Ramadan 2026: मक्का-मदीना में 'ऐतिकाफ़' रजिस्ट्रेशन शुरू, अप्लाई करने का जानें पूरा प्रोसेस
Ramadan 2026: अगर आप 2026 के रमज़ान में मक्का या मदीना की पवित्र मस्जिदों में आख़िरी दस रातें इबादत में बिताने का सपना देख रहे हैं, तो ये आपके लिएबड़ी खबर है। मस्जिद अल-हरम (Grand Mosque, Mecca) और Al-Masjid An-Nabawi (पैगंबर की मस्जिद, मदीना) में रमज़ान 1447 हिजरी (2026) के लिए ऐतिकाफ़ (मस्जिद में ठहरना और इबादत करना) रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। और हां, ये कोई ऑफलाइन लाइन-लगाओ सिस्टम नहीं है-पूरी प्रोसेस डिजिटल है और ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।
ऐतिकाफ़ क्या है? कहां से हुआ शुरू?
सबसे पहले बेसिक्स क्लियर करें। ऐतिकाफ़ (I'tikaf) इस्लाम की एक अहम इबादत है, जिसमें इंसान दुनियावी काम-काजों से दूर होकर मस्जिद में रहकर पूरी तरह इबादत, तिलावत और आत्म-चिंतन में जुट जाता है। इसकी शुरुआत पैगंबर मुहम्मद की सुन्नत से जुड़ी है। हदीसों के मुताबिक, वे रमज़ान की आख़िरी दस रातों में ऐतिकाफ़ किया करते थे।

ये सदियों से चली आ रही प्रथा है। फर्क बस इतना है कि पहले लोग सीधे पहुंच जाते थे, अब डिजिटल अप्रूवल ज़रूरी है। यानि, ग्रोथ सिर्फ टेक्नोलॉजी में हुई है, इबादत की भावना वही है।
2026 में कब और कैसे करें रजिस्ट्रेशन?
ग्रैंड मस्जिद और पैगंबर की मस्जिद संचालन कमेटी प्रोसेस जारी किया है:
• रजिस्ट्रेशन खुला: 3 रमज़ान 1447 हिजरी (शुक्रवार), सुबह 11 बजे
• ऐतिकाफ़ की अवधि: 20 से 30 रमज़ान (आख़िरी दस दिन)
• आवेदन का तरीका: केवल ऑनलाइन
आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल-
https://eservices.alharamain.gov.sa/login
प्रोसेस को आसानी से समझें:
• लॉग इन करें या नया अकाउंट बनाएं
• Nafath प्लेटफ़ॉर्म के जरिए वेरिफिकेशन (नागरिक/निवासी)
• मक्का या मदीना में से लोकेशन चुनें
• नियमों से सहमति दें
• आवेदन सबमिट करें
• अगर चयन हुआ तो SMS से कन्फर्मेशन मिलेगा
डिजिटल मैनेजमेंट: भीड़ कंट्रोल से स्पिरिचुअल फोकस तक
पिछले कुछ सालों में रमज़ान के दौरान मक्का और मदीना में आने वाले ज़ायरीनों की संख्या में भारी growth देखी गई है। Reuters और BBC जैसी रिपोर्ट्स के मुताबिक, उमरा सीजन में हर साल लाखों लोग इन पवित्र स्थलों पर पहुंचते हैं। ऐसे में ऐतिकाफ़ के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, भीड़ नियंत्रण. सुरक्षा, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को सरल बनाने के लिए ज़रूरी है।
20 से 30 रमज़ान: क्यों खास हैं ये दस रातें?
रमज़ान की आख़िरी दस रातों को इस्लाम में बेहद अहम माना जाता है। इन्हीं में से एक रात लैलतुल क़द्र मानी जाती है, जिसे 'हज़ार महीनों से बेहतर' बताया गया है।
ऐतिकाफ़ का मकसद:
• दुनियावी शोर से दूरी
• खुद से कनेक्शन
• इबादत में फुल focus
• आध्यात्मिक रीसेट
क्या ये सबके लिए ओपन है?
हां, लेकिन:
• नियमों का पालन अनिवार्य
• सीमित स्लॉट
• सिर्फ approved आवेदक ही ठहर सकते हैं
यहां 'पहले आओ पहले पाओ' जैसा सिस्टम नहीं, बल्कि Structured Approval Process है।












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