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इन 3 लोगों की वजह से कैंसिल हुई अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग की मीटिंग

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    वॉशिंगटन। गुरुवार को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया के साथ होने वाले शिखर सम्‍मेलन को पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। 12 जून को सिंगापुर में डोनाल्‍ड ट्रंप और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन की मुलाकात होने वाली थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ट्रंप ने इसके साथ ही एक चिट्ठी भी जारी की। इस चिट्ठी में उन्‍होंने पिछले कुछ दिनों में नॉर्थ कोरिया की ओर से किए गए सकारात्‍मक प्रयासों की सराहना तो की लेकिन साथ ही उन्‍होंने एक चेतावनी भी थी। ट्रंप का यह फैसला इतना अचानक था कि साउथ कोरिया को भी इसकी भनक नहीं लगी जबकि उसके राष्‍ट्रपति मून जे इन हाल ही में अमेरिकी दौरे से वापस आए हैं। ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है जब माना जा रहा था कि किम जोंग उन वार्ता को कैंसिल करेंगे। आखिर ऐसी क्‍या वजहें थी जिन्‍होंने ट्रंप को इतना बड़ा फैसला अचानक लेने पर मजबूर कर दिया।

    चीन और राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग

    चीन और राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग

    साउथ कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे इन और अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच तीन दिन पहले व्‍हाइट हाउस में मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के बाद जब ट्रंप मीडिया से बात कर रहे थे तो उन्‍होंने चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग को वर्ल्‍ड क्‍लास पोकर प्‍लेयर करार दिया।ट्रंप ने अपनी इस टिप्‍पणी के साथ ही इस तरफ भी इशारा किया है कि जिनपिंग ने नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन को अमेरिका के साथ बातचीत से पहले प्रभावित किया है। ट्रंप ने कहा कि मई में जब से किम जोंग चीन से वापस लौटे हैं तब ही उनका बर्ताव काफी बदल गया है और वह पहले की तुलना में अब काफी अडि़यल हो गए हैं। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि जिनपिंग के साथ मुलाकात के बाद किम जोंग उन के बर्ताव में काफी बदलाव है। दूसरी बार चीन से जाते समय किम जोंग में काफी अंतर था। राष्‍ट्रपति जिनपिंग एक वर्ल्‍ड क्‍लास पोकर प्‍लेयर हैं।' उन्‍होंने आगे कहा कि हो सकता है कि कुछ न हुआ हो और वह किसी को भी दोष नहीं दे रहे हैं। लेकिन दूसरी बार चीन से लौटने के बाद नॉर्थ कोंरिया के नेता के बर्ताव में काफी अंतर है।

    एनएसए जॉन बोल्‍टन और उप-राष्‍ट्रपति माइक पेंस

    एनएसए जॉन बोल्‍टन और उप-राष्‍ट्रपति माइक पेंस

    इस वार्ता के कैंसिल होने के पीछे सबसे अहम वजह हैं राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर (एनएसए) जॉन बोल्‍टन। अप्रैल में बोल्‍टन ने एक बयान दिया था जिसमें उन्‍होंने नॉर्थ कोरिया की तुलना में लीबिया से की थी। उन्‍होंने कहा था कि साल 2003 में जब मुआम्‍मार गद्दाफी अमेरिकी सेना के इराक में दाखिल होने के बाद अपने सभी परमाणु कार्यक्रमों को छोड़कर ही माने।इसके बाद पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में यहां पर नाटों की सेनाएं दाखिल हुईं और गद्दाफी की मौत के बाद ही सब-कुछ खत्‍म हो गया। अमेरिकी उप-राष्‍ट्रपति माइक पेंस ने भी बोल्‍टन की बात का समर्थन किया। आठ मई को किम जोंग उन दोबारा चीन गए और शी जिनपिंग से मिले। बोल्‍टन का बयान और किम के दूसरे चीन दौरे ने सारी स्थितियों को बदल दिया। नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया के साथ वार्ता को भी कैंसिल कर दिया और यहां तक कह डाला कि अब अमेरिका के साथ भी वार्ता
    कैंसिल हो सकती है।

    किम जोंग के बदलते तेवर

    किम जोंग के बदलते तेवर

    अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया के बातचीत रद्द करने के फैसले पर कहा था कि आगे देखना होगा कि किम जोंग उन क्‍या फैसला लेते हैं। नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया के साथ बुधवार को हाई लेवल वार्ता होनी थी लेकिन इसे रद्द करके नॉर्थ कोरिया ने शांति की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है। नॉर्थ कोरिया ने यह कदम अमेरिका-साउथ कोरिया के बीच जारी मिलिट्री एक्‍सरसाइज की वजह से उठाया है। नॉर्थ कोरिया का कहना था कि यह एक्‍सरसाइज नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच बेहतर संबंधों के खिलाफ है। किम जोंग का बदला हुआ रुख कहीं न कहीं ट्रंप के लिए मुसीबत बन गया था।

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    English summary
    On Thursday US President Donald Trump has announced that he is cancelling talks with North Korea's Kim Jong Un.

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