ओवरटाइम करने से महिला रिपोर्टर की मौत, महीने में 159 घंटे किया था ज्यादा काम

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      Japan: Female Reporter died due to 159 hours of overtime | वनइंडिया हिंदी

      टोक्यो। जापान में एक महिला रिपोर्टर की ओवरटाइम करने के कारण मौत हो गई। हैरानी की बात ये है कि इस बात का खुलासा उसकी मौत के चार साल बाद हुआ। 31 साल की मिवा सादो नेशनल ब्रॉडकास्टर में राजनीति कवर करती थीं। साल 2013 में जुलाई में उनकी किन्हीं कारणों से मौत हो गई। अब उनकी मौत के चार साल बाद जाकर उनकी मौत का खुलासा हुआ है जिससे जापान के वर्क कल्चर का एक डरावना चेहरा उभर कर सामने आता है।

      दो महीनें में किए 306 घंटे ज्यादा काम

      दो महीनें में किए 306 घंटे ज्यादा काम

      जापान की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिवा की मौत का कारण ओवरटाइम है। उन्होंने जून में 159 घंटे और 37 मिनट ओवरटाइम किया था। वहीं इससे पहले यानी मई के महीने में भी मिवा ने 147 घंटे ओवरटाइम किया था। उनकी मौत की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि पूरे महीने में मिवा ने केवल दो दिन की छुट्टी ली थी। इस दौरान मिवा वहां हो रहे एक स्थानीय चुनाव को कवर कर रही थीं जिसके कारण उन्हें एक्स्ट्रा काम करना पड़ रहा था।

      स्ट्रेस लेवल बढ़ने से आया हार्ट अटैक

      स्ट्रेस लेवल बढ़ने से आया हार्ट अटैक

      काम के बोझ के चलते मिवा का स्ट्रेस लेवल काफी बढ़ गया था और हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। जापान में ओवरटाइम के कारण मौत का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक एडवरटाइजिंग एजेंसी में काम करने वाली लड़की की ज्यादा काम करने के कारण मौत हो गई। लड़की ने महीने में 100 घंटे से ज्यादा काम किया था और वो इतनी डिप्रेशन में चली गई थी कि उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया था। इस कारण एड कंपनी के सीईओ को इस्तीफा देना पड़ा था।

      इस कारण हर साल होती हैं हजारों मौत

      इस कारण हर साल होती हैं हजारों मौत

      जापान में हर साल ज्यादा काम करने के कारण हजारों मौतें होती हैं। इस कारण होने वाली मौतों को 'कारोशी' कहते हैं यानी 'ओवरटाइम से मौत'। कारोशी का कारण हार्ट अटैक, स्ट्रेस के कारण स्ट्रोक और ज्यादा समय तक भूखे रहना हो सकता है। कई युवा इन बीमारियों का शिकार होते हैं और कई आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लेते हैं।

      युवाओं पर काम का सबसे ज्यादा प्रेशर

      युवाओं पर काम का सबसे ज्यादा प्रेशर

      आजकल युवाओं को नौकरी में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। गलाकाट प्रतियोगिता के बीच सभी पर खुद को साबित करने का प्रेशर है। जापान के युवाओं पर ओवरटाइम के बाद भी सोशलाइज करने का प्रेशर रहता है। ये युवा काम के बाद अक्सर कॉरपोरेट पार्टियों में जाते हैं जिससे इन्हें आने वाले वक्त में फायदा मिल सके। इसे वर्क कल्चर का ही हिस्सा माना जाता है। और ऐसा केवल जापान में नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में होता है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक आजकल के युवा महीने में इतना काम करते हैं कि वो अपनी छुट्टियां भी नहीं ले पाते। बॉस को खुश करने से लेकर डेडलाइन मीट करने तक, युवाओं पर काम का काफी बोझ होता है।

      भारत में बढ़ रही है हार्ट अटैक की समस्या

      भारत में बढ़ रही है हार्ट अटैक की समस्या

      कई वेबसाइट्स के सर्वे के मुताबिक आजकल काम करने वाले लोगों में से 10 में 8 स्ट्रेस से जूझ रहे हैं। स्ट्रेस, एंग्जाइटी, पैनिक अटैक्स इन लोगों की जिंदगी का आम हिस्सा बन गया है। कई देशों ने अपने यहां वर्क कल्चर सुधारने के लिए कदम भी उठाए हैं। फ्रांस, द नीदरलैंड्स, जर्मनी, न्यूजीलैंड्स जैसे देशों ने अपने यहां काम के घंटे कम किए हैं, वहीं जापान, चीन, साउथ कोरिया, भारत, अमेरिका में अभी भी लोग रोजाना 10 घंटे से ऊपर काम करते हैं। भारत में भी 30 साल से कम उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के केस बढ़े हैं। इनमे से अधिकतर को स्ट्रेस के कारण हार्ट अटैक आया था।

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      English summary
      According to Japan's media reports, the reason for the death of Mewa is overtime. They had overtime for 159 hours and 37 minutes in June. Even before that in the month of May, Miwa had overtime for 147 hours.

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