Ramadan 2026: रमजान के दौरान टूटा Al-Aqsa मस्जिद का 60 साल पुराना समझौता, पहली शाम में छापीमारी, इमाम अरेस्ट
Ramadan 2026: रमजान शुरू होते ही मुस्लिम और यहूदियों के बीच तनाव और बढ़ गया जब मुस्लिम कर्मचारियों को अल-अक्सा मस्जिद (Al Aqsa Mosque) में घुसने के दौरान गिरफ्तार किया गया, सैकड़ों मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाई गई और यहूदियों ने मस्जिद परिसर में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। हालात तब और गंभीर हो गए जब अल-अक्सा मस्जिद के एक इमाम को हिरासत में लिया गया और रमजान की पहली रात की शाम की नमाज़ के दौरान इजरायली पुलिस ने छापेमारी की।
60 साल पुराना समझौता खत्म
हाल ही में एक जानकारी बाहर आई कि येरूशलम के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर मुस्लिम और यहूदी प्रार्थना को नियंत्रित करने वाला करीब 60 साल पुराना 'यथास्थिति समझौता' अब लगभग खत्म हो चुका है। दोनों धर्मों के लोग इसका जिम्मेदारा एक-दूसरे की सरकारों और नेताओं को बता रहे हैं।

मुस्लिम वर्कर्स गिरफ्तार, इमाम भी अरेस्ट
इस सप्ताह हालात और बिगड़ गए जब मुस्लिम कार्यवाहक कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, सैकड़ों मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाई गई और कट्टरपंथी यहूदी समूहों ने परिसर में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। हालात तब और गंभीर हो गए जब अल-अक्सा मस्जिद के एक इमाम को हिरासत में लिया गया और रमजान की पहली रात की शाम की नमाज़ के दौरान इजरायली पुलिस ने छापेमारी की।
कैसे और कब हुआ था समझौता?
येरूशलम पुलिस और इंटरनल सिक्योरिटी एजेंसी शिन बेत, जो इस समय कट्टर-दक्षिणपंथी नेताओं के इशारे पर काम कर रही हैं, उसकी हालिया कार्रवाइयों को 1967 के 6 दिन चले युद्ध के बाद लागू हुए समझौते का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। इस समझौते के तहत पवित्र परिसर में केवल मुसलमानों को प्रार्थना करने की अनुमति थी, लेकिन धीरे-धीरे यहूदियों का दखल समय के साथ बढ़ता चला गया।
मुसलमानों के लिए अल-हरम अल-शरीफ, यहूदियों के लिए टेंपल माउंट
यह पवित्र परिसर मुसलमानों के लिए अल-हरम अल-शरीफ के नाम से जाना जाता है, जिसमें सातवीं सदी का डोम ऑफ द रॉक भी शामिल है। कहा जाता है कि इसी चट्टान पर चढ़कर पैगम्बर मोहम्मद वहीं यहूदियों के लिए यह टेंपल माउंट है। यहूदियों के मुताबिक ये उनका पहला मंदिर है और इसे राजा सुलेमान ने 957 ईसा पूर्व में बनवाया था। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, AD 70 में रोमन साम्राज्य ने दूसरा मंदिर नष्ट कर दिया था।
बदलाव से भड़कता है संघर्ष
इतिहास गवाह है कि इस 'यथास्थिति' में बदलाव ने पहले भी बड़े टकराव को जन्म दिया है। साल 2000 में तत्कालीन इजरायली विपक्षी नेता एरियल शेरोन की यात्रा ने दूसरे फिलिस्तीनी इंतिफादा को जन्म दिया था, जो करीब पांच साल चला और हजारों लोग प्रभावित हुए।
2023 का हमला और 'अल-अक्सा फ्लड'
7 अक्टूबर 2023 में हमास ने इजरायल पर जो हमला किया था उसका नाम भी 'अल-अक्सा फ्लड' दिया था। इस हमले में 1,200 इजरायली मारे गए और इसके बाद गाजा में युद्ध शुरू हुआ। हमास का दावा था कि यह कदम येरूशलम की मस्जिद में कथित इजरायली उल्लंघनों के कारण उठाया गया।
'अल-अक्सा एक डेटोनेटर है'
येरूशलम के वकील डैनियल सीडमैन, जो शहर के कानूनी और ऐतिहासिक मामलों पर इजरायली, फिलिस्तीनी और विदेशी सरकारों को सलाह देते हैं, उन्होंने कहा- 'अल-अक्सा एक डेटोनेटर है।' उनका मतलब था कि यहां कोई भी वास्तविक या कथित खतरा बड़े विस्फोटक हालात पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान उकसावे की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार हालात ज्यादा संवेदनशील हैं। उन्होंने वेस्ट बैंक के इलाके को 'बारूद का ढेर' भी बताया था।
क्यों बढ़ता जा रहा तनाव?
