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काबुल में भारतीय दल पर तालिबान ने तानीं बंदूकें, रविकांत गौतम बोले-'हम 56 घंटे न सोए, न कुछ खाया'

काबुल, 18 अगस्त। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया है। वहां पर फंसे भारतीयों की भी सुरक्षित वतन वापसी करवाई जा रही है। 150 भारतीय नागरिकों व राजनयिकों के दल को काबुल से भारत लाने वालों में शामिल आईटीबीपी के कमांडेंट रविकांत गौतम ने वहां का खौफनाक मंजर बयां किया है।

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    पांच बार के प्रयास में पहुंचे एयरपोर्ट

    पांच बार के प्रयास में पहुंचे एयरपोर्ट

    काबुल में फंसे भारतीय को अपने देश लाना इतना आसान नहीं जितना लग रहा है। रविकांत गौतम बताते हैं कि वे अपनी जिंदगी के वो 56 घंटे कभी नहीं भूल पाएंगे। जब ना सो सके और ना कुछ खाया और तालिबान से सामना हुआ तो उनके लड़ाकों ने बंदूकें तान दीं। मौत सामने थी। फिर भी पांच बार के प्रयास में विमान तक पहुंच पाए।

    एमपी के शिवपुरी के रहने वाले हैं रविकांत गौतम

    एमपी के शिवपुरी के रहने वाले हैं रविकांत गौतम

    दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के शिवपुरी के रामस्वरूप गौतम के बेटे रविकांत गौतम काबुल में ही तैनात थे। वहां भारतीय दूतावास में 15 अगस्त 2021 की सुबह नौ बजे स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया ही था। तभी पता चला कि दूतावास से महज 50 मीटर दूर से विस्फोट करते हुए तालिबानी काबुल पर कब्जा जमाने आगे बढ़ रहे थे।

     काबुल एयरबेस पर खड़े थे दो विमान

    काबुल एयरबेस पर खड़े थे दो विमान

    भारत के दो विमान काबुल एयरबेस पर खड़े थे, जिनके जरिए भारतीय नागरिकों व राजनयिकों को देश भेजना था। 46 लोगों के पहले दल को तो सुरक्षित एयरपोर्ट तक पहुंचा दिया, मगर दूसरे दल को पहुंचाने में दिक्कतें हुईं। दूसरे दल में खुद रविकांत गौतम, राजदूत, 99 कमांडो, तीन महिलाएं व दूतावास स्टाफ शामिल था।

     एयरपोर्ट के रास्ते में तालिबानियों से सामना

    एयरपोर्ट के रास्ते में तालिबानियों से सामना

    दूसरा दल 15 अगस्त की शाम को एयरपोर्ट के लिए निकला, ​क्योंकि दूसरे दल में शामिल लोगों को शहर के अलग अलग स्थानों से लिफ़्ट करना पड़ा। दूसरा दल एयरपोर्ट जा रहा था तो रास्ते में एक चेक प्वाइंट पर हथियारबंद तालिबानी समूह से झड़प हो गई। तालिबानियों ने हवाई फायर किया। रॉके लॉन्चर भी निकाल लिए। भारतीय दल पर तालिबानियों ने बंदूकें तान दी। भारतीय जवान और तालिबानी आमने-सामने हो गए, लेकिन बिना किसी जान माल के नुकसान के कुछ देर बाद हालात सामान्य हुए। ऐसे में पूरा भारतीय दल वापस दूतावास लौट आया। भारतीय दूतावास काबुल एयरपोर्ट से 15 किमी दूर था।

     तड़के साढ़े तीन बजे पहुंचे एयरपोर्ट

    तड़के साढ़े तीन बजे पहुंचे एयरपोर्ट

    दूसरे दिन 16 अगस्त की शाम तक एयरपोर्ट पहुंचने की चार बार कोशिश की, मगर रास्ते में हर जगह हथियारबंद तालिबानी मिले। वापस लौट आए। फिर रात साढ़े बजे पांचवां प्रयास किया। तालिबानियों को चकमा देते हुए रात साढ़े तीन बजे काबुल एयरबेस पहुंचे। सुबह साढ़े पांच बजे भारतीय सी-17 विमान ने भारत के लिए उड़ान भरी। सुबह सवा 11 बजे विमान गुजरात पहुंचा। इसके बाद वहां से हिंडन एयरबेस गाजियाबाद पहुंचे। इन 56 घंटों के दौरान भारतीय दल में से ना कोई सो पाया और ना ही किसी ने खाना खाया।

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