ईरान में खूनी संघर्ष, रज़ा पहलवी का दावा- प्रदर्शनों में 1200 से ज़्यादा मौतें, 9/11 से चार गुना बड़ा नरसंहार
Iran conflict: ईरान में जारी जनआंदोलन को लेकर चौंकाने वाला दावा सामने आया है। ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी के अनुसार, देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 12,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा हताहत केवल पिछले दो दिनों में हुए हैं, जो हालात की भयावहता बयां कर रहा है।
पहलवी ने इस त्रासदी की तुलना 9/11 आतंकी हमलों से करते हुए कहा कि ईरान में मारे गए लोगों की संख्या उस ऐतिहासिक हमले से चार गुना अधिक है। यह बयान न सिर्फ़ ईरान की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर भी तीखी बहस छेड़ दी है।

हालांकि पहलवी से पहले ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के समकालीन इतिहास में सबसे बड़े नरसंहार में कम से कम 12,000 लोगों की मौत हुई है। यह हत्याकांड मुख्य रूप से 8 और 9 जनवरी को उस समय अंजाम दिया गया, जब देश में इंटरनेट पूरी तरह बंद था।
दावा- खामेनेई के सीधे आदेश हुई ये हिंसा
वरिष्ठ सरकारी और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सीधे आदेश पर हुई, जिसमें सरकार की तीनों शाखाओं की जानकारी और मंजूरी शामिल थी। सुरक्षा परिषद ने सीधी गोलीबारी के आदेश दिए, और इस दमन में आईआरजीसी, मेडिकल स्टाफ, चश्मदीदों और पीड़ित परिवारों से मिली जानकारियों की पुष्टि की गई है।
विदेश मंत्री ने दिया था ये बयान
ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने हाल ही में जारी एक बयान में कहा कि तेहरान क्षेत्रीय "प्रतिरोध समूहों" का समर्थन करता है, लेकिन उनके कार्यवाहियों के लिए कोई सीधा आदेश जारी नहीं करता। यह बयान उन्होंने ओस्लो में अपने नॉर्वेजियन समकक्ष एस्पेन बार्थ ईडी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान दिया था।
अब्दुल्लाहियन ने हमास द्वारा की गई "अल-अक्सा जलप्रलय" ऑपरेशन का जिक्र करते हुए जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह से फिलिस्तीनी निर्णय था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम खुले तौर पर प्रतिरोध समूहों का समर्थन करते हैं, लेकिन हम उन्हें कोई कार्रवाई करने का आदेश नहीं देते।" उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा और विश्लेषण का विषय बनाया गया है।
ईरान के विदेश मंत्री ने गाजा संघर्ष पर भी टिप्पणी की, चेतावनी दी कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका "गाजा में इजरायल के अपराधों के लिए अपना पूर्ण समर्थन" जारी रखता है, तो क्षेत्र को नई और अधिक जटिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।












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