुका है कि लिज ट्रस ही ब्रिटेन की अगली पीएम बनने जा रही है तो हम बताएंगे कि कैसे ये ऋषि सुनक के लिए निराशा की बात नहीं है। हालांकि ऋषि सुनक ने इस चुनाव को जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है लेकिन कैसे ब्रिटेन का चुनाव जीतना फिलहाल घाटे का सौदा है। हम आपको बताएंगे कि कैसे ब्रिटिश चुनाव जीतने के बाद स्कॉटिश हाइलैंड्स में ब्रिटने की रानी से मिलने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर लौटने के बाद लिज ट्रस के पास खुशियां मनाने का बिल्कुल वक्त नहीं होगा और उनके हाथ ऐसा ब्रिटेन सौंपा जाएगा जिसका वक्त इन दिनों उल्टी दिशा में घूम रहा है।

आर्थिक संकट से जूझ रहा ब्रिटेन
जैसा कि यह जगजाहिर है कि ब्रिटेन आर्थिक संकट की राह पर खड़ा है। यूक्रेन में रूस के युद्ध के पीछे ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि, मुद्रास्फीति में जबरदस्त के साथ, ब्रिटेन पीढ़ियों में अपने सबसे खराब जीवन-मूल्य के संकट से जूझ रहा है। कोरोना महामारी ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की जड़ें हिला दी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को 300 साल बाद इतने बुरे दौर में है। वहीं, ट्रस ने कर कटौती की कसम खाई है लेकिन वे सबसे गरीब लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए कुछ नहीं करेंगे। ऐसे में यह स्थिति जल्द सुधर पाएगी इसकी संभावना कम है।

ब्रिटेन में चरम पर महंगाई दर
जो ब्रिटेन एक समय पूरी दुनिया पर राज किया करता था, जिसका सूरज कभी अस्त नहीं होता था, वह इन दिनों भारी तंगहाली से गुजर रहा है। महंगाई चरम पर है और यह 10 से 12 फीसदी होने के दिशा में है। ऐसा दावा किया जा रहा कि जल्द ही ये 15 फीसदी को पार कर 20 फीसदी तक पहुंच सकती है। सितंबर खत्म होते ही ब्रिटने में सर्दियां शुरू हो जाएंगी और ब्रिटिशवासी अक्टूबर से अपने घरों को गर्म रखें या उस ईंधन से खाना बनाएं के विकल्प में खुद को डाल चुके होंगे।

ब्रिटेन में बिगड़ने लगा फाइनेंशियल सिस्टम
बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुताबिक महंगाई का दबाव वहां इतना बढ़ता जा रहा है कि स्थितियां आप से बाहर हो चुकी हैं। ब्रिटिश सरकार को भी समझ नहीं आ रहा है कि स्थिति पर कैसे काबू किया जाए। ब्रिटेन में महंगाई बढ़ने से फाइनेंशियल सिस्टम बिगड़ने लगा है। छोटे कारोबार बंद हो रहे हैं. और ऐसे में बैंकों से लिया गया लोन लौटाया नहीं जा रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर 5 में से 1 मॉर्गेज डिफॉल्ट होने की तरफ बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन में ब्याज दरें निचले स्तर पर हैं और महंगाई के कारण इनमें भी वृद्धि हो सकती है। ऐसे परिवार जिनकी आमदनी कम है, भारी संकट से गुजर रहे हैं।

ब्रिटेन में आने वाला है अस्थिरता का भूचाल
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में वित्तीय अस्थिरता का एक ऐसा भूचाल आने वाला है जो पूरी दुनिया पर असर डाल सकता है। 1970 के दशक के बाद ब्रिटेन सबसे भारी महंगाई के बोझ से गुजर रहा है। बैंकों के बैलेंस शीट बिगड़ने लगे हैं। बैंकों को अंदाजा नहीं थी कि महंगाई दर इतनी बढ़ सकती है। 1990 के दशक में भी जब ब्रिटेन में ऐसा संकट आया था तो वहां फाइनेंशियल सिस्टम धराशायी हो गया था। एक बार फिर वही स्थिति बन रही है।

जो भी पीएम बनेगा उसे मिलेगी अलोकप्रियता
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसे वक्त में जो कोई भी ब्रिटिश पीएम की गद्दी संभालेगा उसकी किस्मत में गरीबों की बद्दुआएं और अमीरों की नाराजगी दोनों आएंगी। चूंकि ब्रिटेन में अगले चुनाव में दो सालों से कुछ ही ज्यादा वक्त बाकी है ऐसे में पीएम के पास इतना वक्त भी नहीं होगा कि वह ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ले कर आ जाए। ऐसे में अगर जनता के बीच लिज ट्रस अलोकप्रिय होती हैं तो स्वाभाविक रूप से ऋषि सुनक को इसका सबसे अधिक फायदा होगा। अगल अगले चुनाव में कंजरवेटिव पार्टी सफल होती है तो वे सबसे बेहतर विकल्प बनकर सामने आ सकते हैं। यह ठीक बात है कि ऋषि के पास जादू की छड़ी नहीं होगी कि वो ब्रिटेन को इन सब से उबार लें लेकिन आर्थिक मामलों में बेहतर समझ होने के कारण उनके पास बाकी सभी से बेहतर समझ होने की उम्मीद की जा सकती है।












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