धुर-दक्षिणपंथी नेताओं के प्रमुख पदों पर आने के बाद तनाव और बढ़ गया है। इन्हीं में से एक नाम है, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर, जिन। बेन-ग्विर पर पहले आतंकवादी संगठन का समर्थन और नस्लवाद बढ़ावा देने जैसे आरोपों में आठ आपराधिक दोष सिद्ध हो चुके हैं। बेन-ग्विर ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली झंडा फहराने और वहां पूजा घर बनाने की इच्छा जताई है।
बेन-ग्विर बार-बार जाते हैं अल-अक्सा
बेन-ग्विर ने पिछले एक साल में कई बार अल-अक्सा का दौरा किया है। उन्होंने ऐसे बदलावों का समर्थन किया है, जिनसे यहूदियों को परिसर में प्रार्थना और गीत गाने की अनुमति मिली। जनवरी में उन्होंने मेजर जनरल अविशालोम पेलेड को येरूशलम पुलिस प्रमुख नियुक्त किया, जिन्हें उनका वैचारिक सहयोगी माना जाता है।
नेतन्याहू का समर्थन है या नहीं?
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कथित समर्थन इस बात से साफ होता है जब यहूदी समुदाय के लोगों को प्रिंटेड प्रार्थना पत्र लेकर आने की अनुमति दी जाती है, जिसे समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है। सीडमैन ने कहा, 'अब रोजाना प्रार्थनाएं हो रही हैं, इसलिए समझौते वाली स्थिति खत्म हो चुकी है।'
वक्फ पर बढ़ता दबाव
येरूशलम वक्फ, जो जॉर्डन द्वारा नियुक्त संस्था है और परिसर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती है, पर इस साल रमजान से पहले भारी दबाव बढ़ गया है। वक्फ सूत्रों के मुताबिक, इस सप्ताह पांच कर्मचारियों को शिन बेत ने बिना आरोप प्रशासनिक हिरासत में रखा और 38 कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश से रोका गया।
इमामों पर भी रोक और दफ्तरों में तोड़फोड़
सूत्रों ने बताया कि छह इमामों को भी प्रवेश से रोका गया है। हाल के हफ्तों में छह वक्फ कार्यालयों में तोड़फोड़ हुई। कर्मचारियों को दरवाजे ठीक करने या अन्य मरम्मत करने से रोका गया। यहां तक कि नमाजियों के लिए अस्थायी क्लिनिक या बारिश से बचाव के इंतजाम करने की अनुमति भी नहीं दी गई। अधिकारियों का आरोप है कि टॉयलेट पेपर तक लाने से रोका गया।
हजारों नमाजियों की जरूरतें प्रभावित
इन सभी कार्रवाइयों का असर यह हुआ कि रमजान के दौरान अल-अक्सा में आने वाले अनुमानित 10,000 मुसलमानों की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया। वहीं फिलिस्तीनी-प्रशासित येरूशलम गवर्नररेट ने अलग आंकड़े दिए। उनके मुताबिक 25 कर्मचारियों पर प्रतिबंध और चार को हिरासत में लिया गया। येरूशलम पुलिस और शिन बेत ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की।
बार-बार गिरफ्तारियां
रमजान के पहले सप्ताह में पुलिस ने यहूदियों और पर्यटकों के लिए सुबह की यात्रा अवधि तीन से बढ़ाकर पांच घंटे कर दी। इसे भी समझौते में एकतरफा बदलाव माना गया। सोमवार को अल-अक्सा के इमाम शेख मोहम्मद अल-अब्बासी को परिसर के अंदर हिरासत में लिया गया। सोशल मीडिया पर मंगलवार शाम की पहली रमजान नमाज़ के दौरान पुलिस कार्रवाई के वीडियो भी सामने आए। गुरुवार को करीब 400 सेटलर परिसर में दाखिल हुए। चश्मदीदों के मुताबिक, उन्होंने वहां गीत गाए, नृत्य किया और ऊंची आवाज में प्रार्थना की।
'यह रमजान खतरनाक हो सकता है'
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक अमजद इराकी ने कहा, 'इतने सारी वजहें हैं जो इस रमजान को खास तौर पर खतरनाक बनाते हैं।' उन्होंने कहा कि पिछले साल फिर भी कुछ शांति थी, लेकिन इस बार हालात अलग हैं और टेंपल माउंट से जुड़े कार्यकर्ता नए बदलावों के लिए उकसाने वाले हो सकते हैं। इसके साथ ही, इजरायली की मौजूदा सरकार को अंतर्राष्ट्रीय दबाव का भी कोई डर नहीं है, इसलिए मनमानी और खुले ढंग से हो रही है।
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि अल-अक्सा/टेंपल माउंट सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैश्विक तनाव का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह पूरी दुनिया की नजरों में रहेगा।
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