UK News: औंधे मुंह गिरी ऋषि सुनक की लोकप्रियता! 2 मई के लोकसभा चुनाव से क्यों भागे भारतीय मूल के प्रधानमंत्री?

UK Election News: साल 2024 को चुनावों का साल कहा जा रहा है, क्योंकि इस साल दुनिया के 72 से ज्यादा देशों में राष्ट्राध्यक्षों के चुनाव हो रहे हैं, जिनमें भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। अभी रूस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव चल रहे हैं।

लेकिन, इन चुनावी परिणामों की सबसे दिलचस्प बात ये है, कि यूरोप का ज्यादातर हिस्सा दक्षिणपंथ की ओर झुक रहा है, लेकिन ब्रिटेन में वामपंथियों की तरफ जनता का रूझान बढ़ता जा रहा है और माना जा रहा है, कि इस साल यूनाइटेड किंगडम में होने वाले चुनाव में वामपंथी पार्टी की सरकार बन सकती है।

uk election 2024

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री सुनक ने 2 मई को आम चुनाव करवाने की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और अब संभावना है, कि 10 अक्टूबर को ब्रिटेन में इलेक्शन हो सकते हैं। लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर ऋषि सुनक मई चुनाव से क्यों भाग गये हैं?

भारतीय मतदाताओं को लुभाने की कोशिश

ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय मतदाता काफी अहम भूमिका निभाते हैं और ऋषि सुनक भारतीय मतदाताओं को लुभाने के लिए जहां अपनी भारतीय मूल का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं वामपंथी रूझान वाली विपक्षी लेबर पार्टी ने भी अपनी सालों पुरानी एंटी-इंडिया पॉलिसी में बदलाव करते हुए अपने शेडो विदेश मंत्री डेविड लैमी और शेडो बिजनेस मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स को भारत भेज दिया। ((नोट-- ये ब्रिटेन के असली विदेश और बिजनेस मंत्री नहीं हैं, बल्कि इन्हें लेबर पार्टी ने काल्पनिक मंत्री बनाया है))

इस दौरान डेविड लैमी ने खुलकर भारत की तारीफ की और भारत को एक उभरती हुई महाशक्ति कहा और चुनाव में ब्रिटिश भारतीयों और भारतीय प्रवासियों का समर्थन मांगते हुए "लेबर इंडियंस" लॉन्च किया।

इसके अलावा, उन्होंने भारत के दौरे पर कसम भी खाई, कि यदि ब्रिटेन में अगली सरकार लेबर पार्टी की बनती है, तो भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) समझौता सबसे पहले फाइनल किया जाएगा। आपको बता दें, मौजूदा ब्रिटिश सरकार से भारत के एफटीए को लेकर 14 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक एफटीए पर बात नहीं बन पाई है। अब दोनों देशों ने चुनाव के बाद फिर से एफटीए पर बातचीत को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

लेकिन, लेबर पार्टी के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के भारत दौरे और चुनावी चर्चा ने ब्रिटेन की राजनीति को नये मोड़ पर खड़ा कर दिया है। हालांकि, इतिहास और परंपरा को देखें, तो लेबर पार्टी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि एक्सपर्ट यही मानते हैं, कि सत्ता में लौटते ही लेबर पार्टी अपनी पुरानी जेरेमी कॉर्बिन-युग की भारत-विरोधी नीति पर वापस लौट आएगी, क्योंकि भारत से फौरन लौटते ही लेबर पार्टी के शेडो विदेश मंत्री डेविड लैमी ने ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त डॉ. एम. फैसल से मुलाकात की और फिर ट्वीट किया, कि "पाकिस्तान, ब्रिटेन का एक महान भागीदार है।"

ऋषि सुनक पर क्यों मंडरा रहा हार का खतरा?

ब्रिटेन में 20 निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं, जिनमें 30% से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। पिछले महीने, हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे होयले को लेबर पार्टी के दबाव में गाजा में युद्धविराम के पक्ष में संसद में वोटिंग करवाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

दूसरी तरफ, ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी के मतदाता विभाजित हैं। सबसे ताजा YouGov सर्वेक्षण में कंजर्वेटिव पार्टी को सिर्फ 20 प्रतिशत अंक मिले हैं, जबकि लेबर पार्टी को 47 प्रतिशत अंक मिले है। वहीं, रिफॉर्म यूके पार्टी को 13 प्रतिसत अंक हासिल हुए हैं।

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कंजर्वेटिव पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष ली एंडरसन ने रिफॉर्म यूके पार्टी को ज्वाइन कर लिया है, और आशंका है, कि कई और कंजर्वेटिव नेता इस पार्टी में शामिल हो सकते हैं, जो प्रधानमंत्री ऋषि सनक के लिए बुरी खबर है, जिनकी खुद की लोकप्रियता 25% तक गिर गई है और उन्हें बोरिस जॉनसन (29%) से भी कम अंक मिले हैं। वहीं, कंजर्वेटिव पार्टी से गुस्साए मतदाता अब रिफॉर्म यूके की तरफ रूख कर सकते हैं।

लिहाजा, कंजर्वेटिव पार्टी में फिर से मांग उठ रही है, कि बोरिस जॉनसन एक बार फिर से पार्टी की जिम्मेदारी संभालें और अगर कंजर्वेटिव पार्टी को बचाना है, तो कहा जा रहा है, कि बोरिस जॉनसन की एकमात्र विकल्प हैं। दूसरी तरफ, ऋषि सुनक से कोई जादू करने की उम्मीद की जा रही है। लोग उम्मीद कर रहे हैं, कि ऋषि सुनक किसी ऐसी योजना के साथ आएंगे, जिससे कंजर्वेटिव पार्टी का जनाधार अचानक बढ़ जाए और ये जादू रवांडा के अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेजने की घोषणा हो सकती है। ऋषि सुनक सरकार ने इसी हफ्ते पेशकश की है, कि रवांडा के अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए उन्हें 3 हजार पाउंड दिए जाएंगे।

लेकिन, सबसे बड़ा सवाल ये है, कि क्या कंजर्वेटिव पार्टी में खेमेबाजी खत्म हो पाएगी। पूर्व प्रधानमंत्री लिज ट्रस, पूर्व गृहमंत्री प्रीति पटेल को आगे बढ़ा रही हैं, जबकि, बोरिस जॉनसन का एक अलग गुट है और इन सबके बीच, ऋषि सुनक 3 मई को चुनाव में जाएं या नहीं, इस उधेड़बुन में फंसे हुए हैं।

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